जब तंगी का हाल झेलकर पस्त हुए भारत भूषण…
कहते हैं अंत भला तो सब भला, लेकिन अक्सर ऐसा होता नहीं है। मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कितने ही नाम हैं, जिनके करियर के शुरुआती दिनों में उनका सितारा आसमान की बुलंदियों पर रहा। लेकिन उनका अंत ऐसा हुआ जिसे सुनकर आपका दिल कांप उठेगा। आज हम एक ऐसे एक्टर की सच्ची कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने करियर के दौरान दिलीप कुमार, देव आनंद और राजकुमार जैसे दिग्गज एक्टरों को चुनौती दी। मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री में कोई उन्हें ‘बेजू बावरा’ तो कोई ‘कबीर’ के नाम से जानता है। लेकिन उनकी जीवन का अंत ऐसे हुआ, जिसे सुनकर आपकी रूह कांप उठेगी।

यूपी के मेरठ में 14 जून 1920 को हिंदुस्तान भूषण भल्ला का जन्म हुआ था। उनके पिता एक बड़े वकील थे और जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते थे। वह अपने बेटे हिंदुस्तान भूषण को भी बड़ा वकील बनना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने हिंदुस्तान को अलीगढ़ पढ़ने के लिए भेज दिया था। हालांकि, हिंदुस्तान के दिल में हिंदी सिनेमा बसा हुआ था, बस फिर क्या था जैसे ही ग्रेजुएशन पूरा किया तो कोलकाता चले गए। उन दिनों एक्टिंग करने के लिए मुंबई नहीं कोलकाता जाने का रिवाज था। उसके बाद उनका वर्ष 1941 में पहली फिल्म मिली ‘चित्रलेखा’। मगर 10 वर्ष तक वह फिल्मों में काम करते रहे लेकिन कोई पहचान नहीं बना सके। आखिरकार 1952 में आई एक फिल्म ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया फिल्म थी ‘बैजू बावरा’।
‘बैजू बावरा’ से बनाई घर-घर में पहचान
मोहम्मद रफी की आवाज और हिंदुस्तान भूषण के एक्टिंग वाली इस फिल्म ने तो कमाल कर दिया था। फिल्म रातों-रात हिट हो गई और बैजू बावरा या नहीं हिंदुस्तान भूषण घर-घर में पहचान बनाने में सफल हो गए। इसके बाद तो उन्होंने एक के बाद एक फिल्में की और अपने समकालीन एक्टर्स की नीदों को उड़ा दिया। मधुबाला के साथ उनकी फिल्म ‘बरसात की रात’ में तो बड़े पर्दें पर तहलका मचा दिया था। फिल्म ‘सावन’, ‘भाईचारा’, ‘बैजू बावरा’, ‘जन्माष्टमी’ जैसी फिल्मों से उन्होंने मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री में अपना नाम तो बनाया ही। साथ ही बंगला, गाड़ी और मोटा बैंक बैलेंस भी कमा लिया।
भारत भूषण ने की थी दो शादी
एक्टर ने दो विवाह की थी। उनकी पहली पत्नी सरला थी, जिससे उनको दो बेटियां हुईं। दूसरी बेटी के जन्म के समय पत्नी ने दम तोड़ दिया था। इसके बाद उन्होंने रत्ना नाम की स्त्री से दूसरी विवाह की। कहते हैं सफल होने के लिए लाखों जतन करने पड़ते हैं लेकिन एक छोटी सी गलती भी बर्बादी की ओर ले जाती है। हिंदुस्तान भूषण के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
भाई की राय ने किया बर्बाद
बताया जाता है कि हिंदुस्तान भूषण को उनके भाई रमेश ने राय दी कि उन्हें फिल्में प्रोड्यूस करनी चाहिए। लेकिन कुछ फिल्मों को छोड़ सब फ्लॉप हो गईं। ‘दूज का चांद’ बनाने के बाद तो उनकी हालात बहुत खराब हो गई थी। एक-एक करके उनके सारे बंगले बिक गए, गाड़ियां बिक गईं। बस यहीं से उनकी बर्बादी का दौर प्रारम्भ हुआ। एक भी फिल्म नहीं चली और हालत यह हो गई कि हिंदुस्तान भूषण को अपने घर के बर्तन तक बेचने पड़ गए।
पेट भरने के लिए किया जूनियर आर्टिस्ट का रोल
तंगहाली इतनी थी कि पेट भरने के लिए उन्होंने जूनियर आर्टिस्ट तक का रोल करना प्रारम्भ कर दिया। एक बार अमिताभ बच्चन ने उन्हें बस स्टेशन पर देखा था। वो आम लोगों की तरह बस में चढ़ने के लिए लाइन में लगे हुए थे। कुछ लोग तो यहां तक कहते हैं कि उन्होंने गार्ड की जॉब भी की। हालांकि, उनकी बेटी ने इसे अफवाह करार दिया था।
72 वर्ष की उम्र में किया दुनिया को अलविदा
तंगहाली के दौर में उन्हें दिल की रोग के घेर लिया था। लेकिन उपचार के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। 72 वर्ष की उम्र में एक रात वो लेटे हुए थे। अचानक उनको तेज दर्द होने लगा। दर्द से तड़पते उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर्स उन्हें पहचान नहीं सके। अंत समय में मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री से कोई भी कलाकार उनकी अर्थी देने के लिए नहीं पहुंचा था।

