एक्सपर्ट्स ने दी सलाह, डिजिटल समाधान ही है बेहतर खाद्य सुरक्षा का रास्ता
विशेषज्ञों ने शनिवार को बोला कि एंटीबायोटिक का ठीक इस्तेमाल सुनिश्चित करने, खाद्य सुरक्षा में सुधार करने और एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (एएमआर) से निपटने के लिए उचित नियमन महत्वपूर्ण है.

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार हिंदुस्तान खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की पहल ग्लोबल फूड रेगुलेटर्स समिट 2025 में जानकारों ने फूड वैल्यू चेन में फूड सेफ्टी सिस्टम और नियामक ढांचे को मजबूत करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की.
डेनमार्क के कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी में पशु चिकित्सा जन स्वास्थ्य के प्रोफेसर एंडर्स डल्सगार्ड ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से कहा, यह खाद्य नियामकों के लिए एक बहुत जरूरी सम्मेलन है, क्योंकि खाद्य पदार्थों को कई तरह से सुरक्षित होना चाहिए. एक परेशानी यह है कि एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध से ह्युमन हेल्थ सेक्टर में बहुत सारी मौतें हो रही हैं. हमें यह साफ करना होगा कि पशुपालन में एंटीबायोटिक के हमारे इस्तेमाल से कितना सहयोग हो सकता है.
उन्होंने आगे कहा, हमें किसानों और उद्योग के साथ मिलकर नियामक कार्यक्रम प्रारम्भ करने की जरूरत है, ताकि वे रिज़ल्ट दे सकें और एंटीबायोटिक का ठीक और सोच-समझकर इस्तेमाल किया जा सके.
द्वीप देश ब्रुनेई की ब्रुनेई दारुस्सलाम फूड अथॉरिटी की सीईओ डाक्टर एनी रहमान ने आईएएनएस को कहा कि खाद्य सुरक्षा एक वैश्विक मामला बन गया है और यह असल में विश्वास पर आधारित है.
उन्होंने कहा, खाद्य सुरक्षा एक बढ़ता और गतिशील क्षेत्र है, इसलिए इसमें सुधार के लिए हमेशा नयी चीजें होती हैं और बहुत योगदान भी होता है.
एओएसी इंटरनेशनल, यूएस की उप कार्यकारी निदेशक और मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी डाक्टर कैटरिना मास्टोव्सका ने खाद्य सुरक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) या डेटा एनालिटिक्स जैसे एडवांस उपकरणों के इस्तेमाल के महत्व पर बल दिया.
उन्होंने आईएएनएस से कहा, हमें निश्चित रूप से खाद्य विश्लेषण में एआई उपकरणों को लागू करने और उन्हें अधिक कारगर ढंग से इस्तेमाल करने के उपायों पर कुछ दिशानिर्देश विकसित करने की जरूरत है.
न्यूजीलैंड फूड सेफ्टी के वक्ता और उप महानिदेशक विंसेंट अर्बकल ने हिंदुस्तान की खाद्य सुरक्षा को बड़े पैमाने पर व्यवस्थित ढंग से प्रबंधित करने की सराहना की.
अर्बकल ने आईएएनएस को बताया, हमारा राष्ट्र बहुत छोटा है, जिसकी जनसंख्या साढ़े पांच मिलियन है और आपका राष्ट्र बहुत बड़ा है. इतनी विविध संस्कृतियों वाले इतने बड़े राष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को बड़े पैमाने पर प्रबंधित करने और खाद्य निर्यात बढ़ाने की आपकी आकांक्षा से हम हिंदुस्तान से बहुत कुछ सीख सकते हैं.
ऑस्ट्रिया के वर्ल्ड पैकेजिंग ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूपीओ) के कोफी एसुमन ने बेहतर खाद्य सुरक्षा के लिए डिजिटल टेक्नोलॉजी अपनाने की आवश्यकता पर बात की.
एसुमन ने आईएएनएस को बताया, यह साफ हो गया है कि डिजिटलीकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग के इस दौर में, हमें कई डिजिटल टेक्नोलॉजी अपनाकर खाद्य नियमन के अपने ढंग में परिवर्तन करने की आवश्यकता है.
उन्होंने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में ठीक पैकेजिंग के महत्व पर भी बल दिया और खाद्य पदार्थों को दूषित होने से बचाने के लिए प्लास्टिक का सोच-समझकर इस्तेमाल करने और पर्यावरण को हानि से बचाने के लिए उसका ठीक ढंग से निपटान करने की आवश्यकता पर भी बल दिया.
वहीं, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ अंगशु मलिक ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में भारतीय खाना पकाने और भोजन की पारंपरिक विधि के महत्व पर बल दिया. उन्होंने खाने के ऑयल का अपना उत्पादन बढ़ाने की भी बात कही.
उन्होंने आईएएनएस से कहा, खाने के ऑयल का 60 फीसदी हम आयात करते हैं. हमें अपना उत्पादन बढ़ाना होगा. इसके लिए हम सरसों का एक मॉडल फार्म प्रारम्भ करेंगे.

