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क्या आम चुनाव से पहले बजट में करदाताओं को मिल सकती है छूट…

आम चुनाव से पहले वित्त मंत्री सीतारमण लोकसभा में एक फरवरी को 2024-25 का अंतरिम बजट पेश करेंगी यह उनका छठा बजट है बजट में खासकर नौकरीपेशा लोगों की नजर मुख्य रूप से आयकर के मोर्चे पर होने वाली घोषणाओं और राहत पर होती है  अर्थशास्त्रियों की राय इसपर भिन्न-भिन्न है इनमें से कुछ का बोलना है कि गवर्नमेंट आम चुनावों से पहले अगले महीने पेश होने वाले अंतरिम बजट में मानक कटौती की राशि बढ़ाकर इनकम टैक्सपेयर्स को राहत देने के साथ स्त्रियों के लिए अलग से कुछ कर छूट दे सकती है हालांकि, कुछ यह भी मानते हैं कि यह अंतरिम बजट है, ऐसे में आयकर मुद्दे में परिवर्तन की आशा नहीं है

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सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज के चेयरमैन सुदिप्तो मंडल ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, ”अंतरिम बजट में नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग को आयकर के मोर्चे पर कुछ राहत मिल सकती है मानक कटौती की राशि बढ़ाकर कुछ राहत दिए जाने की आशा है लेकिन यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि गरीब और निम्न मध्यम वर्ग आयकर नहीं देता हैअभी मानक कटौती के अनुसार 50,000 रुपये की छूट है

करदाताओं के वोट को आकर्षित करने के लिए मिल सकती है राहत

टैक्सपेयर्स को राहत से जुड़े प्रश्न के उत्तर में लखनऊ स्थित गिरि विकास शोध संस्थान के निदेशक प्रमोद कुमार ने कहा, ”इसके बारे में कुछ बोलना कठिन है यह आर्थिक कारकों के अतिरिक्त कई अन्य चीजों पर भी निर्भर करता है हालांकि, इस तथ्य को देखते हुए कि यह आम चुनाव से पहले अंतरिम बजट पेश किया जा रहा है, करदाताओं के वोट को आकर्षित करने के लिए कुछ रियायतें दी जा सकती हैं

दूसरी ओर,अर्थशास्त्री और वर्तमान में बेंगलुरु के डाक्टर बी आर आंबेडकर विद्यालय ऑफ इकनॉमिक्स यूनिवर्सिटी के कुलपति एन आर भानुमूर्ति ने कहा, ”यह अंतरिम बजट होगा ऐसे में कर प्रबंध में अधिक परिवर्तन की आशा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इसका मकसद पूरे वर्ष का बजट पेश होने तक सिर्फ़ व्यय बजट पर स्वीकृति लेने का होता है वैसे भी कर प्रबंध और संरचना में बार-बार परिवर्तन से अनुपालन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है इसलिए, मुझे आयकर प्रबंध में किसी भी तरह के परिवर्तन की आशा नहीं है

ओल्ड टैक्स रिजीम: वर्तमान में ओल्ड टैक्स रिजीम के अनुसार 2,50,000 रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है वहीं 2,50,001 रुपये से 5,00,000 लाख रुपये तक की आय पर कर की रेट पांच प्रतिशत, 5,00,001 लाख से 10 लाख रुपये तक की आय पर 20 फीसदी और 10,00,001 और उससे अधिक की आय पर कर की रेट 30 फीसदी है

न्यू टैक्स रिजीम: नयी प्रबंध में तीन लाख रुपये तक की आय पर कर की रेट शून्य है 3,00,001 से 6,00,000 रुपये तक की आय पर पांच प्रतिशत, 6,00,001 से 9,00,000 रुपये तक की आय पर 10 प्रतिशत, 9,00,001 रुपये से 12,00,000 रुपये तक की आय पर 15 प्रतिशत, 12,00,001 से 15,00,000 रुपये तक की आय पर 20 फीसदी और 15,00,000 रुपये से अधिक की आय पर कर की रेट 30 फीसदी है

दोनों टैक्स रिजीम में राहत: दोनों कर प्रबंध में कर राहत दी गयी है नयी कर प्रबंध के अनुसार आयकर कानून की धारा 87ए के अनुसार सात लाख रुपये तक की आय वाले आदमी कर छूट के पात्र होंगे वहीं पुरानी प्रबंध के अनुसार कर का भुगतान करने वालों के लिए छूट की सीमा पांच लाख रुपये बनी हुई है

महिलाओं के लिए कुछ अलग से कर छूट की उम्मीद:आर्थिक अध्ययन संस्थान, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी में प्रोफेसर लेखा चक्रवर्ती ने कहा, ”महिला मतदाताओं पर बल को देखते हुए आयकर कानून की धारा 88सी के अनुसार स्त्रियों के लिए कुछ अलग से कर छूट मिल सकती हैउन्होंने यह भी कहा, ”चूंकि इनकम टैक्सदाता भारतीय जनसंख्या का एक छोटा हिस्सा हैं, ऐसे में स्त्रियों और मर्दों के लिए कर राहत से जुड़ी घोषणाओं का कम ही असर पड़ता है

बजट में नयी कर प्रबंध को आसान बनाने के लिए कदम उठाये जाने के बारे में पूछे जाने पर भानुमूर्ति ने कहा, ”कर प्रबंध का सरलीकरण एक सतत प्रक्रिया है अधिक आंकड़े आने और बढ़ती प्रौद्योगिकी और बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ निश्चित रूप से इसपर काम करने की जरूरत है़…

नई कर प्रबंध को और अधिक आसान बनाए जाने की आसार नहीं:  म्यूनिख स्थित इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस (आईआईपीएफ) की संचालन प्रबंधन मंडल की सदस्य की भी किरदार निभा रही लेखा चक्रवर्ती ने कहा, ”कर दक्षता के लिए आसान कर प्रणाली जरूरी है पिछले बजट में गवर्नमेंट ने कुछ कदम उठाये थे, लेकिन वे बहुत साफ नहीं थे और लोग स्पष्टता चाहते हैं” मंडल ने बोला कि इस अंतरिम बजट में और नयी कर प्रबंध को और अधिक आसान बनाए जाने की आसार नहीं है आम चुनाव के बाद नयी गवर्नमेंट के सत्ता में आने पर  पूर्ण बजट में ही ऐसा हो सकता है

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