आयुष्मान खुराना ने फिर दिखाई अपनी दमदार अदाकारी
फिल्म ‘ड्रीम गर्ल 2’ की कहानी उसी खांचे में फिट बैठती है जिसमें इसकी पूर्ववर्ती फिल्म ‘ड्रीम गर्ल’ में भरपूर मसाला डाला गया था। पिछली फिल्म का सार यह है कि मथुरा में एक अधेड़ उम्र के आखिरी संस्कार का सामान बेचने वाले का जवान बेटा करमवीर जॉब की तलाश में इधर-उधर भटकता है और उसे ऐसे ही एक कॉल सेंटर में जॉब मिल जाती है। कॉल सेंटर टेलीफोन पर लोगों के लिए अनुकूल है
फिल्म के लेखक-निर्देशक राज शांडिल्य हाल के दिनों में कथित साहित्यिक चोरी को लेकर चर्चा में हैं। सबसे पहले फिल्म ‘जनहित में जारी’ का मुद्दा न्यायालय में घसीटा गया और किसी तरह अभियोजन लेखक को लाखों रुपये देकर मुद्दा शांत कराया गया। अब उन पर एक और मुद्दे में इल्जाम लगा है। जहां तक उनकी लेखन क्षमता की बात है तो एक पंक्ति के संवाद और रोजमर्रा की जीवन में हास्य ढूंढने की उनकी कला बेजोड़ है। लेकिन, एक हिट फिल्म का सीक्वल बनाने की कसौटी फिल्म ‘ड्रीम गर्ल 2’ लड़खड़ाती नजर आ रही है। राज ने फिल्म को मनोरंजक बनाने की पूरी प्रयास की है लेकिन जो फ्लेवर करमवीर और माही की कहानी में था, वो करमवीर और परी की कहानी से गायब है। कलाकारों की प्रचुरता भी फिल्म को ऊपर-नीचे कर रही है, लेकिन इसमें हिंडोले की तुलना में हिचकियां अधिक और आनंद कम है।फिल्म ‘ड्रीम गर्ल 2’ पूरी तरह से अदाकार आयुष्मान खुराना के कंधों पर टिकी हुई है। वह फिल्म के हीरो हैं और वह हीरोइन हैं। एक्टिंग के प्रति उनका सरेंडर और कड़ी मेहनत करम सिंह और पूजा की भूमिकाओं में साफ है। लेकिन कहते हैं अति हर स्थान वर्जित होती है। तो एक बिंदु पर आकर पूजा का आकर्षण बिखरने लगता है। परेश रावल, अन्नू कपूर और राजपाल यादव से लेकर मनोज जोशी, सीमा पाहवा, विजय राज, अभिषेक बनर्जी, मनजोत सिंह तक, पूजा के इस टूटते तिलिस्म पर पट्टी बांधने के लिए फिल्म में हास्य कलाकारों की एक पूरी बारात है, लेकिन कॉमेडी फिल्में जैसी दादा कोंडके बने होंगे। ‘ड्रीम गर्ल 2’ का आकर्षण धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है।अपनी विरासत की वजह से ही फिल्में पाने वाली अदाकारा अनन्या पांडे फिल्म ‘ड्रीम गर्ल 2’ की सबसे कमजोर कड़ी हैं। स्क्रीन पर उनका होना या न होना, दोनों ही फिल्म में कोई खास असर नहीं डालते। साफ है कि संवाद याद करने के दबाव में उनका एक्टिंग निखर कर सामने नहीं आता।न तो वह सीन की आवश्यकता समझती हैं और न ही अपने संवादों की गहराई। इस मौके पर दर्शकों को फिल्म ‘ड्रीम गर्ल’ की हीरोइन नुसरत भरूचा की काफी याद आती है। मुख्य नायिका के रूप में अनन्या पांडे की यह छठी फिल्म है और अब तक वह यह साबित नहीं कर पाई हैं कि दर्शक उनके नाम पर फिल्म देखने आ सकते हैं। एक अदाकारा के तौर पर उन्हें अभी भी कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है। एक्टिंग के मुद्दे में तो वे कमज़ोर हैं ही, उनका रूप भी दर्शकों को एक बार फिर लुभाने में असफल रहा है।फिल्म ‘ड्रीम गर्ल 2’ की दूसरी कमजोर कड़ी इसका संगीत है। फिल्म ‘ड्रीम गर्ल’ का म्यूजिक काफी हिट हुआ था। खासकर इसका गाना ‘दिल का टेलिफोन’। यह एक धुन एक बार फिर ‘ड्रीम गर्ल 2’ की भी सहायता करती है लेकिन फिल्म के बाकी दोनों गाने औसत से नीचे हैं। जिस गाने में पूजा पहली बार पर्दे पर नजर आ रही हैं वो गाना उनके भूमिका के हिसाब से बहुत कमजोर है। स्त्री भूमिका में आयुष्मान खुराना अपने हाव-भाव और नखरों से लोगों को आकर्षित करने की पूरी प्रयास करते हैं, लेकिन फिल्म ‘चाची 420’ में कमल हासन द्वारा किया गया काम, जिसमें उनकी भरतनाट्यम में महारत ने बहुत सहयोग दिया। वहीं, आयुष्मान खुराना एक ऐसे अदाकार लगते हैं जो सिर्फ़ इस विचार से बंधे हैं कि उन्हें एक स्त्री का भूमिका निभाना है।
फिल्म की बाकी टेक्निकल टीम, सिनेमैटोग्राफर सीके मुरलीधरन और जीतन हरमीत सिंह ने फिल्म का क्लाइमेक्स सीन बहुत खूबसूरती से शूट किया है, जब परी अपनी बारात लेकर करम सिंह के घर पहुंचती है। संपादक हेमल कोठारी ने भी मेहनत की है लेकिन परी के दृश्यों में फिल्म ढीली हो जाती है, दरअसल कहानी में इस भूमिका की अब आवश्यकता नहीं है। मेकअप और कॉस्ट्यूम का काम संभालने वाली टीम ने फिल्म ‘ड्रीम गर्ल 2’ में अच्छा सहयोग दिया है

