जानें, बिहार चुनाव को लेकर क्या बोले पंकज त्रिपाठी…
बिहार में कुछ ही दिनों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं. चुनावी माहौल के बीच अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने दैनिक भास्कर के जरिए लोगों से खास अपील की है.

बिहार राजनीति के लिहाज से हमेशा से सतर्क रहा है. वैशाली गणराज्य से लेकर मगध साम्राज्य, चंपारण के नील आंदोलन से लेकर 1974 के संपूर्ण क्रांति आंदोलन तक हमारी सियासी समझ और सक्रियता पूरे राष्ट्र में जानी जाती है. मैं गोपालगंज के अपने गांव में भी अक्सर लोगों से वार्ता में यही बातें करता रहा हूं.
मैंने गांव वालों से बोला कि सबसे निष्ठावान आदमी चुनकर वोट दीजिए. इस पर गांव वालों ने एक उम्मीदवार का नाम लेकर कहा- ’उ निष्ठावान रहन त मुखिया के चुनाव में 15 वोट आइल रहे.’
मैंने उन्हें समझाया कि देखिए, उस आदमी को तो यह लगा कि क्षेत्र के 15 लोग मुझे निष्ठावान मानते हैं. यही सोचकर उसका हौसला बढ़ेगा. अगली बार वह और मेहनत करेगा, चुनावी प्रक्रिया में अधिक एक्टिव होगा. हमें वोटरों को यह समझना होगा कि वोट देकर ही अपने विचार को बढ़ाया जा सकता है. वोट हमारा अधिकार है.
मैं स्वयं चुनाव आयोग का ब्रांड एंबेसडर रह चुका हूं. 2000 तक बिहार में वोटर भी रहा, लेकिन मुंबई शिफ्ट हुआ तो वहीं का वोटर बन गया. गोपालगंज के गांव से अपना नाम कटवा लिया. एक सतर्क नागरिक की तरह मैंने बाकायदा जिला निर्वाचन पदाधिकारी को टेलीफोन कर नाम हटवाया था. हम बिहारी रोजी-रोटी के लिए राष्ट्र के कई राज्यों में फैले रहते हैं, लेकिन छठ, होली या दीपावली में से किसी एक मौके पर गांव जरूर पहुंचते हैं.
इस बार छठ पर्व के इर्द-गिर्द ही मतदान होने की आसार है. अबरी छठो मनाईं और मतदान भी करीं. गांव के लोगों से मिलेंगे, विचार साझा करेंगे और वोट भी देंगे. मतदान के समय यह भी देखना महत्वपूर्ण है कि सीओ-बीडीओ कार्यालय में जनता का काम कितनी सरलता से होता है. परखना होगा कि कौन उम्मीदवार गांव की समस्याओं को समझता है. काम करने की क्षमता रखता है. हम मेट्रो शहरों की तरह मतदान के दिन छुट्टी मनाने वाले लोग नहीं हैं.
बिहार का वोटर मतदान को ‘हॉलिडे’ नहीं मानता, जबकि बड़े शहरों में कई लोग उस दिन छुट्टी समझकर वोट देने से बचते हैं. हमारे गांवों में तो मतदान से 2-3 दिन पहले से ही तैयारी प्रारम्भ हो जाती है. माहौल रहता है कि ‘आज हमारा दिन है’.

