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इस बड़ी बीमारी से जूझ रही हैं सिंगर शारदा स‍िन्‍हा

What is Multiple Myeloma: बिहार और उत्तर प्रदेश में छठ पर्व सहित मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री फिल्‍मों में अपने गीतों से लोगों के दिलों में उतरने वाली लोक गायिका शारदा सिन्‍हा फिलहाल जीवन और मृत्यु के बीच झूल रही हैं ऑल इण्डिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद नयी दिल्‍ली के इंस्टिट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल में भर्ती शारदा सिंन्‍हा फिलहाल ऑक्‍सीजन सपोर्ट पर हैं और वे एक तरह के ब्‍लड कैंसर मल्‍टीपल मायलोमा से जंग लड़ रही हैं सिन्‍हा को 2018 से ही यह रोग है, फिलहाल उनका उपचार चल रहा है आइए एम्‍स के ऑन्‍कोलॉजिस्‍ट से जानते हैं क्‍या होती है मल्‍टीपल मायलोमा की बीमारी, यह कितनी घातक है और क्‍या छठ पर्व तक सिंगर इस रोग से ठीक हो जाएंगी?

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एम्‍स, नयी दिल्‍ली के आईआरसीएच में डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल ऑन्‍कोलॉजी में एडिशनल प्रोफेसर डाक्टर अजय गोगिया बताते हैं कि मायलोमा या मल्‍टीपल मायलोमा एक तरह का ब्‍लड कैंसर है, जिसे बी सेल मेलिग्‍नेंसी भी बोलते हैं यह हमारे शरीर की ब्‍लड सेल्‍स और बोन मैरो को प्रभावित करता है इसमें बी सेल्‍स एब्‍लनॉर्मल फंक्‍शन प्रारम्भ कर देते हैं जिन भी रोगियों में ये डायग्‍नोस होता है वे लोग अक्‍सर कमर में दर्द या बैक पेन के साथ आते हैं कुछ लोग रीनल फेलियर या चेस्‍ट इन्‍फेक्‍शन के साथ भी आते हैं

ये होते हैं मल्‍टीपल मायलोमा के लक्षण

कमर की हड्डी में दर्द, खासतौर पर स्‍पाइन, हिप्‍स या सीने में दर्द और इन्‍फेक्‍शन
कब्‍ज
उल्‍टी
भूख खत्‍म होना
मेंटल फॉग या कन्‍फ्यूजन
थकान
वजन घटना

ऐसे चलता है बीमारी का पता
डॉ गोगिया कहते हैं कि इस रोग का पता दो तरह से लगाया जाता है ब्‍लड टेस्‍ट और बोन मैरो टेस्‍ट से यह पता चल जाता है कि कौन सी स्‍टेज का मायलोमा है साथ ही कौन सा लक्षण ज्‍यादा रिस्‍क पैदा कर रहा है जैसे स्‍पाइनल दर्द, रीनल फेलियर या चेस्‍ट इन्‍फेक्‍शन आदि लिहाजा रिस्‍क को लो और हाई में केटेगराइज करके रोगियों को उपचार दिया जाता है इसके लिए कुछ और टेस्‍ट और पैरामीटर्स भी होते हैं, जिसके आधार पर कैंसर कहां कहां फैला है इसका भी पता किया जाता है

कितना है घातक
यह कैंसर काफी घातक है रोगी की उम्र और कैंसर की स्‍टेज के आधार पर इसका आउटकम रहता है अमूमन 40 से 82 प्रतिशत लोगों का सर्वाइवल दर करीब 5 वर्ष रहता है मल्‍टीपल मायलोमा से ग्रस्‍त करीब 85 प्रतिशत रोगी एक वर्ष तक जीवित रह पाते हैं जबकि 55 प्रतिशत लोग 5 वर्ष या उससे ज्‍यादा जी लेते हैं 30 प्रतिशत रोगी ही ऐसे होते हैं जो जल्‍दी डायग्‍नोसिस और ठीक उपचार के बाद 10 वर्ष तक जी जाते हैं

क्‍या इसका उपचार है संभव
डॉ गोग‍िया बताते हैं कि मल्‍टीपल मायलोमा को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है, हालांकि समय पर रोग की पहचान और उपचार से इसके लक्षणों को कम करने के साथ ही रोग को कंट्रोल किया जा सकता है एम्‍स में 60 वर्ष से कम उम्र के रोगियों का बोन मेरो ट्रांसप्‍लांट भी किया जाता है साथ ही दो वर्ष तक रोगियों को मेंटेनेंस भी दिया जाता है वहीं 65 वर्ष से ऊपर के रोगी जो या तो कई रोंगों से ग्रस्‍त होते हैं या ज्‍यादा बुजुर्ग होते हैं उन्‍हें भी इंडक्‍शन के बाद मेंटेनेंस दिया जाता है

क्‍या आईसीयू में जाने के बाद बचना संभव है
डॉ कहते हैं कि यह बुजुर्गों की रोग है एम्‍स में अभी तक मायलोमा का सबसे युवा रोगी 16 वर्ष की उम्र का आया था बाकी यह रोग 50 की उम्र के बाद ही अक्‍सर देखने को मिलती है जहां तक रोगी के आईसीयू में जाने के बाद बचने की आसार की बात है तो आईसीयू में रोगी चेस्‍ट इन्‍फेक्‍शन कंट्रोल के लिए ही जाता है यदि यह इन्‍फेक्‍शन कंट्रोल हो जाता है तो रोगी बच जाता है शारदा सिन्‍हा के मुद्दे में भी यही बात है

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