ध्यान दें! मर्दों के शरीर को अंदर ही अंदर गला सकती है ज्यादा चीनी खाने की आदत
Sugar Decreases Testosterone: चीनी को बहुत अधिक प्रोसेस्ड कर बनाया जाता है। इसमें कई तरह के केमिकल मिलाए जाते हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि एक दिन में 20 ग्राम से अधिक चीनी नहीं खाना चाहिए। यदि इससे अधिक चीनी खाएंगे तो कई तरह की परेशानियां होगी। यह कार्बोहाइड्रैट है। चीनी खून में शीघ्र घुलकर ग्लूकोज में बदल जाता है और इससे अधिक एनर्जी बनती है। यह एनर्जी चर्बी के रूप में जमा होने लगती है। इससे मोटापा होता है। मोटापा कई रोंगों की जड़ है। इसलिए एक्सपर्ट चीनी से कई परेशानियों के बारे में बताते हैं लेकिन अब एक रिसर्च में पाया गया है कि चीनी अधिक खाने से मर्दों में यौन क्षमता पर जबर्दस्त असर पड़ता है।

2 घंटे के अंदर टेस्टोस्टेरोन की कमी
रिसर्च के मुताबिक बोस्टन के मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में पाया है कि चीना यानी ग्लूकोज लेने से पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन में कमी आती है। यह शोध क्लीनिकल एंडोक्रायनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें कहा गया कि 75 ग्राम चीनी लेने से टेस्टोस्टेरोन का स्तर दो घंटे तक 25 फीसदी कम हो जाता है। टेस्टोस्टेरोन पर ग्लूकोज के असर को जानने के लिए 19 से 74 वर्ष के 74 मर्दों को शामिल किया गया। सभी प्रतिभागियों का 75 ग्राम ग्लूकोज टॉलरेंस ब्लड टेस्ट किया गया। यह परीक्षण आरंभ में और फिर 30, 60, 90 और 120 मिनट बाद किया गया।
25 फीसदी तक घटा टेस्टोस्टेरोन
अध्ययन में कई बायोमार्कर मापे गए। जिनमें संभोग हार्मोन बाइंडिंग ग्लोब्युलिन SHBG भी शामिल था। SHBG का इस्तेमाल मर्दों में कम टेस्टोस्टेरोन की जांच के लिए किया जाता है।टेस्ट में शामिल मर्दों में से 57 फीसदी में ग्लूकोज टॉलरेंस सामान्य था। 30 फीसदी में ग्लूकोज टॉलरेंस गड़बड़ था और 13 फीसदी में नयी डायबिटीज पाई गई। नतीजों के विश्लेषण में पता चला कि ग्लूकोज लेने से टेस्टोस्टेरोन का स्तर 25 फीसदी घटा। यह कमी 120 मिनट बाद भी बनी रही। आरंभ में जिन 66 मर्दों का टेस्टोस्टेरोन सामान्य था, उनमें से कम से कम 10 में यह स्तर इतनी कमी के बाद हाइपोगोनाडल श्रेणी (कम टेस्टोस्टेरोन स्तर) में चला गया।
यानी यदि आप अधिक चीनी खाएंगे तो 2 घंटे के अंदर आपकी यौन क्षमता कमजोर होने लगेगी। मेल हाइपोगोनाडिज्म वह स्थिति है जब टेस्टिस पर्याप्त एंड्रोजन जैसे टेस्टोस्टेरोन नहीं बना पाते। इस स्थिति में कभी-कभी हार्मोन थेरेपी की आवश्यकता होती है। यह भी पाया गया कि ग्लूकोज का यह असर हर आदमी की ग्लूकोज टॉलरेंस या बीएमआई से अलग था। अध्ययन से यह संकेत मिला कि ग्लूकोज लेने से मर्दों में कुल टेस्टोस्टेरोन स्तर में जरूरी कमी आती है। यह असर ग्लूकोज टॉलरेंस के भिन्न-भिन्न स्तरों में लगभग समान रूप से देखा गया

