क्या नीतिश-नायडू को भुगतना पड़ेगा वक्फ बिल का समर्थन देने का हर्जाना…
Chandrababu Naidu, Nitish Kumar On Board For Waqf Bill: वक्फ संशोधन बिल 2024 आखिरकार लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पास हो गया। लोकसभा में 2 अप्रैल 2025 को 12 घंटे की बहस के बाद 288 वोटों से बिल पास हुआ, जबकि 232 सांसदों ने इसका विरोध किया। इसके बाद 3 अप्रैल को राज्यसभा में भी 128 वोटों के समर्थन से ये बिल कानून बन गया, जिसमें 95 वोट विरोध में पड़े। विपक्ष ने इस बिल का जमकर विरोध किया और इसे मुसलमान समुदाय के विरुद्ध बताया। लेकिन एनडीए के सहयोगी नीतीश कुमार की JDU और चंद्रबाबू नायडू की TDP ने गवर्नमेंट का साथ देकर इसे पास कराने में बड़ी किरदार निभाई।

JDU में बगावत, 5 नेताओं ने छोड़ी पार्टी
वक्फ संशोधन विधेयक पर समर्थन ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में भूचाल ला दिया है। आनें वाले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में इस्तीफों की झड़ी लग गई है। अब तक पांच बड़े मुसलमान नेता जेडीयू से किनारा कर चुके हैं, नीतीश कुमार के समर्थन के बावजूद, पार्टी के कई मुसलमान नेताओं ने इसे मुसलमान हितों के विरुद्ध कहा है। अब तक मोहम्मद कासिम अंसारी, मोहम्मद अशरफ अंसारी, मोहम्मद नवाज मलिक, तबरेज सिद्दीकी और नदीम अख्तर जैसे 5 नेताओं ने त्याग-पत्र दे दिया है। इनका बोलना है कि बिल वक्फ संपत्तियों पर सरकारी कब्जे को बढ़ावा देता है और गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने से समुदाय के वर्चस्व पर खतरा है।
JDU को हानि की आशंका
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में मुसलमान जनसंख्या करीब 18% है और नीतीश हमेशा सेकुलर छवि के साथ मुस्लिम-यादव गठजोड़ पर भरोसा करते रहे हैं। लेकिन वक्फ बिल का समर्थन करने से उनकी ये छवि धूमिल हुई है। ऑल इण्डिया मुसलमान पर्सनल लॉ बोर्ड ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि JDU ने बिल का साथ दिया तो मुसलमान वोटर नाराज होंगे। अब इस्तीफों के बाद पार्टी में अंदरूनी कलह बढ़ गई है यदि ये नाराजगी वोटों में बदली तो 2025 के बिहार चुनाव में JDU को बड़ा हानि हो सकता है।
TDP का जोखिम
आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की TDP भी अपने राज्यों में अभी तक मुसलमान वोटों से लाभ उठाती रही है। राज्य में करीब मुसलमान जनसंख्या करीब 7-8% है। नायडू की छवि राष्ट्र में सेकलुर नेता के तौर पर रही है। वर्ष 2014-19 में TDP गवर्नमेंट ने मदरसों के आधुनिकीकरण, मुसलमान विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप और वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा के लिए योजनाएं चलाई थीं। वैसे तो इस नायडू ने हमेशा मुसलमान समुदाय को भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी वक्फ संपत्तियों की रक्षा करेगी। लेकिन बिल का समर्थन करने से उनकी सेकुलर छवि को ठेस लग सकती है। TDP ने बिल में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या कम करने की शर्त रखी थी, जिसे मान लिया गया था फिर भी बताया जा रहा है कि मुसलमान समुदाय में नायडू के प्रति भरोसा कम हुआ है। आंध्र में मुसलमान वोटरों की संख्या कम है, लेकिन वाईएसआर कांग्रेस पार्टी इसका लाभ उठाकर TDP को निशाना बना सकती है। नायडू की सेकुलर छवि को ठेस लगने से उनकी पार्टी का वोट बैंक प्रभावित हो सकता है। असल में कितना हानि होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
वक्फ संशोधन बिल को पास कराने में नीतीश और नायडू की किरदार सबसे बड़ी
एनडीए के पास लोकसभा में 293 सांसद हैं, जिसमें JDU के 12 और TDP के 16 सांसद शामिल हैं। दोनों पार्टियों ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर बिल के पक्ष में वोट देने को बोला था। नीतीश की JDU ने कुछ संशोधन सुझाए, जैसे पुरानी वक्फ संपत्तियों को छेड़ने से बचना, जिसे गवर्नमेंट ने मान लिया। TDP ने भी गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या कम करने की शर्त रखी, जो स्वीकार हुई। इन शर्तों के बाद दोनों पार्टियों ने खुलकर समर्थन दिया। जिसके बाद राष्ट्र में इन सबके विरुद्ध विरोध तेज होने लगा। लोग इसे मुसलमानों के साथ विश्वासघात बता रहे हैं।

