स्वास्थ्य

यदि आपके सामने भी किसी को आ जाए हार्ट अटैक, तो फ़ौरन करें ये काम

दिल की बीमारी, जिसे कार्डियोवैस्कुलर रोग भी बोला जाता है, दिल और खून के प्रवाह से जुड़ी समस्याओं का एक समूह है. यह कई तरह की स्वास्थ्य स्थितियों को जन्म देती है, जिनमें दिल के दौरे से लेकर ब्लड सर्कुलेशन में दिक्कतें शामिल होती हैं. इस रोग में मुख्यतः दिल को खून पहुंचाने वाली नसों में रुकावट आ जाती है, जिससे दिल की बीमारियां हो जाती हैं. इनमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) सबसे आम है, जिसे कोरोनरी हार्ट डिजीज (CHD) भी बोला जाता है.

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दिल की रोंगों के प्रकार

कार्डियोवैस्कुलर रोंगों में कई प्रकार की समस्याएं आती हैं, जैसे:

कोरोनरी हार्ट डिजीज (CHD) – दिल को खून पहुंचाने वाली नसों में रुकावट.
सेरेब्रोवैस्कुलर बीमारी – दिमाग में खून के प्रवाह से जुड़ी समस्याएं.
परिधीय धमनी बीमारी (PAD) – हाथ-पैर की नसों में ब्लॉकेज.
अतालता (Arrhythmia) – दिल की अनियमित धड़कन.
कार्डियोमायोपैथी – दिल की मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं.
हार्ट फेलियर – दिल के ठीक से काम न करने की स्थिति.

भारत में दिल की रोंगों का हाल

पिछले कुछ वर्षों में हिंदुस्तान में दिल की रोंगों का खतरा तेजी से बढ़ा है. खासकर 45 वर्ष से कम उम्र के लोगों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) के मुद्दे 100 फीसदी तक बढ़ गए हैं. यह रोग अब 25 वर्ष से कम उम्र की स्त्रियों में भी देखी जा रही है, जो पहले दुर्लभ थी. हिंदुस्तान में 45 से 54 वर्ष की स्त्रियों में दिल की रोग का खतरा अमेरिका की तुलना में काफी अधिक है.

महिलाओं में बढ़ते खतरे

महिलाओं में दिल की रोग के मुद्दे तेजी से बढ़ रहे हैं. पिछले कुछ दशकों में कोरोनरी आर्टरी बायपास सर्जरी का फीसदी भी बढ़ा है. 1980 के दशक में यह सर्जरी 6 फीसदी होती थी, जो अब 15 फीसदी तक पहुंच गई है.

लोगों की ढिलाई और बढ़ती बीमारी

विशेषज्ञों का बोलना है कि लोग अपनी स्वास्थ्य को लेकर सतर्क नहीं हैं. वे खाने-पीने और मनोरंजन पर खर्च कर देते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण मेडिकल टेस्ट करवाने में कोताही बरतते हैं. Covid-19 के बाद दिल की रोंगों का खतरा और बढ़ गया है, क्योंकि लोग अब भी नियमित एक्सरसाइज नहीं कर रहे हैं. यहां तक कि आवश्यकता से अधिक एक्सरसाइज करने से भी दिल पर बुरा असर पड़ सकता है.​ दिल की रोग आज के समय में एक गंभीर परेशानी बन चुकी है. इसकी रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है कि लोग अपनी स्वास्थ्य पर ध्यान दें, नियमित जांच कराएं और संतुलित जीवनशैली अपनाएं.

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