अभिनेता मोहम्मद जीशान अय्यूब ने बॉलीवुड की बड़ी समस्याओं पर की खुलकर बात…
Mohd Zeeshan Ayyub On Bollywood: ‘रांझणा’, ‘रईस’, ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’, ‘आर्टिकल 15’, ‘मिशन मंगल’ और ‘हड्डी’ जैसी बहुत बढ़िया फिल्मों अपने दमदार एक्टिंग से लोगों के बीच अपनी पहचान बनाने वाले अदाकार मोहम्मद जीशान अय्यूब ने हाल ही में मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री की कुछ बड़ी समस्याओं पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री में फिल्मों पर खुलकर पैसा खर्च नहीं किया जाता, जबकि ज्यादातर पैसे स्टार्स के आराम और सुविधाओं पर फंस जाते हैं।

जीशान ने अपने हालिया साक्षात्कार में कहा कि मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री में हायरार्की (सिस्टम और रैंक) के चलते फिल्म बनाने पर ध्यान कम रहता है और केवल भौकाल दिखाने की प्रयास होती है। उनका बोलना है कि इससे फिल्में ठीक अर्थ में नहीं बन पाती और इंडस्ट्री धीरे-धीरे स्वयं ही स्वयं को हानि पहुंचा रहा है। जीशान ने कहा कि मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री में इस सिस्टम और रैंक को समाप्त करने की आवश्यकता है। उन्होंने बोला कि प्रसिद्ध निर्देशक यश चोपड़ा ने बोला था कि फिल्में कभी फेल नहीं होती, बल्कि बजट फेल होता है।
बॉलीवुड से हटाना पड़ेगा सिस्टम और रैंक
उन्होंने आगे बोला कि आज लोग केवल सिस्टम और रैंक के साथ-साथ भौकाल बनाए रखने में लगे रहते हैं। कई बार महत्वपूर्ण सुविधाओं पर बहुत पैसा खर्च होता है, जैसे हर लाइट, हर वैनिटी वैन सेट पर रखना। जीशान ने बोला कि ये दिखावा करना कोई एचिवमेंट नहीं है, बल्कि ये फिल्म की वास्तविक क्वालिटी पर ध्यान कम करने जैसा है। उन्होंने आगे कहा कि फिल्मों के बजट का ठीक इस्तेमाल नहीं होता। ज्यादातर पैसा सेट पर दिखावे और सुविधाओं पर खर्च हो जाता है, जबकि फिल्म की कहानी, निर्देशन और निर्माण पर कम ध्यान जाता है।
6 दिनों में ‘ओजी’ ने तोड़े 2025 की 6 ब्लॉकबस्टर फिल्मों के रिकॉर्ड, 11 दिन से सिनेमाघर में लगी ‘जॉली एलएलबी 3’ को भी चटाई धूल
फिल्मों के हानिकारक हो सकती हैं ये बातें
उन्होंने बोला कि लोग केवल बड़े सितारों के लिए भौकाल दिखाने में लगे रहते हैं। ये सब फिल्म के लिए हानिकारक है। जीशान ने ये भी बोला कि ठीक अर्थ में फिल्म बनाने के लिए टैलेंट और कहानी पर बल देना महत्वपूर्ण है, न कि केवल स्टार्स की सुविधाओं पर। जीशान ने फॉर्मूला फिल्मिंग पर भी प्रश्न उठाया और कहा अब ज्यादातर मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री फिल्में फ्लॉप क्यों हो जाती हैं। उनका बोलना है कि आजकल ज्यादातर निर्माता फिल्मों के लिए एक ही तरह का फॉर्मूला अपनाते हैं, जिससे फिल्में अक्सर असफल हो जाती हैं।
जीशान ने ‘सैयारा’ को लेकर कही ये बात
उन्होंने उदाहरण दिया कि कुछ फिल्म प्रोडक्शन हाउस ने एक नयी फिल्म में नए कलाकारों को मौका दिया और वो हिट हो गई, जबकि बड़ी स्टार कास्ट वाली फॉर्मूला फिल्म चली नहीं। उनका मानना है कि यदि निर्माता कहानी और क्वालिटी पर ध्यान दें तो हर तरह की बहस और भटकाव अपने आप समाप्त हो जाएगा। जीशान ने कुछ हाल की फिल्मों का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बोला कि यशराज फिल्म्स की ‘सैयारा’ ने बॉक्स ऑफिस पर बहुत बढ़िया कामयाबी हासिल की। इस फिल्म में नए कलाकार अहान पांडे और अनित पड्डा ने डेब्यू किया।
‘वार 2’ का भी दिया उदाहरण
दोनों देश-विदेश में फेमस हो गए। फिल्म ने सभी उम्मीदों को पार करते हुए रिकॉर्ड तोड़े। इस उदाहरण से ये साफ हुआ कि ठीक कहानी और नए चेहरे फिल्म की कामयाबी में बड़ा रोल निभा सकते हैं। वहीं, दूसरी ओर यशराज की फिल्म ‘वार 2’ उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। इस फिल्म में ऋतिक रोशन, जूनियर एनटीआर और कियारा आडवाणी ने लीड रोल में थे, लेकिन फिल्म का अच्छा नहीं रहा। जीशान ने बोला कि ये साफ दिखाता है कि बड़े सितारे होने के बावजूद यदि कहानी और निर्माण पर ध्यान न दिया जाए तो फिल्म सफल नहीं होती।

