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India Trade: अमेरिका और हिंदुस्तान के बीच ट्रेड डील बीच में ही अटक गई। रूस से ऑयल खरीदने के एवज में अमेरिका ने हिंदुस्तान पर टैरिफ बढ़ा दिया। अमेरिका ने पहले हिंदुस्तान पर 25व प्रतिशत और फिर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का घोषणा किया। अमेरिका किसी भी हालात में अपनी शर्तों पर यह ट्रेड डील करना चाहता है, लेकिन हिंदुस्तान अमेरिका की मनमानी नहीं चलने दे रहा है। अमेरिका टैरिफ के चलते हिंदुस्तान के निर्यात, कई उद्योगों पर असर पड़ सकता है। हिंदुस्तान ने टैरिफ के असर को कम करने का विकल्प तलाशना प्रारम्भ कर दिया है।

टैरिफ का विकल्प
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) पर अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने के लिए हिंदुस्तान अन्य राष्ट्रों को निर्यात बढ़ा सकता है। इसके साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) का भी लाभ उठाकर ब्रिटेन को भी निर्यात बढ़ा सकता है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका द्वारा हाई टैरिफ लगाए जाने से एमएसएमई प्रभावित होंगे, जो हिंदुस्तान के कुल निर्यात का 45 फीसदी हिस्सा है।
भारत पर कितना टैरिफ
वर्तमान में अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर 25 फीसदी टैरिफ लगाता है | साथ ही, उसने 27 अगस्त से 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगाने का घोषणा किया है, जिससे भारतीय उत्पादों पर कुल टैरिफ बढ़कर 50 फीसदी हो जाएगा। रिपोर्ट में बोला गया कि यदि अतिरिक्त टैरिफ लागू किया जाता है, तो इसका कुछ क्षेत्रों पर काफी असर पड़ेगा।
इन सेक्टर्स पर सबसे अधिक असर
क्रिसिल इंटेलिजेंस की एसोसिएट डायरेक्टर एलिजाबेथ मास्टर ने कहा, भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता कपड़ा, रत्न एवं आभूषण, समुद्री भोजन, चमड़ा और फार्मास्यूटिकल्स जैसे निर्यात केंद्रित क्षेत्रों में एमएसएमई के लिए सहायक है। मास्टर ने आगे बोला कि रेडीमेड गारमेंट्स या आरएमजी को छोड़कर, अन्य का हिस्सा यूके के आयात में 3 फीसदी से भी कम है, फिर भी इस समझौते से बांग्लादेश, कंबोडिया और तुर्की के मुकाबले एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा और आरएमजी में चीन और वियतनाम पर बढ़त मिलेगी। कपड़ा, रत्न एवं आभूषण और सीफूड इंडस्ट्री, जिसकी हिंदुस्तान से अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात में 25 फीसदी हिस्सेदारी है, सबसे अधिक प्रभावित होने की आसार है।
हीरा कारोबार पर कितना असर
इन क्षेत्रों में एमएसएमई की हिस्सेदारी 70 फीसदी से अधिक है. रसायन क्षेत्र भी इससे प्रभावित हो सकता है, जहां एमएसएमई की हिस्सेदारी 40 फीसदी है। क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुशन शर्मा के अनुसार, हाई टैरिफ के कारण बढ़ी हुई उत्पाद कीमतों का आंशिक अवशोषण एमएसएमई पर दबाव डालेगा और यह उनके पहले से ही कम मार्जिन को और कम करेगा, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया कि रत्न एवं आभूषण क्षेत्र में सूरत के एमएसएमई टैरिफ का झटका महसूस करेंगे, जिनकी हीरा निर्यात में 80 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है।
इस सेक्टर पर टैरिफ का असर कम
ऑटो कंपोनेंट्स इंडस्ट्री पर टैरिफ का असर थोड़ कम होगा, क्योंकि अमेरिका की हिंदुस्तान के कुल उत्पादन में सिर्फ़ 3.5 फीसदी ही हिस्सेदारी है। रिपोर्ट में बोला गया कि हालांकि, कुछ क्षेत्र अभी तक अछूते हैं। उदाहरण के लिए, दवा उत्पाद, जिनकी अमेरिका को निर्यात में 12 फीसदी हिस्सेदारी है, वर्तमान में टैरिफ से मुक्त हैं। रिपोर्ट में यह भी बोला गया है कि स्टील के मुद्दे में अमेरिकी टैरिफ का एमएसएमई पर नगण्य असर पड़ने की आशा है क्योंकि ये मुख्य रूप से री-रोलिंग और लंबे उत्पादों के उत्पादन में लगे हुए हैं, जबकि अमेरिका मुख्य रूप से हिंदुस्तान से फ्लैट उत्पादों का आयात करता है। हिंदुस्तान के स्टील निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी सिर्फ़ 1 फीसदी है। आईएएनएस

