किसी ने नहीं दिया सहारा, जानें कैसे ध्वस्त हुई 4.30 लाख करोड़ की कंपनी एवरग्रांडे…
7 वर्ष पहले तक चीन के रियल एस्टेट बाजार पर राज करने वाली प्रॉपर्टी डेवलपर कंपनी एवरग्रांडे पर ऋण का बोझ इस कदर चढ़ा कि यह पूरी तरह बर्बाद होकर शेयर बाजार से भी बाहर हो चुकी है। एवरग्रांडे को हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज से हटा दिया गया है, क्योंकि उसके शेयरों में महज सालभर के भीतर ही 99 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। आखिर 4.30 लाख करोड़ रुपये की कंपनी कैसे महज 7 वर्ष के भीतर बर्बाद हो गई और आलम ये हो गया कि अब उसे शेयर बाजार से भी बाहर कर दिया गया है।

हांगकांग शेयर बाजार में एयरग्रांडे की ट्रेडिंग को पिछले 18 महीने से फ्रीज रखा गया था। इस दौरान कंपनी के शेयरों में 99 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट देखी गई और अब आखिरकार इसे एक्सचेंज से डीलिस्ट कर दिया गया है। वर्ष 2017 में इस कंपनी का बाजार वैल्यू 51 अरब $ यानी करीब 4.30 लाख करोड़ रुपये था, जिसे अब लिक्वीडेशन यानी बिक्री पेशकश के लिए डाल दिया गया है। जनवरी 2024 में इसके ट्रेड को फ्रीज किए जाते समय इसकी मूल्य 26 करोड़ $ यानी करीब 2,200 करोड़ रुपये के आसपास थी। एवरग्रांडे ने वर्ष 2017 में अपने टॉप वैल्यूएशन से 99% से अधिक बाजार मूल्य खो दिया है।
क्या है बर्बादी का कारण
चीन के एवरग्रांडे ग्रुप (China Evergrande Group) को वर्ष 2009 में हांगकांग शेयर बाजार में लिस्ट कराया गया था। कंपनी के ऊपर 335 अरब $ (करीब 29 लाख करोड़ रुपये) का ऋण था, जो कंपनी के बाजार वैल्यू से 7 गुना ज्यादा था। जब कंपनी अपने 300 अरब $ के ऋण को चुकाने में असफल रही तो जनवरी, 2024 में हांगकांग की न्यायालय ने इसे बेचने का आदेश दे दिया। कंपनी पर लदा ऋण चीन की तात्कालिक जीडीपी का करीब 1.8 प्रतिशत था। इसके ढहने से चीन के रियल एस्टेट बाजार में भूकंप आ गया और कई कंपनियां अंधाधुन्ध अपना कारोबार समेटने लगीं।
कमाई से कई गुना ज्यादा ऋण बना कारण
एवरग्रांडे को एक समय चीन की दूसरी सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी माना जाता था, जिसके देशभर में करीब 2 हजार प्रोजेक्ट चल रहे थे। यही वजह थी कि तब कंपनी में चीन सहित कई राष्ट्रों के निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया और उसका ऋण कंपनी की सालाना कमाई के मुकाबले कई गुना ज्यादा पहुंच गया। आलम ये था कि एवरग्रांडे का ऋण उसके राजस्व के मुकाबले 10 गुना से भी अधिक पहुंच गया। अपनी इसी नीति की वजह से यह दुनिया की सबसे बड़ी कर्जदार कंपनी बन गई। कंपनी ने जोखिम भरे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स और इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया और लगातार हानि झेलती चली गई।
गलत अकाउंटिंग से बुना जाल
कंपनी की बर्बाद में उसकी नीतियों का ही हाथ रहा, इसने गलत अकाउंटिंग के जरिये अपने राजस्व को 78 अरब $ का दिखाया था, जिसके लिए 65 लाख $ का जुर्माना भी लगाया गया और कंपनी के फाउंडर हूई का यान को चीन के कैपिटल बाजार से लाइफटाइम बैन कर दिया गया। कंपनी की बेइमानियों से परेशान चीन गवर्नमेंट ने वर्ष 2020 में ‘थ्री रेड लाइंस’ पॉलिसी लागू की, जो डेवलपर्स के कर्ज-टू-कैश, कर्ज-टू-एसेट्स और कर्ज-टू-इक्विटी रेशियो को सीमित करती थी। इस नीति से कंपनी को नया फंड मिलना बंद हो गया और कर्जा चुकाना नामुमकिन बन गया।
कर्ज लेकर खूब प्रोजेक्ट बनाए
एवरग्रांडे की बर्बादी की एक वजह इसका अंधाधुन्ध निर्माण करना भी रहा। कंपनी ने वर्ष 2003 से 2014 तक चीन में जमकर प्रॉपर्टी बनाई, जिसके लिए खूब कर्जा लिया। हुआ ये कि डिमांड कम और सप्लाई ज्यादा होने से बिक्री भी कम हो गई। कंपनी को अपनी प्रॉपर्टीज को डिस्काउंट पर बेचना पड़ा, लेकिन फिर भी सप्लायर्स को पेमेंट और प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर सकी। इसी दौरान आई COVID-19 महामारी ने कंस्ट्रक्शन और सेल्स को प्रभावित किया, जिससे कंपनी गहरे तक हानि में धंस गई और आखिरकार अपनी इन कमजोरियों की वजह से ही यह डूब गई। वित्तवर्ष 2021-2022 में कंपनी को 81 अरब $ का नेट लॉस हुआ।

