इस मंदिर में अश्विन और चैत्र नवरात्र के दौरान महिलाओं का प्रवेश रहता है वर्जित
Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि के शुरुआत के साथ ही देशभर में मां दुर्गा की आराधना का पावन पर्व प्रारम्भ हो गया है। हर वर्ष की तरह इस बार भी करोड़ों श्रद्धालु नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मातृभक्ति की उपासना कर रहे हैं। किंतु नालंदा जिले के मशहूर घोसरावा गांव के आशापुरी मंदिर में अश्विन और चैत्र नवरात्र के दौरान स्त्रियों का प्रवेश वर्जित रहता है।

नौ दिनों तक स्त्रियों के लिए प्रतिबंध
मिली जानकारी के अनुसार गिरियक प्रखंड के घोसरावां गांव में स्थित मां आशापुरी मंदिर में नवरात्रि के नौ दिनों तक स्त्रियों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाता है। यहां तक कि स्त्रियों को मंदिर परिसर में भी प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती है। वहीं, पुरुष श्रद्धालु भी इन नौ दिनों तक मंदिर के गर्भगृह में दर्शन नहीं कर सकते।
पूर्वजों से चली आ रही परंपरा
इस मंदिर की यह परंपरा पूर्वजों से चली आ रही है। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष तांत्रिक अनुष्ठान का आयोजन होता है, जिस कारण यह फैसला लिया गया था। नवरात्रि के दौरान मंदिर के गर्भगृह में केवल तीन पुजारियों का ही प्रवेश होता है। सुबह और शाम के समय चार से पांच घंटे तक चंडी पाठ किया जाता है। इसमें विशेष तांत्रिक उपायों का प्रयोग किया जाता है।
तंत्र-मंत्र का है विशेष महत्व
कहा जाता है कि नवरात्रि के दौरान यहां विशेष तंत्र-मंत्र की साधना की जाती है, जिससे नकारात्मक शक्तियां एक्टिव हो जाती हैं। इस दौरान यदि महिलाएं उपस्थित रहेंगी तो उन पर बुरी शक्तियों के असर पड़ने का खतरा रहता है, जिस कारण पूरी पूजा विधि बाधित हो सकती है।
नौवीं सदी से चली आ रही परंपरा
यह परंपरा आज से नहीं बल्कि नौवीं शताब्दी से चली आ रही है। उस समय यह जगह विश्व के प्रमुख बौद्ध साधना केंद्रों में से एक हुआ करता था। यहां आकर बौद्ध भिक्षु तंत्र-मंत्र की गहन साधना करते थे। यहां दूर-दूर से तांत्रिक भी आते थे और नवरात्रि के दौरान यहां विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाता था।
विशेष हवन के बाद एंट्री
बता दें कि नवरात्रि के आखिरी दिन विशेष हवन पूरा होने के बाद स्त्रियों और मर्दों दोनों को ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी जाती है। बोला जाता है कि यह हवन मंदिर की नकारात्मक ऊर्जा को शुद्ध करने के लिए किया जाता है। इस मंदिर का नाम ‘आशापुरी’ इसलिए रखा गया है क्योंकि यहां सच्चे रेट से मांगी गई मनोकामनाएं जरूर पूरी होती हैं। यहां बंगाल, झारखंड, ओडिशा और बिहार समेत कई राज्यों के श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं।

