क्या बिहार में फिर चलेगा मोदी-नीतीश का जादू, जानें क्या कहते हैं चुनावी पहलू…
पटना…”हमारी पार्टी से गलती हो गई थी… कुछ लोग गड़बड़ कर दिए थे, उन्हें हटा दिया गया है।। अब कहीं गलती से इधर-उधर नहीं जाएंगे…जो हमारे साथ प्रारम्भ में थे, वही आगे भी साथ रहेंगे”। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को यह बात फिर दोहराई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यह बात कई बार कह चुके हैं तो इसपर सियासी हलचल अब नहीं होती। लेकिन, जब दो दिन के भीतर ही प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश, एक ही संदेश देते दिख रहे हों तो निश्चित तौर पर राजनीतिक प्रश्न उठेंगे ही। ऐसा इसलिए बीते शुक्रवार को जीविका दीदियों के खातों में 10-10 हजार रुपये भेजने के अवसर पर प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसी से मिलती-जुलती बात कही थी और ”हम दो भाई” वाला संदेश दिया था। राजनीति के जानकारों की नजर में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का यह बयान चुनावी मौसम में न सिर्फ़ जनता के दिलों पर दस्तक देने की प्रयास थी, बल्कि चार अहम रणनीति का हिस्सा थी!

दरअसल, बीते शुक्रवार (28 सितंबर) को पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार ने संयुक्त रूप से स्त्री रोजगार योजना की पहली किस्त जारी की। इस अवसर पर प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा- ”आपके दो भाई नरेंद्र और नीतीश आपके लिए काम कर रहे हैं”। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का यह कथन बिहार विधानसभा चुनाव से पहले रणनीतिक रूप से बहुत जरूरी बताया जा रहा है। राजनीति के जानकार इस बयान के जो अर्थ निकाल रहे हैं वो बड़े गहरे हैं। जानकारों की नजर में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के इस बयान का सीधा संदेश बिहार की आधी जनसंख्या के लिए था, लेकिन इसके असर का फैलाव का लक्ष्य प्रदेश की पूरी जनता थी। जानकार कहते हैं कि पीएम मोदी का यह कथन महज़ भाषण का हिस्सा नहीं था, बल्कि बिहार चुनाव की गहरी रणनीति भी समेटे हुए है।
साझा नेतृत्व की तस्वीर हुई पेश
दरअसल, बिहार में सत्ता और राजनीति के समीकरण लगातार बदलते रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश का ‘इधर-उधर’ वाला बयान और प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘दो भाई’ वाला बयान एक गहरे सियासी संदेश की ओर इशारा करता है। यह न सिर्फ़ स्त्री मतदाताओं को लुभाने की प्रयास है, बल्कि नीतीश कुमार के साथ एनडीए की एकता को भी मजबूत ढंग से पेश करता है। राजनीति के जानकार कहते हैं कि सियासी रूप से प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का यह संदेश एनडीए के भीतर सामंजस्य और भरोसे को दिखाने वाला है। स्त्रियों के लिए रोजगार योजना की प्रथम किस्त जारी करने के मौके पर दिया गया यह बयान स्त्री मतदाताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ने का कोशिश है। भाईचारे का प्रतीक प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का यह संदेश न सिर्फ़ नीतीश कुमार की स्थिति को मज़बूत करता है, बल्कि एनडीए की एकजुटता और साझा नेतृत्व की तस्वीर भी पेश करता है।
महिलाओं के लिए भाई का संदेश
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में स्त्रियों को सीधे जोड़ते हुए स्वयं और नीतीश को उनका ‘भाई’ कहा तो इसके पीछे भी वजह है। दरअसल, बिहार की राजनीति में स्त्रियों की भागीदारी हमेशा निर्णायक रही है। जीविका दीदियों की ताकत, पंचायत चुनावों में स्त्री आरक्षण का असर और सरकारी योजनाओं से सीधे जुड़े लाभार्थियों की संख्या-ये सभी फैक्टर मोदी के बयान को बहुत असरदार बनाते हैं।महिलाओं के सामने एक ‘भाई’ के रूप में प्रस्तुत होना स्त्रियों में भरोसे और आत्मीयता का रेट जगाने की प्रयास है।
भाईचारे की सियासत, खास मैसेज
दरअसल, भाई-बहन का रिश्ता भारतीय समाज में गहरी भावनात्मक जड़ें रखता है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान का मकसद स्त्रियों के भीतर एक ‘सुरक्षा कवच’ और ‘परिवार’ जैसा रेट जगाना है। चुनावी रणनीति में स्त्री मतदाता सबसे निर्णायक साबित हो सकती हैं। बिहार में स्त्री वोटिंग फीसदी मर्दों से अधिक होता रहा है। ऐसे में यह संदेश सीधे स्त्री वोट बैंक पर फोकस करता है और उनके लिए एक भावनात्मक जुड़ाव रचता है। चुनावी रणनीति में यह लाइन कि- ‘आपका भाई नरेंद्र और नीतीश”, स्त्रियों के बीच भाई का रेट जगाकर एनडीए को फायदा पहुंचा सकती है।
