धीरे-धीरे दोस्ती में बदल रही हैं भारत-चीन की दूरियां, 7 साल बाद बीजिंग पहुंच रहे हैं मोदी
China Xi Jinping Sceret Latter to India: अमेरिका ने हिंदुस्तान पर पर टैरिफ लगाकर दोस्ती को ताख पर रख दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को अपना दोस्त बोलकर हिंदुस्तान पर टैरिफ थोप रहते रहे, जिसने हिंदुस्तान और अमेरिका के रिश्तों के अर्थ बदल दिए। वहीं दूसरी ओर हिंदुस्तान और चीन के रिश्तों की दूरियां भी कम हो रही है। चीन से सीधी फ्लाइटें प्रारम्भ हो रही, चीनी कंपनियां हिंदुस्तान आ रही, बंद चीन ऐप टिकटॉक की हिंदुस्तान में वापसी हो रही।

बीते कुछ महीनों से हिंदुस्तान और चीन के बीच रिश्तों में जन्मी बर्फ गलने लगी है। 7 वर्ष बाद पीएम नरेन्द्र मोदी भी चीन पहुंच रहे हैं। अब प्रश्न है कि आखिर ये अचानक से कैसे हो गया। दरअसल इसके पीछे एक गोपनीय चिट्ठी है। गोपनीय चिट्ठी, जो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हिंदुस्तान के राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को लिखी है। यह चिट्ठी न केवल एक कागज का टुकड़ा है, बल्कि दो राष्ट्रों के बीच नए सिरे से संबंध बुनने की एक प्रयास है।
चीन की गोपनीय चिट्ठी में क्या लिखा ?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट की माने तो मार्च 2025 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हिंदुस्तान के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को चिट्ठी लिखी थी। चिट्ठी के जरिए उन्होंने हिंदुस्तान और चीन के संबंधों को सुधारने की ख़्वाहिश जताई थी। चीनी राष्ट्रपति ने चिट्ठी में यह भी लिखा कि यदि हिंदुस्तान और अमेरिका के बीच कोई समझौता हुआ, तो उससे चीन को हानि हो सकता है। यह चिट्ठी राष्ट्रपति भवन से पीएम नरेन्द्र मोदी के कार्यालय पहुंची। बोला जाता है कि इसी चिट्ठी के बाद हिंदुस्तान और चीन के रिश्तों के अर्थ बदलने लगे।
करीब आ रहे हैं हिंदुस्तान और चीन
इसी तरह की एक चिट्ठी की बात चीनी मीडिया ने भी लिखी थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि चीनी राष्ट्रपति ने हिंदुस्तान के राष्ट्रपति को पत्र भेजा है। चीन की चिट्ठी को लेकर चर्चा होती ही कि उससे पहले अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ का बम फोड़ दिया। ट्रंप ने हिंदुस्तान और चीन दोनों पर टैरिफ लगा दिया। इस टैरिफ ने हिंदुस्तान और चीन दोनों को करीब लाने में अहम किरदार निभाई ।
भारत और चीन के बीच बढ़ी बातचीत
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार हिंदुस्तान ने जिनपिंग के प्रस्ताव पर गंभीरता दिखाई और दोनों राष्ट्रों के बीच रिश्तों से बढ़ाने में पहल प्रारम्भ कर दी। रिश्तों में नरमी का नतीजा है कि दिल्ली और बीजिंग के बीच सीधी उड़ान सेवा प्रारम्भ हो गई। चीन ने भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश-मानसरोवर यात्रा का रास्ता फिर से खोला तो हिंदुस्तान ने भी चीनी पर्यटकों के लिए वीजा सुविधा बहाल कर दी। टैरिफ पर चीन ने हिंदुस्तान का साथ दिया तो हिंदुस्तान ने भी चीन कंपनी टिकटॉक के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं।
चीन पहुंच रहे हैं पीएम मोदी
दोनों राष्ट्रों के बीच सुधरते संबंध का ही नतीजा है कि सात वर्ष बाद पीएम मोदी चीन पहुंच रहे हैं। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को चीन में होने वाले शंघाई कोऑपरेशन आर्गेनाइजेशन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचेंगे। जहां रविवार को उनकी मुलाकात शी जिनपिंग से हो सकती है। चीन और हिंदुस्तान दोनों अपने सीमा टकराव को सुलझाने की ओर आगे बढ़ रहा है। चीन की सेना ने बोला है कि हिंदुस्तान और चीन दोनों को सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। इससे पहले हिंदुस्तान के सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीनी समकक्ष वांग यी ने दिल्ली में मुलाकात की। दोनों राष्ट्रों के बीच धीरे-धीरे रिश्तों में सुधार हो रहा है। शी जिनपिंग की चिट्ठी से दोनों राष्ट्रों के बीच तनाव कम हो रहा है।

