अगले साल इस स्पीड से आगे बढ़ेगी इंडियन इकोनॉमी, सामने आए ये आँकड़ें
RBI MPC Meeting: आरबीआई (RBI) ने अगले वित्त साल 2025-26 में जीडीपी (GDP) की ग्रोथ दर 6.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया। 31 मार्च, 2025 को खत्म हो रहे वित्त साल 2024-25 के लिए यह 6.4 फीसदी से ज्यादा अनुमानित है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौजूदा वित्त साल की अंतिम और अपनी पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति (MPC) की घोषणा करते हुए बोला कि रबी फसल की अच्छी संभावनाओं और औद्योगिक गतिविधियों में अपेक्षित सुधार से 2025-26 में आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिलेगा। उन्होंने बोला कि मांग पक्ष के प्रमुख चालकों में केंद्रीय बजट 2025-26 में टैक्स राहत से घरेलू खपत मजबूत रहने की आशा है।

मिडिल क्लास के लिये सबसे बड़ी इनकम टैक्स छूट की घोषणा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक महामारी के बाद इकोनॉमी के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद बजट 2025-26 में उपभोग को बढ़ावा देने के लिए मिडिल क्लास को अबतक की सबसे बड़ी इनकम टैक्स छूट प्रदान करने की घोषणा की। वित्त साल 2024-25 की जुलाई-सितंबर अवधि में राष्ट्र की जीडीपी की वृद्धि रेट सात तिमाहियों के निचले स्तर 5.4 फीसदी पर आ गई थी, जबकि आरबीआई ने स्वयं 7 फीसदी का संभावना व्यक्त किया था। आरबीआई गवर्नर ने बोला कि उच्च क्षमता इस्तेमाल स्तर, वित्तीय संस्थानों और कंपनियों के बेहतर बही-खाते और गवर्नमेंट द्वारा पूंजीगत व्यय पर लगातार बल दिए जाने से स्थिर निवेश में सुधार की आशा है।
जीडीपी ग्रोथ 6.7 फीसदी रहने का अनुमान
उन्होंने कहा, ‘इन सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2025-26 के लिए असल जीडीपी ग्रोथ 6.7 फीसदी रहने का अनुमान है। इकोनॉमी के अगले वित्त साल की पहली तिमाही में 6.7 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 7.0 फीसदी और तीसरी और चौथी तिमाही में 6.5 फीसदी की रेट से बढ़ने की आसार है। रिस्क दोनों ओर समान रहेगा।’ संसद में पिछले हफ्ते पेश आर्थिक समीक्षा में संभावना व्यक्त किया गया था कि मजबूत वृहद आर्थिक बुनियादी बातों के आधार पर हिंदुस्तान की इकोनॉमी 2025-26 में 6.3-6.8 फीसदी की रेट से बढ़ेगी।
हालांकि ग्लोबल चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक और विवेकपूर्ण नीति प्रबंधन की आवश्यकता होगी। चालू वित्त साल में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि रेट चार वर्ष के निचले स्तर 6.4 फीसदी पर आने का अनुमान है, जो दशकीय औसत के करीब है। इस बार की एमपीसी में आरबीआई की तरफ से रेपो दर को 6.5 प्रतिशत से घटाकर 6.25 प्रतिशत पर कर दिया गया है। रेपो दर कम होने से लोगों को ईएमआई में भी राहत मिलेगी।

