चेतन का हुआ निधन, अकेली रह गईं प्रिया
बॉलीवुड अदाकारा प्रिया राजवंश की आज 23वीं डेथ एनिवर्सरी है. उन्हें मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री की क्लासिक फिल्मों में से एक ‘हीर रांझा’ से पहचान मिली थी. इस फिल्म में उन्होंने हीर का भूमिका निभाया था. इनकी जीवन किसी परी कथा से कम नहीं थी. एक तस्वीर की बदौलत वो फिल्मों में आ गईं.

पहली ही फिल्म में काम करते हुए डायरेक्टर चेतन आनंद से प्यार हो गया लेकिन इनका अंत बहुत भयावह हुआ.
सिर्फ सात फिल्मों में नजर आईं प्रिया 27 मार्च 2000 को अपने घर में मृत पाई गईं, उनकी मृत्यु पर खूब टकराव हुए, गिरफ्तारियां भी हुईं लेकिन मर्डर किसने की आज तक साबित नहीं हो पाया.
प्रिया की पहली फिल्म ‘हकीकत’ हिट साबित हुई थी.
शिमला में जन्मीं, लंदन में पढ़ीं प्रिया
30 दिसंबर 1936 को सरकारी अधिकारी सुंदर सिंह के घर एक बेटी का जन्म हुआ जिसका नाम वीरा सुंदर सिंह रखा गया. वीरा की स्कूलिंग और ग्रेजुएशन तक कि पढ़ाई शिमला में ही हुई. फिर किसी प्रोजेक्ट के सिलसिले में सुंदर सिंह का ट्रांसफर लंदन हो गया और वीरा भी परिवार के साथ लंदन पहुंच गईं. यहां वीरा ने लंदन के रॉयल एकेडमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट्स में एडमिशन ले लिया.
उनके खानदान में किसी का फिल्मों से नाता नहीं था लेकिन वीरा को अभिनय में दिलचस्पी थी इसलिए उन्होंने रॉयल एकेडमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट्स में एडमिशन ले लिया. वीरा अभिनय सीखने लगीं और इसी दौरान उन्हें मॉडलिंग के भी ऑफर मिलने लगे.
तस्वीर ने बदली जिंदगी, फिल्मों में मिला काम
एक दिन लंदन के एक फोटोग्राफर की नजर पर वीरा की खूबसूरती पर पड़ी और उसने उनकी कुछ फोटोज़ चुपके से क्लिक कर लीं. एक प्रोग्राम के दौरान लंदन से ये फोटोग्राफर हिंदुस्तान आया जहां उसने सबसे पहले फिल्ममेकर ठाकुर रणवीर सिंह को ये तस्वीर दिखाई.
रणवीर ने तस्वीर देखी और तो वो प्रिया की खूबसरती निहारते ही रह गए. फिल्म इंडस्ट्री में जिसने भी वीरा की फोटोज़ देखी वो उनका दीवाना हो उठा. सब ये जानने को बेताब हो उठे कि आखिर ये लड़की कौन है?
वीरा की उस तस्वीर को देव आनंद के भाई चेतन आनंद ने भी देखा जो कि उस जमाने के जाने-माने डायरेक्टर थे. 1963 में जब चेतन भारत-चीन वॉर पर फिल्म ‘हकीकत’ बनाने की प्लानिंग की तो उन्होंने वीरा को फिल्म में कास्ट करने का मन बना लिया. उन्होंने वीरा से मिलने के लिए एड़ी-चोटी का बल लगा दिया और आखिर में एक डायरेक्टर की बदौलत उनकी मुलाकात वीरा से हो गई.
चेतन ने वीरा को हकीकत में काम करने का ऑफर दिया जिसे उन्होंने स्वीकार लिया. फिल्म की शूटिंग से पहले चेतन ने वीरा को नाम बदलने की राय दी और उनका नाम प्रिया रख दिया. ‘हकीकत’ रिलीज हुई और हिट रही. प्रिया राजवंश चमक गईं और फिल्ममेकर्स उन्हें फिल्म में कास्ट करने को बेताब हो उठे.
फिल्म ‘हकीकत’ की शूटिंग के दौरान चेतन आनंद और प्रिया राजवंश.
15 वर्ष बड़े चेतन आनंद से हुआ प्यार
उधर शूटिंग के दौरान चेतन प्रिया को पसंद करने लगे. वो प्रिया की खूबसूरती पर फिदा हो गए. हकीकत की शूटिंग के दौरान से ही उनका नाम प्रिया से जुड़ने लगा और मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री के गॉसिप गलियारों में दोनों के अफेयर के चर्चे आम हो गए. ये बात अधिक तेजी से इसलिए भी फैली क्योंकि चेतन पहले से शादीशुदा थे. वो प्रिया से 15 वर्ष बड़े थे.
चेतन अपनी शादीशुदा जीवन से खुश नहीं थे और पत्नी से अनबन के चलते उनसे अलग रह रहे थे. निजी जीवन की परेशानियों के बीच प्रिया के साथ समय गुजारकर उन्हें शाँति मिलने लगा. उधर प्रिया भी उन्हें पसंद करने लगीं.
प्रिया ने चेतन के भाई देव आनंद के साथ 1977 की फिल्म साहेब बहादुर की.
