GDP ग्रोथ के आंकड़ों पर उठे सवाल, पूर्व RBI गवर्नर बोले…
देश की इकोनॉमी के ग्रोथ दर पर रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने प्रश्न खड़े किए हैं. उन्होंने बोला कि हिंदुस्तान जीडीपी ग्रोथ के बारे में हाइप (प्रचार या बढ़ा-चढ़ाकर बताना) पर विश्वास करके बड़ी गलती कर रहा है. रघुराम राजन के अनुसार राष्ट्र में अहम स्ट्रक्चरल समस्याएं हैं जिन्हें ठीक करने की आवश्यकता है. चुनाव के बाद नयी गवर्नमेंट के सामने सबसे बड़ी चुनौती वर्कफोर्स की शिक्षा और स्किल में सुधार है.

नेता चाहते हैं कि विश्वास करें
रघुराम राजन ने कहा- यह साबित करने के लिए कि ग्रोथ असली है, हमें कई और सालों तक कड़ी मेहनत करनी होगी. यह एक ऐसी चीज है जिस पर राजनेता चाहते हैं कि आप विश्वास करें. वे चाहते हैं कि आप विश्वास करें कि हम पहुंच चुके हैं लेकिन यह हिंदुस्तान के लिए एक गंभीर गलती होगी.
रघुराम राजन ने क्यों कही ये बात
दरअसल, दिसंबर तिमाही में हिंदुस्तान की विकास रेट यानी जीडीपी ग्रोथ ने सारे अनुमानों को ध्वस्त कर दिया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस तिमाही के दौरान जीडीपी ग्रोथ की रेट 8.4 फीसदी रही. वहीं, राष्ट्र की इकोनॉमी के फ्यूचर को लेकर भी पीएम मोदी की गवर्नमेंट आश्वस्त है. प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई मौकों पर बोला है कि हिंदुस्तान अगले कुछ सालों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. वहीं, वर्ष 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था बन जाने का भी अनुमान है.
विकसित हिंदुस्तान पर क्या बोले
हालाकि, रघुराम राजन ने प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित अर्थव्यवस्था वाले लक्ष्य को खारिज कर दिया और बोला कि इस बारे में बात करना बकवास है. राजन ने बोला कि हमारे राष्ट्र में कई बच्चों के पास हाई विद्यालय की शिक्षा नहीं है. वहीं विद्यालय छोड़ने की रेट भी अधिक है.
पूर्व केंद्रीय बैंक गवर्नर ने बोला कि हिंदुस्तान में वर्कफोर्स बढ़ रहा है, लेकिन यह तभी डिविडेंड की तरह है जब वे अच्छी नौकरियों में कार्यरत हों. मेरे विचार से यह संभावित त्रासदी है जिसका हम सामना कर रहे हैं. हिंदुस्तान को वर्कफोर्स को अधिक रोजगारपरक बनाने और अपने पास उपस्थित कार्यबल के लिए रोजगार सृजित करने की आवश्यकता है. हिंदुस्तान को सतत आधार पर 8 प्रतिशत की विकास रेट हासिल करने के लिए काफी काम करने की आवश्यकता है.

