जानें अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं पर आधारित कुछ विशेष फिल्मों के बारे में…
मुंबई . किसी ने ठीक बोला है, “महिला… ईश्वर की बहुत बढ़िया रचना है.” वह मां के रूप में योद्धा तो बहन के रूप में जख्म पर मरहम भी लगाती है. दादी, मौसी, दोस्त या अन्य हर भूमिका में वह बहुत बढ़िया है. फिल्म इंडस्ट्री ने ऐसी कई फिल्में बनाई हैं, जिसमें मुख्य कलाकार के तौर पर महिलाएं हैं. श्रीदेवी की ‘मॉम’ में एक योद्धा तो यामी गौतम की ‘आर्टिकल 370’ में दुश्मनों को धूल चटाती नायिका है. यहां पढ़िए अंतर्राष्ट्रीय स्त्री दिवस पर स्त्रियों पर आधारित कुछ विशेष फिल्मों के बारे में…
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मिसेज :- हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘मिसेज’ का निर्देशन आरती कडव ने किया है. फिल्म में स्त्रियों पर विवाह के बाद हो रहे उत्पीड़न के साथ ही घरेलू स्त्रियों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इसे दिखाया गया है. फिल्म में सान्या मल्होत्रा मुख्य किरदार में हैं.
आर्टिकल 370 :- वर्ष 2024 में रिलीज हुई ‘आर्टिकल 370’ में यामी गौतम मुख्य किरदार में हैं. फिल्म का निर्देशन आदित्य सुहास जंभाले ने किया है. फिल्म में यामी खुफिया एजेंट के रूप में हैं, जो पर्दे पर खूब एक्शन करती नजर आईं.
थप्पड़ :- स्त्रियों के बड़े कदम उठाने की बात की जाए तो तापसी पन्नू की ‘थप्पड़’ को नहीं भूला जा सकता है. वर्ष 2020 में रिलीज फिल्म में स्त्रियों पर पति के अत्याचारों को दिखाया गया है. इस फिल्म का निर्देशन अनुभव सिन्हा ने किया.
छपाक :- मेघना गुलजार के निर्देशन में बनी ‘छपाक’ स्त्रियों पर किए जा रहे एसिड अटैक के विरुद्ध आवाज बुलंद करती है. ‘छपाक’ में दीपिका पादुकोण मुख्य किरदार में हैं. वर्ष 2020 में रिलीज हुई फिल्म में एसिड विक्टिम की कहानी को पर्दे पर उतारा गया है.
मॉम :- मां कितनी भी भोली-भाली हो, जब बात बच्चों की आती है तो वह शेरनी भी बन जाती है. यही बात साबित करती है वर्ष 2017 में आई श्रीदेवी की फिल्म ‘मॉम’. रवि उदयवार के निर्देशन में बनी फिल्म में बलात्कार की शिकार हुई बेटी के लिए लड़ती एक मां की मजबूत कहानी को भली–भाँति दिखाया गया है. फिल्म का डायलॉग “भगवान हर स्थान नहीं होता है इसीलिए उसने मां बनाई है.” फिल्म के सार को अपने में समेटे हुए है.
पिंक :- स्त्रियों के कपड़ों और कैरेक्टर पर प्रश्न उठाते लोगों को लताड़ लगाती फिल्म ‘पिंक’ के जरिए उन लोगों को कड़ा मैसेज देने की प्रयास की गई, जो जोर-जबरदस्ती को सामान्य मानते हैं. ‘नो का मतलब, नो होता है’ जैसे डायलॉग से सजी फिल्म करारा तमाचा भी लगाती है. वर्ष 2016 में रिलीज फिल्म का निर्देशन अनिरुद्ध रॉय चौधरी ने किया है.
नीरजा :- लड़कियां सिर्फ़ कोमल या नाजुक नहीं होती हैं, वह समय आने पर दुश्मनों से दो-दो हाथ करने में भी पीछे नहीं हटती हैं और यही मैसेज देती है वर्ष 2016 में रिलीज 23 वर्ष की लड़की के जीवन पर आधारित फिल्म ‘नीरजा’, जो कि स्त्री के साहस को दिखाती है. फिल्म का निर्देशन राम माधवानी ने किया है.
मर्दानी :- रानी मुखर्जी स्टारर ‘मर्दानी’ और ‘मर्दानी 2’ की कहानी के जरिए स्त्रियों पर हुए अत्याचार को दिखाया गया है.