चेतन आनंद ने फिल्में बनानी छोड़ीं, प्रिया का करियर हुआ ठप्प
निजी जीवन की करीबी का असर रील लाइफ पर भी हुआ. चेतन प्रिया को लेकर इतने पजेसिव थे कि वो उन्हें किसी और फिल्ममेकर के साथ काम नहीं करने देते थे. यही वजह है कि हकीकत के बाद उन्होंने जितनी भी फिल्में बनाईं, उनमें केवल प्रिया को ही बतौर हीरोइन साइन किया.
‘हकीकत’ के बाद प्रिया की दूसरी फिल्म हीर रांझा थी जिसमें हीर के रोल में उन्हें बहुत पसंद किया गया. प्रिया ने अपने करियर में कुल सात फिल्में की थीं. 1964 में प्रारम्भ हुआ उनका फिल्मी यात्रा फिल्म हाथों की लकीरों पर समाप्त हुआ और यही उनकी अंतिम फिल्म भी साबित हुई.
इसकी वजह ये थी कि चेतन आनंद ने हाथों की लकीरों के बाद फिल्में बनाना बंद कर दिया था. उन्होंने फिल्में छोड़ने के बाद दूरदर्शन के लिए सिर्फ़ एक सीरियल बनाया जिसका नाम परमवीर चक्र था. चेतन आनंद ने फिल्में बनाना छोड़ा तो प्रिया का करियर भी समाप्त हो गया क्योंकि वो किसी और फिल्ममेकर के साथ काम नहीं करती थीं.
फिल्म ‘हीर रांझा’ में प्रिया राजकुमार के अपोजिट नजर आई थीं.
लिव इन में रहीं लेकिन नहीं की शादी
प्रिया अपने जमाने की सबसे पढ़ी-लिखी अदाकारा थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने परिवार का दबाव होने के बावजूद शादीशुदा चेतन को न छोड़ा न ही कभी विवाह की. दोनों लिव-इन में चेतन आनंद के जुहू के रुइया पार्क बंगले पर साथ रहते थे.
चेतन के दो बेटों को ये बात बिलकुल पसंद नहीं थी कि उनके पिता उनकी मां से अलग होकर प्रिया के साथ एक बंगले में अलग रहते हैं. दोनों ही बेटों विवेक और केतन को प्रिया फूटी आंख नहीं सुहाती थीं. मुद्दा और गरमा गया जब चेतन आनंद ने अपनी वसीयत बनवाई. उसमें उन्होंने जितनी जायदाद केतन और विवेक के नाम की, उतनी ही प्रिया के भी नाम कर दी. साथ ही जुहू वाला बंगला भी उन्होंने प्रिया के नाम कर दिया। दोनों ने इसका भरपूर विरोध किया लेकिन चेतन ने उनकी एक न सुनी.
प्रिया का चेतन से रिश्ता उनकी मृत्यु तक कायम रहा. 6 जुलाई 1997 को चेतन आनंद दुनिया से चल बसे. इसके बाद प्रिया बहुत अकेली हो गईं. उनके पास सुख-दुख बांटने वाला कोई नहीं बचा. तकरीबन तीन वर्ष उन्होंने बहुत तन्हाई में काटे. वो चेतन के साथ जिस बंगले में 20 वर्ष तक रहीं, उसी में अकेले रहना उनके लिए बहुत कठिन हो गया. वो कभी कभार ही बंगले से बाहर निकलती थीं.
इन सात फिल्मों में प्रिया ने किया काम
इन सात फिल्मों में प्रिया ने किया काम
1964 हकीकत
1970 हीर रांझा
1973 हिंदुस्तान की कसम
1973 हंसते जख्म
1977 साहेब बहादुर
1981 कुदरत
1986 हाथों की लकीरें
अनसुलझी पहेली बन गई प्रिया की मौत
फिर आया 27 मार्च 2000…ये वो दिन था जब प्रिया की मृत-शरीर उन्हीं के बंगले से मिलने की वजह से सनसनी फैल गई. पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में खुलासा हुआ कि प्रिया की कोई नैचुरल डेथ नहीं हुई बल्कि उनका हत्या हुआ था. हत्या का संदेह चेतन के दोनों बेटों केतन और विवेक पर किया गया और इनके साथ बंगले के दो नौकरों माला और अशोक को भी मर्डर में शामिल होने के आरोपों के साथ पुलिस ने अरैस्ट कर लिया.
दरअसल, चेतन के बेटों से खराब संबंधों का जिक्र प्रिया ने अपनी डायरी में भी किया था और उन्होंने अपनी जान को खतरे का भी अंदेशा जताया था. उन्होंने डायरी में ये भी लिखा था कि चेतन की मृत्यु के बाद उनके बेटे उन पर बंगला छोड़ने और वसीयत में चेतन द्वारा उनके नाम की गई जायदाद को लौटाने का दबाव बना रहे हैं.
इसी को आधार बनाकर पुलिस ने केतन और विवेक समेत दोनों नौकरों को अरैस्ट कर लिया. इन्हें सजा भी सुनाई गई लेकिन नवंबर 2002 में इन्हें जमानत मिल गई. 2011 में न्यायालय ने सबूत न होने की वजह से चारों को मुद्दे से बरी कर दिया और इस तरह प्रिया की मृत्यु हमेशा के लिए एक अनसुलझी पहेली बनकर रह गई.

