ट्रंप ने अमेरिका के लिए गलत ही किया टैरिफ का वार, इकोनॉमी को नहीं मिला फायदा
Trump Tariff Side Effect: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की आमदनी बढ़ाने, अमेरिकी फर्स्ट की नीतियों का हवाला देकर पूरे विश्व के राष्ट्रों पर टैरिफ लगाने वाले ट्रंप की चाल उल्टी पड़ गई है। ट्रंप ने टैरिफ उन राष्ट्रों पर लगाया, जो अमेरिका को सामान बेचने है, लेकिन इस टैरिफ के दंश ने अमेरिका को ही डस लिया है। अमेरिका की जनता महंगाई की मार झेल रही है। टैरिफ उनपर ही टैक्स बनकर टूट पड़ा है। टैरिफ लगाने से अमेरिकी जनता को महंगे सामान खरीदने के लिए विवश होना पड़ रहा है, उनकी सेविंग घटती जा रही है। महंगाई की मार झेल रही अमेरिकी जनता अब ट्रंप को कोसने लगी है। आईएमएफ की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने बुधवार को बोला कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ प्रस्तावों ने अमेरिकी कंज़्यूमरों पर टैक्स की तरह काम किया, महंगाई बढ़ी और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कोई फायदा नहीं हुआ।

टैरिफ का नहीं मिला फायदा
ट्रंप के लिबरेशन डे टैरिफ की आलोचना करते हुए गोपीनाथ ने बोला कि पिछले छह महीनों से स्कोरकार्ड नेगेटिव रहा है। ट्रंप ने 2 अप्रैल को लिबरेशन डे घोषित किया, यह वह दिन था जब उन्होंने टैरिफ बढ़ाने को लेकर घोषणा की थी। उन्होंने अमेरिकी व्यापार घाटे को लेकर नेशनल आपातकालीन की घोषणा की और विदेशी आयातों पर व्यापक टैरिफ लगाने के लिए इंटरनेशनल आपातकालीन इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (आईईईपीए) लागू किया।
टैरिफ का मकसद पूरा करने में विफल रहे ट्रंप
उनका उद्देश्य दशकों से चली आ रही अनुचित व्यापार बाधाओं को दूर करना था, जिससे अमेरिकी उत्पादकों को हानि हुआ था। हालांकि, गोपीनाथ ने बोला कि जैसा कि ट्रंप ने दावा किया था पिछले छह महीनों में टैरिफ से न तो व्यापार संतुलन में सुधार हुआ और न ही अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिला। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कोई फायदा नहीं हुआ। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में गोपीनाथ ने कहा, लिबरेशन डे टैरिफ लागू हुए 6 महीने हो गए हैं. अमेरिकी टैरिफ से क्या हासिल हुआ है।
बस गवर्नमेंट का फायदा
उन्होंने बोला कि इससे गवर्नमेंट के राजस्व में वृद्धि हुई है। अमेरिकी कंपनियों द्वारा वहन किया गया और कुछ अमेरिकी कंज़्यूमरों को पास कर दिया गया। इस तरह ट्रंप के इस निर्णय ने यूएस फर्म और कंज़्यूमरों पर टैक्स की तरह काम किया। उन्होंने बोला कि कुल मिलाकर थोड़ी मात्रा में घरेलू उपकरणों, फर्नीचर, कॉफी के लिए महंगाई बढ़ी है,
अमेरिका को कितना फायदा
गोपीनाथ ने बोला कि टैरिफ से व्यापार संतुलन हुआ है, अभी तक इसका कोई संकेत नहीं है। मैन्युफैक्चरिंग में सुधार हुआ, इसके भी संकेत नहीं मिले हैं। कुल मिलाकर, स्कोर कार्ड अभी नकारात्मक बना हुआ है। हिंदुस्तान पर पहले 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया था, उसके बाद अगस्त में रूसी कच्चे ऑयल की खरीद पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया था। 26 सितंबर को ट्रंप ने 1 अक्टूबर से ब्रांडेड और पेटेंटेड फार्मा प्रोडक्ट पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की योजना की घोषणा की।

