मनोरंजन

Shah rukh khan: स्वदेस के लिए फिर से बेकरार हैं फैंस

स्वदेस’ की फिर से रिलीज की बात

Shah rukh khan: 2004 में रिलीज हुई आशुतोष गोवारिकर की फिल्म ‘स्वदेस’ का जिक्र फिर से हो रहा है फैंस लंबे समय से इसकी फिर से रिलीज की मांग कर रहे हैं हाल ही में रिलीज हुई रणबीर कपूर की ‘रॉकस्टार’ और ऋतिक रोशन की ‘लक्ष्य’ के बाद, लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं

Shah rukh khan greets his fans outside mannat for making guinness world record in hindi

WhatsApp Group Join Now

रोनी स्क्रूवाला की प्रतिक्रिया

रॉनी स्क्रूवाला, जो ‘स्वदेस’ के निर्माता हैं, ने हाल ही में ‘इंडिया टुडे’ को दिए गए साक्षात्कार में बोला कि ‘स्वदेस’ अपने समय से आगे की फिल्म थी और इसे एक बार फिर से देखने की आवश्यकता है उन्होंने कहा, “यह फिल्म दोबारा रिलीज हो सकती है मैं सभी को बताता हूं कि यह फिल्म अपने समय से आगे की थी इसलिए, इसे दूसरी बार देखने की आवश्यकता है

स्वदेस’ की कहानी

फिल्म ‘स्वदेस’ एक भारतीय मूल के नासा वैज्ञानिक मोहन भागर्व की कहानी है, जो अपने गाँव लौटता है मोहन का उद्देश्य गाँव में बिजली लाना होता है यह कहानी 2003 की कन्नड़ फिल्म ‘चिगुरिडा कनसु’ से प्रेरित है

फिल्म की प्रेरणा और संदेश

रोनी स्क्रूवाला ने कहा, “यह एक सदाबहार कहानी है जिसने बहुत से लोगों को प्रेरित किया. हमने अपनी संस्था का नाम ‘स्वदेस फाउंडेशन’ रखा शाहरुख खान एक नासा वैज्ञानिक के रूप में गाँव लौटते हैं और वहाँ के लोगों की सहायता करते हैं आज की युवा पीढ़ी इस कहानी से जुड़ सकती है आप विदेश में पढ़ाई करने जा सकते हैं, लेकिन अंततः आप अपने राष्ट्र लौटना चाहते हैं यह फिल्म देश की भावना और मूड को दर्शाती है और इसलिए यह बहुत प्रासंगिक है

फिल्म के अन्य कलाकार और पुरस्कार

‘स्वदेस’ में शाहरुख खान के अतिरिक्त गायत्री जोशी, किशोरी बल्लाल, राजेश विवेक, दया शंकर पांडे, और लेख टंडन जैसे कलाकार भी जरूरी भूमिकाओं में थे महेश अने ने ‘स्वदेस’ के लिए  बेस्ट सिनेमेटोग्राफी का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता था उदित नारायण ने ‘ये तारा वो तारा’ गीत के लिए बेस्ट प्ले बैक सिंगर मेल का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता था

क्या ‘स्वदेस’ की वापसी होगी?

अब प्रश्न यह है कि क्या ‘स्वदेस’ फिर से रिलीज होगी और क्या यह नयी पीढ़ी को उसी तरह से प्रभावित करेगी जैसे इसने पहली बार में किया था रोनी स्क्रूवाला के अनुसार, इस फिल्म की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है और यह निश्चित रूप से एक बार फिर से देखने लायक है

Back to top button