आर्गेनाइज्ड सेक्टर में बढ़ रहे रोजगार के मौके
Finance Ministry Report: Covid-19 के दौरान बढ़ी बेरोजगारी के बाद इसकी रेट में लगातार गिरावट आ रही है। वित्त मंत्रालय के मंथली इकोनॉमिक रिव्यू (monthly economic review) के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था में संगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ी है। बेरोजगारी रेट में गिरावट के साथ-साथ रोजगार को एक औपचारिक स्वरूप देने में भी वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सदस्यों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आधार जैसे डिजिटल पहचान का निर्माण, ई-श्रम पोर्टल पर असंगठित मजदूरों का पंजीकरण और उद्यम पोर्टल पर एमएसएमई के पंजीकरण ने अर्थव्यवस्था के औपचारिकीकरण को बढ़ावा देने में अहम किरदार निभाई है।

1.47 करोड़ नए सदस्यों को शामिल किया गया
22 मई तक, 4.4 करोड़ एमएसएमई को उद्यम पोर्टल पर रजिस्टर्ड किया गया है। इनमें से 97 फीसदी से ज्यादा सूक्ष्म उद्योग हैं। वित्त साल 2024 के दौरान ईपीएफओ में 1.47 करोड़ नए सदस्यों को शामिल किया गया। पिछले वर्ष के मुकाबले इसमें 6.3 फीसदी की वृद्धि हुई है। पिछले साल ईपीएफओ से 1.39 करोड़ नए सदस्य जुड़े थे। वित्त साल 24 में ईपीएफओ में लगभग 1.08 करोड़ नए ग्राहक नामांकित हुए। इनमें से 56.7 फीसदी नए शामिल ग्राहक 18-25 साल के उम्र वर्ग के थे। ईपीएफओ में फिर से शामिल होने वाले सदस्यों की अपेक्षाकृत उच्च संख्या यह दर्शाती है कि श्रम बाजार अपनी सामाजिक सुरक्षा सुरक्षा का विस्तार करने का विकल्प चुन रहा है।
दोबारा शामिल होने वालों की संख्या ज्यादा रही
पिछले कुछ महीनों में ईपीएफओ में दोबारा शामिल होने वाले ग्राहकों की संख्या नए ग्राहकों या मौजूदा ग्राहकों के हटने की तुलना में अधिक रही है। वित्त साल 24 के दौरान, 1.64 करोड़ सदस्य पहले बाहर निकलने के बाद फिर से ईपीएफओ से जुड़ गए। ईपीएफओ के अनुसार, इन सदस्यों ने अपनी नौकरियां बदल लीं और ईपीएफओ के अनुसार आने वाले प्रतिष्ठानों में शामिल हो गए। उन्होंने अपनी बचत को वापस लेने के बजाय इसे नए प्रतिष्ठान में स्थानांतरित करने का विकल्प चुना।
पिछले वर्ष की तुलना में वित्त साल 2024 में मौजूदा ईपीएफओ ग्राहकों के नाम हटाए जाने की संख्या भी कम रही है। रिपोर्ट में बोला गया है कि वित्त साल 2024 के दौरान 1.25 करोड़ ईपीएफओ ग्राहक बाहर हो गए, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 1.34 करोड़ था। इसमें यह भी बोला गया कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में बड़े स्तर पर रोजगार सृजन हुआ है। पीएमआई विनिर्माण रोजगार उप-सूचकांक विनिर्माण क्षेत्र में अधिक रोजगार के अवसरों का संकेत देता है। इसी तरह, पीएमआई सेवा उप-सूचकांक घरेलू मांग में बढ़ोतरी, नए व्यापार फायदा और अंतर्राष्ट्रीय बिक्री में बढ़ोतरी के संयोजन से सेवा क्षेत्र में रोजगार सृजन में वृद्धि दर्शाता है।

