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इंफोसिस के संस्थापक ने भारत में जारी वर्क कल्चर को लेकर दिया बड़ा बयान,कहा…

भारत में इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने हिंदुस्तान में जारी वर्क कल्चर को लेकर बड़ा बयान दिया है भारतीय इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने युवाओं को खास राय दी है उन्होंने बोला कि यदि हिंदुस्तान को बीते दो-तीन दशकों में जबरदस्त प्रगति करने वाली अर्थव्यवस्थाओं के साथ प्रतिस्पर्धा करनी है तो राष्ट्र में वर्क कल्चर में बड़ा परिवर्तन लाना होगा

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इंफोसिस के संस्थापक ने बोला कि है कि युवाओं को हफ्ते में 70 घंटे तक काम करना चाहिए एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने ये बयान दिया है उन्होंने इस दौरान देश निर्माण, प्रौद्योगिकी, उनकी कंपनी इंफोसिस और कई अन्य विषयों पर बात की है मूर्ति ने इस दौरान आज के युवाओं पर उनकी राय भी दी है

इंफोसिस के पूर्व सीएफओ मोहनदास पई के साथ वार्ता में नारायण मूर्ति ने बोला कि हिंदुस्तान की कार्य उत्पादकता दुनिया में सबसे कम है चीन जैसे राष्ट्रों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए हिंदुस्तान के युवाओं को अतिरिक्त घंटे काम करना होगा उन्होंने जापान और जर्मनी जैसे राष्ट्रों का उदाहरण देते हुए बोला कि जैसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इन राष्ट्रों ने किया था उन्होंने गवर्नमेंट में करप्शन और नौकरशाही की देरी जैसे अन्य मुद्दों को भी उत्तरदायी ठहराया है उन्होंने बोला कि ये दुखद है कि हिंदुस्तान की कार्य उत्पादकता दुनिया में सबसे कम में शुमार है

नारायण मूर्ति ने बोला कि जब तक हम अपनी कार्य उत्पादकता में सुधार नहीं करते और जब तक हम गवर्नमेंट में किसी स्तर पर करप्शन को कम नहीं करते तबतक स्थिति वैसी ही रहेगी उन्होंने बोला कि हम पढ़ते रहे हैं इस फैसला को लेने में अपनी नौकरशाही की देरी को कम करना महत्वपूर्ण है तभी आगे बढ़ना संभव होगा उन्होंने बोला कि उन राष्ट्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होने के लिए ये परिवर्तन जरुरी हैं जिन्होंने जबरदस्त प्रगति की है

वहीं 77 वर्षीय मूर्ति ने आज के युवाओं से अपील की है उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए बोला कि युवाओं को बोलना चाहिए कि ‘यह मेरा राष्ट्र है मैं हफ्ते में 70 घंटे काम करना चाहूँगा “आप जानते हैं, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी और जापानियों ने ठीक यही किया था… उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक जर्मन एक निश्चित संख्या में सालों तक अतिरिक्त घंटे काम करे

इंफोसिस के अरबपति संस्थापक ने बोला कि युवा हिंदुस्तान की बहुसंख्यक है इन युवाओं को हिंदुस्तान की प्रगति की और राष्ट्र के विकास जिम्मेदारी उठानी चाहिए उन्होंने कहा, हिंदुस्तान में संस्कृति को अनुशासन, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प में बदलना होगा हमें अनुशासित रहने और अपनी कार्य उत्पादकता में सुधार करने की जरूरत है मुझे लगता है कि जब तक हम ऐसा नहीं करेंगे तबतक केवल गवर्नमेंट काम नहीं कर सकती उन्होंने बोला कि हमारी संस्कृति को अत्यधिक दृढ़, अत्यंत अनुशासित और अत्यंत परिश्रमी लोगों की संस्कृति में बदलना होगा युवाओं से अपील करते हुए उन्होंने बोला कि ये बदलाव युवाओं में होना चाहिए इस समय युवा ही हमारी जनसंख्या का बड़ा हिस्सा हैं, जो राष्ट्र का निर्माण करने में अहम किरदार अदा कर सकते है

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