एक्टर चिरंजीवी को दामाद बनाने के लिए अल्लू रामलिंगैया कैसे हुए राजी, जाने दिलचस्प कहानी
नई दिल्ली। मेगास्टार चिरंजीवी… इस नाम को अब किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। लेकिन 1970 के दशक के अंत में, जब वह इंडस्ट्री में कदम रख रहे थे, वह भी उन युवा एक्टर्स में से एक थे, जो अपनी पहचान बनाने की प्रयास कर रहे थे। ऐसे समय में, पहले से ही एक मशहूर कॉमेडियन अल्लू रामलिंगैया (Allu Ramalingaiah) की बेटी सुरेखा से उन्होंने कैसे विवाह की? एक संघर्षरत अभिनेता को दामाद बनाने के लिए अल्लू रामलिंगैया कैसे राजी हुए? इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है।

पहली मुलाकात: चिरंजीवी और सुरेखा पहली बार अचानक मिले थे। चिरंजीवी अपने दोस्त के साथ अल्लू रामलिंगैया के घर गए थे। लेकिन उस समय रामलिंगैया घर पर नहीं थे। सुरेखा ने दरवाजा खोला और उन्हें अंदर बुलाकर कॉफी दी। यह छोटी सी मुलाकात थी, लेकिन सुरेखा को चिरंजीवी में कुछ खास लगा। बाद में उसने अपने कजिन से पूछा, ‘वह दोस्त कौन था?’ इस तरह चिरंजीवी के प्रति उसकी पहली पसंद प्रारम्भ हुई।
कनेक्शन की शुरुआत: हालांकि कनेक्शन की आरंभ हो गई थी, लेकिन उनकी यात्रा में एक बड़ा ट्विस्ट था। अल्लू रामलिंगैया अपनी बेटी के भविष्य के लिए अलग सपने देखते थे। वह सुरेखा की विवाह एक आईएएस अधिकारी से करना चाहते थे, जो सरकारी जॉब में हो। लेकिन वह फिल्म इंडस्ट्री से किसी को दामाद नहीं बनाना चाहते थे। इसलिए एक अदाकार को दामाद बनाने के लिए वह पहले राजी नहीं थे।
चिरंजीवी के चरित्र से प्रभावित: एक बार अल्लू रामलिंगैया, चिरंजीवी और कुछ अन्य लोग ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। उस समय अल्लू ने चिरंजीवी को कई बार शराब ऑफर की। लेकिन चिरंजीवी ने हर बार बहुत ही विनम्रता से लेकिन दृढ़ता से ‘नहीं’, उन्होंने साफ कर दिया- ‘मैं हनुमान भक्त हूं, शराब नहीं पीता’। ग्लैमर फील्ड में ऐसी चीजें आम मानी जाती हैं, लेकिन चिरंजीवी का अपने सिद्धांतों पर कायम रहना अल्लू रामलिंगैया को बहुत प्रभावित किया। उन्हें समझ में आया कि इस लड़के का अच्छा चरित्र है और वह किसी के कहने पर नहीं चलता। इस एक घटना ने चिरंजीवी के प्रति उनका नजरिया बदल दिया।
करियर में सफलता: चरित्र ही नहीं, एक्टिंग के मुद्दे में भी चिरंजीवी ने अपने ससुर का दिल जीत लिया। दोनों ने साथ में ‘मानवूरी पांडवुलु’ फिल्म में एक्टिंग किया। उस फिल्म में चिरंजीवी की अभिनय और डेडिकेशन ने अल्लू रामलिंगैया को प्रभावित किया। उन्होंने चिरंजीवी की प्रतिभा को देखकर विश्वास किया कि यह लड़का निश्चित रूप से बड़ा स्टार बनेगा। अच्छे चरित्र के साथ-साथ, उज्जवल भविष्य भी है, यह विश्वास उन्हें हो गया।
दामाद बनने का प्रस्ताव: चिरंजीवी हर तरह से पसंद आने के बाद, अल्लू रामलिंगैया ने देर नहीं की। तुरंत, दोनों के कॉमन फ्रेंड निर्माता जयकृष्ण को मैदान में उतारा। उन्होंने चिरंजीवी के पिता से बात करने के लिए भेजा। विवाह का प्रस्ताव रखना और चिरंजीवी के परिवार की पृष्ठभूमि के बारे में जानना जयकृष्ण का काम था। हालांकि, करियर में अभी तक सेटल नहीं होने के समय विवाह क्यों, इस पर चिरंजीवी ने पहले थोड़ा पीछे हटने का सोचा। आखिरकार, सभी के समझाने पर चिरंजीवी ने हां कह दी। चिरंजीवी के पिता ने भी संबंध को हरी झंडी दे दी और विवाह तय हो गई।
शुरू हुई मेगा यात्रा: चिरंजीवी और सुरेखा की विवाह 20 फरवरी 1980 को हुई। इस विवाह ने टॉलीवुड में ‘मेगा फैमिली’ के एक ताकतवर साम्राज्य की नींव रखी। उनका बेटा राम चरण अब ग्लोबल स्टार बन चुका है। चिरंजीवी आज भी अपने ससुर को ‘महान अभिनेता, डॉक्टर, स्वतंत्रता सेनानी, महान विचारक, अच्छे दिल वाला इंसान’ के रूप में बहुत सम्मान से याद करते हैं।

