सिरदर्द से लेकर विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में कारगर है ‘नस्य’ थेरेपी
‘नस्य’ आयुर्वेद की पांच शुद्धिकरण प्रक्रियाओं यानी पंचकर्म में से एक है। इसमें नाक के नथुनों के माध्यम से विभिन्न जड़ी बूटियां वाली दवाएं डाली जाती हैं। यह प्रक्रिया कई रोगों के उपचार में सहायता करती है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से सिर और उससे संबंधित संरचनाओं के रोगों में किया जाता है। आयुर्वेद चिकित्सक हर्ष की मानें तो आयुर्वेद में इस थेरेपी का इस्तेमाल सिरदर्द से लेकर विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार के लिए किया जाता है।

‘नस्य’ थेरेपी एक आयुर्वेदिक उपचार है
आयुर्वेद के मुताबिक “नासा ही शिरसो द्वारं” यानी हमारी नाक ही हमारे मस्तिष्क तक पहुंचने का रास्ता है। ‘नस्य’ थेरेपी एक आयुर्वेदिक उपचार है, इसे ‘नस्य’ कर्म के नाम से भी जाना जाता है। इस चिकित्सा में कई आयुर्वेदिक औषधियों को नाक के द्वारा आपके शरीर में पहुंचाया जाता है। इसके लिए देसी घी, क्वाथ और कई अन्य तेलों का भी इस्तेमाल किया जाता है, जो कई रोगों के इलाज में सहायता करता है।
सिरदर्द, अनिद्रा जैसी कई रोंगों में है रामबाण
आयास आयुर्वेदिक अस्पताल से आयुर्वेद चिकित्सक हर्ष ने लोकल 18 से बात करते हुए कहा कि आयुर्वेद में पंचकर्म चिकित्सा पद्धति के नाम से कई सारी चिकित्सा पद्धति है, जिनमें से एक है ‘नस्य’ चिकित्सा पद्धति जो की नाक के द्वारा की जाती है। ‘नस्य’ चिकित्सा में नाक के माध्यम से दवाएं डाली जाती हैं। नाक के माध्यम से दी जाने वाली दवाएं ‘नस्य’ श्रृंगतक मर्म तक पहुंचती है, मस्तिष्क में फैलती है और बीमारी पैदा करने के लिए उत्तरदायी चीजों को खत्म करती है, जिससे शरीर के कई रोगों को दूर करने में सहायता मिलती है। यह साइनसाइटिस, सिरदर्द, अनिद्रा या नींद से संबंधित मुद्दों, माइग्रेन के मरीजों के इलाज में बहुत कारगर है।
सीने में जमे बलगम को भी दूर करती है
मालिश, भाप और ऑयल की बूंदों से ‘नस्य’ की पूरी प्रक्रिया नाक के मार्ग को शांत करती है और जमा बलगम को साफ करती है। साथ ही आवाज में सुधार करती है और मस्तिष्क में केंद्रों को उत्तेजित करती है, संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार करती है, क्योंकि हमारा मस्तिष्क, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र इसका मुख्य नियंत्रक है।

