स्वास्थ्य

जानें कैसे पीएम2.5 बुजुर्गों के स्वास्थ्य को पहुंचा सकते है नुकसान…

नई दिल्ली . वायु प्रदूषण पूरे विश्व में एक गंभीर स्वास्थ्य परेशानी बनता जा रहा है. हाल ही में एक नए शोध में बुजुर्गों पर इसके स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभावों पर ध्यान दिया गया है.

<!–

–>Download 2025 02 10t194608. 075
WhatsApp Group Join Now

<!– –>
<!– Business 040924
–><!–

–>जापान की टोक्यो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि हवा में उपस्थित बारीक कण (पीएम2.5) बुजुर्गों के स्वास्थ्य को हानि पहुंचाते हैं और उन क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक समस्याएं बढ़ाते हैं जहां स्वास्थ्य सेवाएं सीमित हैं.

पीएम2.5 बहुत छोटे प्रदूषण कण होते हैं, जो सांस लेने के दौरान फेफड़ों और रक्त प्रवाह में गहराई तक पहुंच सकते हैं. इससे गंभीर श्वसन (सांस से जुड़ी) और दिल संबंधी बीमारियां हो सकती हैं. ये कण इतने छोटे होते हैं कि नाक और गले की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली इन्हें रोक नहीं पाती, जिससे बुजुर्गों को अधिक खतरा होता है.

अध्ययन के प्रमुख लेखक, एसोसिएट प्रोफेसर यिन लॉन्ग के अनुसार, “उम्र बढ़ने के साथ हमारी बीमारी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे हमारा शरीर प्रदूषण से बचाव नहीं कर पाता. हल्का प्रदूषण भी पहले से उपस्थित रोंगों को बढ़ा सकता है, जिससे हॉस्पिटल में भर्ती होने की आसार और असमय मौत का खतरा बढ़ जाता है.

शोधकर्ताओं ने जापान पर विशेष ध्यान दिया, जहां लगभग 30% जनसंख्या 65 साल या उससे अधिक उम्र की है. उन्होंने देखा कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों को पीएम2.5 प्रदूषण से अधिक हानि होता है. इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं भी कम हैं, जबकि शहरों में बेहतर चिकित्सा सेवाएं मौजूद हैं. इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रदूषण से जुड़ी आर्थिक लागत अधिक होती है.

लॉन्ग बताते हैं, “कई ग्रामीण क्षेत्रों में जानकार चिकित्सक और उन्नत हॉस्पिटल नहीं हैं, जो पीएम2.5 से बढ़ने वाली रोंगों जैसे स्ट्रोक और हार्ट अटैक का उपचार कर सकें.

शोध में यह भी पाया गया कि पीएम2.5 के कारण कई बुजुर्ग गंभीर रोंगों से ग्रस्त हो जाते हैं, जिससे उन्हें योजना से पहले ही काम छोड़ना पड़ता है. इसका असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ता है और युवा पीढ़ी पर उनका बोझ बढ़ जाता है.

अर्थव्यवस्था पर असर का विश्लेषण करने पर पता चला कि पीएम2.5 से होने वाली रोंगों और मौत रेट के कारण कुछ क्षेत्रों में आर्थिक हानि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2% से भी अधिक हो सकता है.

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यह परेशानी सिर्फ़ जापान तक सीमित नहीं है. चीन और यूरोप के कुछ हिस्सों सहित अन्य राष्ट्रों में भी बढ़ती प्रदूषण रेट और वृद्ध होती जनसंख्या के कारण ऐसी ही चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं. लॉन्ग ने सरकारों से आग्रह किया कि वे सबसे अधिक प्रभावित इलाकों और लोगों की पहचान कर, संसाधनों का ठीक ढंग से आवंटन करें.

शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि प्रदूषण नियंत्रण को कठोर किया जाए, स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश बढ़ाया जाए और अंतर्राष्ट्रीय योगदान से सीमा पार प्रदूषण की परेशानी का निवारण निकाला जाए. साथ ही, शहरों में हरियाली बढ़ाने और टेलीमेडिसिन को प्रोत्साहित करने पर भी बल दिया गया.

 

Back to top button