सरकार को वित्त वर्ष के मामले में क्यों मिला यह सुझाव…
रेटिंग एजेंसी ICRA ने बुधवार को बोला कि गवर्नमेंट को अगले वित्तीय साल के बजट में 11 लाख करोड़ रुपये की पूंजीगत खर्च का लक्ष्य रखना चाहिए और पर्सनल इनकम टैक्स पर महंगाई-समायोजित राहत देकर उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा देना चाहिए। ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने बोला कि पिछले वर्ष के रिकॉर्ड बजट में 11.11 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय निर्धारित किया गया था, जो लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये कम रहने की आसार है। अगले वर्ष का लक्ष्य पिछले वर्ष के स्तर पर ही रखा जाना चाहिए, जिसमें उधारी को उचित सीमाओं के भीतर रखने पर ध्यान केंद्रित किया जाए।

नायर ने बोला कि चालू वित्त साल में बजट लक्ष्य तक पहुंचने के लिए पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के आंकड़े अपेक्षित रेट से पीछे चल रहे हैं। अप्रैल से नवंबर 2024 के बीच, कैपेक्स खर्च 5.13 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 11.11 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान का महज 46 फीसदी है। जाहिर है कि गवर्नमेंट अपने खर्च के लक्ष्य से काफी पीछे रह जाएगी। नायर ने बोला कि हम चालू वित्त साल में बड़े अंतराल की ओर देख रहे हैं। FY26 के लिए राजस्व आंकड़ों के आधार पर जीडीपी का 4.5 फीसदी का राजकोषीय घाटा काफी उचित रूप से प्राप्त किया जा सकेगा। इससे हमें 11 ट्रिलियन रुपये का कैपेक्स मिलेगा, जो FY25 के लिए संभव माने जा रहे आंकड़े पर 11-12 फीसदी की वृद्धि होगी।
ज्यादा पूंजीगत खर्च रखना समझदारी नहीं
अदिति नायर ने बोला कि एक बड़ा पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) संख्या रखना समझदारी नहीं होगी, क्योंकि इससे अधिक उधारी और राजकोषीय घाटा बढ़ेगा। वित्तवर्ष 2025-26 के बजट में एक असली कैपेक्स संख्या पहले से ही निर्धारित की जानी चाहिए और यदि वर्ष के दौरान ऐसा लगता है कि इसे अधिक प्राप्त किया जा सकता है, तो गवर्नमेंट आर्थिक सहायता की पूरक मांगों के माध्यम से लक्ष्य को बढ़ा सकती है। कोविड के असर से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए गवर्नमेंट ने बुनियादी ढांचे और पूंजीगत संपत्तियों पर भारी खर्च किया है।
कोरोनाकाल के बाद बढ़ता गया कैपेक्स
इक्रा ने कहा कि गवर्नमेंट कोरोनाकाल के बाद लगातार कैपेक्स बढ़ाती जा रही है। वित्तवर्ष 2020-21 में 4.39 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स निर्धारित किया गया था, जो 2021-22 में बढ़कर 5.54 लाख करोड़ रुपये हो गया। 2022-23 में कैपेक्स खर्च को बढ़ाकर 7.5 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया और 2023-24 में यह 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। गवर्नमेंट ने चालू वित्तवर्ष के लिए कैपेक्स को 11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया है, लेकिन इस बार 8 महीने में केवल 46 प्रतिशत ही खर्चा किया जा सका। लिहाजा अगले वित्तवर्ष में गवर्नमेंट को कैपेक्स बढ़ाने के बजाय ठोस रणनीतियों पर काम करना चाहिए।
राजस्व घाटे के अनुपात में बढ़ेगा खर्च
अदिति नायर ने कहा कि मुझे लगता है FY25 में पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) कम रहेगा और मौजूद वित्तीय जगह को कैपेक्स के लिए अहमियत दी जानी चाहिए। अनुमान है कि हर 10 आधार अंकों के अतिरिक्त वित्तीय घाटे से हमें 35,000 करोड़ रुपये का ज्यादा पूंजीगत व्यय मिलेगा। शायद बेहतर होगा कि एक यथार्थवादी कैपेक्स संख्या से आरंभ करें, एक वित्तीय घाटा जो मध्यम अवधि के पूर्वानुमान के मुताबिक कम हो जाएगा और बाजारों के लिए एक उचित उधारी आंकड़ा देगा। ICRA का अनुमान है कि वर्तमान वित्तीय साल में सरकारी खर्च और राजस्व के बीच का अंतर यानी राजकोषीय घाटा GDP का 4.8 फीसदी रहेगा और FY26 में यह 4.5 फीसदी होगा।
विकास रेट में सुधार की उम्मीद
नायर ने बोला कि सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है और आगे चलकर इसमें सुधार की आशा है। रेटिंग एजेंसी ने चालू और अगले वित्तीय साल के लिए जीडीपी वृद्धि रेट 6.5 फीसदी रहने का संभावना व्यक्त किया है। उन्होंने बोला कि ग्रामीण खपत स्थिर रहने की आशा है, जबकि शहरी खपत असमान हो सकती है। एक बार जब खाद्य महंगाई कम होने लगेगी, तो शहरी खपत में थोड़ी बढ़ोतरी देखी जा सकती है। बजट में इनकम टैक्स स्लैब और दरों में कुछ परिवर्तन शहरी करदाताओं के लिए बेहतर साबित हो सकता है और इससे राजस्व पर भी ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

