मनोरंजन

बलिया में रितेश पांडेय ने भोजपुरी भाषा को लेकर व्यक्त की अपनी भावनाएं

भोजपुरी अदाकार और गायक रितेश पांडेय ने रेवती में एक कार्यक्रम के दौरान भोजपुरी भाषा की समृद्धि और भविष्य को लेकर अपनी बेबाक राय रखी. दुनिया के कई राष्ट्रों में कार्यक्रम कर चुके रितेश ने कहा, “भोजपुरी जैसी मधुर भाषा मुझे कहीं नहीं मिली. बोलते ही ऐसा लगता है जैसे मिश्री घोल दी गई हो.

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“चैती, ठुमरी, कजरी… हर विधा में समृद्ध है भोजपुरी” मीडिया से वार्ता में रितेश पांडेय ने भोजपुरी की विविध विधाओं चैती, ठुमरी, कजरी और छपरहिया – का जिक्र करते हुए बोला कि यह भाषा सांस्कृतिक रूप से बहुत समृद्ध है. उन्होंने बोला कि भोजपुरी का हर शब्द, हर सुर सीधे दिल को छूता है.

उन्होंने यह भी बोला कि भोजपुरी को जो पहचान मिलनी चाहिए थी, वह देर से मिल रही है, लेकिन अब डिजिटल युग में स्थिति तेजी से बदल रही है.

“32-34 करोड़ व्यूअर्स, बड़ी कंपनियां भी कर रहीं निवेश” रितेश ने कहा कि आज के दौर में हिंदुस्तान की सभी क्षेत्रीय भाषाओं के मुकाबले भोजपुरी के सबसे अधिक 32 से 34 करोड़ व्यूअर्स हैं. बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां भी अब भोजपुरी कंटेंट में निवेश कर रही हैं. “भोजपुरी इंडस्ट्री डे बाय डे तरक्की कर रही है,” रितेश ने कहा.

“द्विअर्थी गानों की चुनौती, लेकिन अच्छे गाने भी बन रहे हैं” भोजपुरी गानों में अश्लीलता को लेकर पूछे गए प्रश्न पर रितेश ने साफ कहा, “विडंबना यह है कि द्विअर्थी गाने तेजी से वायरल हो जाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि भोजपुरी में अच्छे गाने नहीं बन रहे.” अपनी बात को साबित करते हुए उन्होंने गाना गुनगुनाया -“जा ए चंदा ले आव खबरिया, कहवां बाड़ी मोरी जान हो…”. इस पर वहां उपस्थित लोग भी झूम उठे.

राजनीति में आने के प्रश्न पर बोले, “जो राम रचि राखा” राजनीति में आने को लेकर पूछे गए प्रश्न पर रितेश पांडेय ने मुस्कुराते हुए कहा- हम ईश्वर पर भरोसा करते हैं. होईहे उहे जो राम रचित राखा.

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