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जानें, क्या दर्शाती है GDP पर NSO की रिपोर्ट…

GDP news in hindi : देश की आर्थिक वृद्धि पर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO)की रिपोर्ट से आर्थिक जगत में हड़कंप मच गया. इसमें दावा किया गया है कि चालू वित्त साल में जीडीपी घर घटकर 4 वर्ष के निचले स्तर पर आ सकती है. जीडीपी रेट में गिरावट मंदी के संकेत देती है. आज शेयर बाजार में गिरावट दिखाई दी तो रुपया भी ऑल टाइम लो पर पहुंच गया. इससे पहले 2023-24 में राष्ट्र की जीडीपी रेट 8.2 थी.

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क्या कहती है NSO की रिपोर्ट : राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने अपनी रिपोर्ट में बोला कि विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्रों के खराब प्रदर्शन से राष्ट्र की आर्थिक वृद्धि रेट चालू वित्त साल 2024-25 में घटकर 4 वर्ष के निचले स्तर 6.4 फीसदी पर आ सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्र का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वित्त साल 2024-25 में 6.4 फीसदी की रेट से बढ़ेगा, जबकि पिछले वित्त साल में इसकी वृद्धि रेट 8.2 फीसदी थी. यदि ऐसा होता है तो राष्ट्र की अर्थव्यवस्था वित्त साल 2020-21 के बाद सबसे धीमी गति से बढ़ेगी. कोविड महामारी से बुरी तरह प्रभावित वित्त साल 2020-21 में अर्थव्यवस्था में 5.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी.

रिपोर्ट में माइनिंग, मैन्यूफैक्चरिंग, फाइनेंशियल सेक्टर, कंस्ट्रक्शन समेत 6 क्षेत्रों में 2023-24 के मुकाबले गिरावट दर्ज की गई है. सिर्फ़ कृषि और पब्लिक एडमिस्ट्रेशन में बढ़त दिखाई दे रही है.

क्या है गिरावट की वजह : कहा जा रहा है कि महंगाई, ऊंची ब्याज रेट और ट्रेड वार के दबाव की वजह से आर्थिक जीडीपी रेट गिर रही है. अच्छे मानसून के बाद भी इस साल कई वस्तुओं के मूल्य कम नहीं हुए. इस वजह से आरबीआई ने भी ब्याज रेट नहीं घटाई. बढ़ती महंगाई की वजह से शहरी कंज़्यूमरों की क्रय शक्ति पर नकारात्मक असर पड़ा.

क्या होगा बाजार पर असर : फाइनेंशियल एक्सपर्ट योगेश बागौरा ने बोला कि विकास रेट घटने की वजह से बाजार पर इसका नेगेटिव असर आएगा. लोगों का खर्च बढ़ने से निवेश और बचत के लिए पास पैसा कम बचेगा. इससे बाजार में उत्पादों की बिक्री घटेगी. इससे लोग निवेश कम करेंगे. शेयर बाजार, एसआईपी में निवेश कम होगा. पूरी साइकल इससे प्रभावित होगी. रोजगार पर भी इसका नकारात्मक असर हो सकता है.

उन्होंने बोला कि दूसरी तरफ अमेरिका के नव निर्वाचित राष्‍ट्रपति ट्रंप पहले ही ट्रैरिफ बढ़ाने का घोषणा कर चुके हैं. इसका भी नेगेटिव असर होगा. कुल मिलाकर इस वित्त साल में हिंदुस्तान की जीडीपी वृद्धि 6.4 प्रतिशत रहती है तो भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ ही आम आदमी पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा. आने वाले समय में ब्याज रेट में कटौती भी दिखाई दे सकती है.

बजट से पहले स्थिति निराशाजनक : कांग्रेस ने राष्ट्र में आर्थिक वृद्धि में गिरावट का दावा करते हुए बुधवार को बोला कि अगले महीने पेश होने वाले बजट से पहले स्थिति निराशजनक है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी बोला कि गरीबों के लिए आय सहायता, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अनुसार अधिक मजदूरी और बढ़ा हुआ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) समय की मांग है.

रमेश ने एक बयान में बोला कि केंद्र गवर्नमेंट द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार वित्त साल 2025 में केवल 6.4 फीसदी जीडीपी वृद्धि का अनुमान है. यह चार वर्ष का सबसे निचला स्तर है, और वित्त साल 2024 में दर्ज 8.2 फीसदी की वृद्धि की तुलना में साफ गिरावट है. यह रिजर्व बैंक के हालिया 6.6 फीसदी की वृद्धि के उस अनुमान से भी कम है, जो ख़ुद ही पहले के 7.2 फीसदी के अनुमान से कम है.

उन्होंने दावा किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था निचले स्तर पर आ गई है और विकास में अत्यंत जरूरी किरदार निभाने वाला विनिर्माण क्षेत्र उस तरह से नहीं बढ़ रहा है जिस तरह से बढ़ना चाहिए

मायावती ने भी जताई चिंता : बसपा प्रमुख मायावती ने भी रिपोर्ट पर चिंता जताते हुए बोला कि चार सालों में सबसे कम 6.4 फीसदी रह सकती है विकास दर. राष्ट्र के अधिकांश अखबारों में यह आज प्रमुख समाचार है, जिसको लेकर यदि कोई वास्तव में दुखी है तो वह राष्ट्र के गरीब एवं मेहनतकश समाज के लोग. वे अपनी बदहाल जिन्दगी जीने के बावजूद राष्ट्र के बारे में कुछ भी अहित सुनने को तैयार नहीं

उन्होंने बोला कि विश्व बाजार में रुपए के लगातार घटते रेट से भले ही गरीबों का सीधा संंबंध ना हो, फिर भी उससे वह खुश नहीं. गवर्नमेंट को चाहिए कि उन करोड़ों लोगों की भावनाओं की कद्र करते हुए उनके ‘अच्छे दिन’ हेतु 24 घंटे की संकीर्ण राजनीति को त्यागकर जन और देशहित की चिंंताओं पर ध्यान केन्द्रित करे.

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