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जुलाई में इन आंकड़ों को मापेगी रिटेल महंगाई, जानें जून का रिकॉर्ड

भारत की रिटेल महंगाई जुलाई में 2% से कम रहने की आशा है. आज यानी 12 अगस्त को जुलाई महीने के रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी होंगे. एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसमें खाने-पीने के सामान की कीमतों में लगातार नरमी के कारण इसमें गिरावट देखने को मिल सकती है.

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वहीं जून महीने के रिटेल महंगाई घटकर 2.10% पर आ गई थी. ये 77 महीने का निचला स्तर है. इससे पहले जनवरी 2019 में ये 2.05% रही थी. वहीं मई 2025 में ये 2.82% और अप्रैल 2025 में रिटेल महंगाई 3.16% पर थी. रिटेल महंगाई फरवरी से RBI के लक्ष्य 4% से नीचे है.

RBI ने महंगाई का अनुमान घटाया इससे पहले 4 से 6 अगस्त तक हुई RBI मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग में भी वित्त साल 2025-26 के लिए महंगाई का अनुमान 3.7% से घटाकर 3.1% कर दिया है. RBI ने अप्रैल-जून तिमाही के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को 3.4% से घटाकर 2.1% कर दिया.

महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है? महंगाई का बढ़ना और घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है. यदि लोगों के पास पैसे अधिक होंगे तो वे अधिक चीजें खरीदेंगे. अधिक चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड के अनुसार सप्लाई नहीं होने पर इन चीजों की मूल्य बढ़ेगी.

इस तरह बाजार महंगाई की चपेट में आ जाता है. सीधे शब्दों में कहें तो बाजार में पैसों का अत्यधिक बहाव या चीजों की शॉर्टेज महंगाई का कारण बनता है. वहीं यदि डिमांड कम होगी और सप्लाई अधिक तो महंगाई कम होगी.

CPI से तय होती है महंगाई एक ग्राहक के तौर पर आप और हम रिटेल बाजार से सामान खरीदते हैं. इससे जुड़ी कीमतों में हुए परिवर्तन को दिखाने का काम कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI करता है. हम सामान और सर्विसेज के लिए जो औसत मूल्य चुकाते हैं, CPI उसी को मापता है.

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