बिहार चुनाव की रणनीति में बड़ा संकेत
जानकार कहते हैं कि सीएम नीतीश कुमार लंबे समय से सत्ता में हैं और उनके नेतृत्व पर प्रश्न उठते रहे हैं। तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर जैसे नेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘अचेत अवस्था’ में होने के इल्जाम लगाते हैं। लेकिन, पीएम नरेंद्र मोदी का ‘दो भाई’ वाला कथन नीतीश कुमार की साख को दोबारा वैधता देता है। ऐसे में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का यह साफ संदेश है कि भाजपा और जदयू मिलकर साथ खड़े हैं और जनता के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘आपके दो भाई’ वाला बयान, एनडीए को एकजुट दिखाने और नीतीश कुमार के नेतृत्व पर विश्वास का सबसे आसान तरीका यह लाइन साबित हो सकती है।
नीतीश कुमार की किरदार को मजबूती
बीते दो दशक से बिहार की सत्ता के शीर्ष पर विराजमान नीतीश कुमार बार-बार सियासी समीकरण बदलते रहे हैं। इसको लेकर उनपर प्रश्न भी उठते रहे हैं। भरोसे और विश्वास के पैमाने पर वह कठघरे में खड़े दिखते रहे हैं। बीते कुछ सालों में तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश की छवि- ‘पलटूराम’, वाली बनाने की पुरजोर प्रयास की है। यह तब और परफेक्ट बैठता है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बार-बार संदेश देते हुए दिखते हैं कि अब वह पाला बदली नहीं करेंगे। अब तो ‘दो भाई’ वाला बयान देकर इस बार उन्हें पीएम मोदी का सार्वजनिक समर्थन मिल गया है जो मुख्यमंत्री नीतीश की साख को दोबारा स्थापित करने का कोशिश लगता है।
एनडीए की एकजुटता की नयी परिभाषा
पीएम मोदी के बयान का एक और अहम पहलू भाजपा-जदयू के बड़े भाई-छोटे भाई के नैरेटिव के टकराव को समाप्त करना भी है। दरअसल, चुनाव के समय गठबंधन के भीतर असहमति की खबरें अक्सर आती हैं। 2020 के चुनाव में जिस तरह बीजेपी बढ़ी और जदयू तीसरे नंबर की पार्टी बन गई इसने दोनों पार्टियों के बीच विश्वास और भरोसे पर चोट किया है। लेकिन, ”आपके लिए नीतीश भाई भी काम कर रहे हैं” कहकर प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने पल में मुख्यमंत्री नीतीश को बराबरी का दर्जा दे दिया। जाहिर है यह संदेश जदयू कार्यकर्ताओं के लिए आत्मशक्ति बढ़ाने वाला है और गठबंधन की आंतरिक राजनीति में नीतीश की स्थिति को भी मजबूत करता है।
पीएम मोदी का विपक्ष पर अप्रत्यक्ष हमला
पीएम मोदी का यह कथन विपक्षी दलों के लिए भी एक चुनौती है, क्योंकि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान ने यह दिखाया कि एनडीए का नेतृत्व दो चेहरों- मोदी और नीतीश… के इर्द-गिर्द घूमता है। इस साझेदारी का सीधा लाभ जमीनी स्तर पर मिल सकता है, जहां कार्यकर्ता अब स्वयं को एक परिवार का हिस्सा मानकर काम करेंगे। ‘दो भाई काम कर रहे हैं’ का संदेश विपक्ष को घेरने का एक तरीका भी है, क्योंकि यह कहकर एनडीए ने स्वयं को परिवार के रूप में पेश कर दिया है, जबकि विपक्ष को सत्ता संघर्ष में उलझा हुआ दिखाने की प्रयास की गई है। ऐसे में आरजेडी या कांग्रेस पार्टी अब प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के इस रणनीति पर किस तरह का नैरेटिव खड़ा करते हैं, यह देखना होगा।
भावनाओं की रणनीति और राजनीतिक संदेश
कुल मिलाकर नरेंद्र मोदी का यह बयान सिर्फ़ भाषण का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक माहिर, परिपक्व और लाजवाब चुनावी रणनीति है। एक ओर भावनाओं को छूकर स्त्री वोट बैंक को साधना, नीतीश कुमार को मजबूत करना और एनडीए की एकता दिखाने के साथ ही विपक्ष के तल्ख हमलों की धार को कुंद करना, चारों ही पहलुओं को ”हम दो भाई” के इस एक लाइन में पिरो दिया गया है। बिहार चुनाव में यह कथन एनडीए के लिए वोट जुटाने का एक बड़ा मंत्र साबित हो सकता है। ऐसे में राजनीति के जानकार स्पष्ट रूप से मानते हैं कि ”आपके दो भाई नरेंद्र और नीतीश जी आपके लिए काम कर रहे हैं”, महज पीएम मोदी के भाषण का हिस्सा नहीं था, बल्कि बिहार चुनाव की गहरी रणनीति भी समेटे हुए है।

