बिज़नेस

चीन पर निर्भरता घटाने की एपल की योजना में भारत का है महत्वपूर्ण योगदान

अमेरिकी डिवाइसेज मेकर Apple का राष्ट्र से iPhones का एक्सपोर्ट मौजूदा वित्त साल की पहली छमाही में लगभग एक-तिहाई बढ़ा है. इससे कंपनी की चीन पर निर्भरता घटाने और हिंदुस्तान में मैन्युफैक्चरिंग के एक्सपैंशन की योजना आगे बढ़ने का संकेत मिल रहा है. एपल का ‘मेड इन इंडिया’ आईफोन्स का एक्सपोर्ट पहली छमाही में पिछले वित्त साल की समान अवधि की तुलना में लगभग एक-तिहाई बढ़कर लगभग छह अरब $ (लगभग 50,451 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया.

Untitled 1108

WhatsApp Group Join Now

Bloomberg की रिपोर्ट में कंपनी के बारे में जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि मौजूदा वित्त साल में राष्ट्र से एपल का आईफोन्स का एक्सपोर्ट 10 अरब $ से अधिक हो सकता है. कंपनी ने राष्ट्र में अपने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चर्स के जरिए मैन्युफैक्चरिंग को तेजी से बढ़ाने की तैयारी की है. चीन पर निर्भरता घटाने की एपल की योजना में हिंदुस्तान का जरूरी सहयोग होगा. कंपनी के तीन कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चर्स दक्षिण हिंदुस्तान में अपनी फैक्टरियों में आईफोन की असेंबलिंग करते हैं. इनमें ताइवान की Foxconn Technology और Pegatron के अतिरिक्त Tata Electronics हैं.

फॉक्सकॉन की फैक्टरी तमिलनाडु में चेन्नई के निकट है. राष्ट्र से आईफोन के एक्सपोर्ट में इसकी हिस्सेदारी लगभग आधी है. ऑटोमोबाइल से लेकर सॉफ्टवेयर तक के बिजनेस से जुड़े Tata Group की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट Tata Electronics ने पहली छमाही में लगभग 1.7 अरब $ के आईफोन्स का एक्सपोर्ट किया है. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की फैक्टरी कर्नाटक में है. पिछले साल टाटा ग्रुप ने Wistron से इस फैक्टरी को खरीदा था.

एपल की की राष्ट्र में अपने रिटेल स्टोर्स बढ़ाने की भी योजना है. कंपनी के पिछले साल दिल्ली के साकेत में सेलेक्ट सिटीवॉक और मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में खोले गए स्टोर्स को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. एपल की दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरू, मुंबई और पुणे में नए स्टोर्स प्रारम्भ करने की तैयारी है. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एपल ने राष्ट्र में अपनी वेबसाइट पर कई जॉब्स को लिस्ट किया है. इनमें फुल-टाइम और पार्ट-टाइम जॉब्स शामिल हैं. कंपनी के लगभग 400 एंप्लॉयीज को हायर करने का अनुमान है. राष्ट्र में एपल के स्टोर्स का बिक्री के पहले साल में रेवेन्यू लगभग 800 करोड़ रुपये का रहा है. इसमें दिल्ली में साकेत के स्टोर की हिस्सेदारी 60 फीसदी की है.

Back to top button