रूमेटॉयड अर्थराइटिस के जाने शुरुवाती लक्षण
What is Rheumatoid Arthritis: रूमेटॉयड अर्थराइटिस (आरए) लक्षण दिखने से कई वर्ष पहले ही प्रारम्भ हो जाते हैं और शरीर में फैलने लगते हैं। यह रोग जोड़ों में दर्द और सूजन पैदा करती है और धीरे-धीरे जोड़ों को हानि पहुंचाती है। इसका खुलासा वैज्ञानिकों ने अपने नए रिसर्च में किया। इस समाचार में हम आपको इस रोग के बारे में डीटेल में बताएंगे।

क्या है रूमेटॉयड अर्थराइटिस?
आरए एक ऐसी रोग है, जिसमें शरीर की सुरक्षा प्रणाली शरीर के ही जोड़ों पर धावा करने लगती है। इससे जोड़ों में सूजन आती है और वे कमजोर होकर कठिनाई पैदा करने लगते हैं। अब तक यह माना जाता था कि यह रोग तभी प्रारम्भ होती है, जब रोगी को जोड़ों में दर्द या सूजन महसूस हो, लेकिन नए शोध में पता चला है कि यह रोग शरीर में बहुत पहले प्रारम्भ हो जाती है, तब जब कोई भी लक्षण नजर नहीं आता।
साइंस ट्रांसलेशनल के शुरुआती स्टेज
साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन मीडिया में पब्लिश्ड इस नए रिसर्च से पता चलता है कि रोग के शुरुआती स्टेज में शरीर में सिर्फ़ जोड़ों की सूजन नहीं होती, बल्कि पूरे शरीर में एक तरह की सूजन फैल जाती है। यानी यह रोग केवल जोड़ों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करती है।
साइंस ट्रांसलेशनल पर किया गया रिसर्च
अमेरिकी एलन इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता मार्क गिलेस्पी ने कहा, “यह शोध डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को सहायता करेगा ताकि वे इस रोग को शीघ्र पकड़ सकें और समय रहते उपचार कर सकें।”
कैसे हुई स्टडी?
यह स्टडी सात वर्ष तक चला और इसमें उन लोगों को ट्रैक किया गया, जिनके खून में एसीपीए नाम के एंटीबॉडी पाए गए थे। ये एंटीबॉडी ऐसे संकेतक होते हैं, जो बताते हैं कि कोई आदमी आरए के खतरे में है या नहीं। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस दौरान कई नयी बातें सामने आईं, जिनमें शरीर में सूजन का फैलाव, इम्यून सेल्स की गड़बड़ी और सेल्स का काम करने का तरीका बदल जाना आदि शामिल हैं।
क्या हुआ रिजल्ट?
टीम ने पाया कि शरीर की कुछ खास इम्यून सेल्स, जैसे बी सेल्स, जो आमतौर पर संक्रमण से लड़ने वाले अच्छे एंटीबॉडी बनाते है। आरए के खतरे वाले लोगों में सूजन बढ़ाने वाले एंटीबॉडी बनाने लगे थे। वहीं, टी हेल्पर सेल्स की एक खास किस्म, टीएफएच17, भी सामान्य से बहुत अधिक बढ़ गई थी, जो सूजन को और बढ़ावा देती है। इसके अलावा, ‘नेव’ टी सेल्स में भी डीएनए स्तर पर परिवर्तन (एपिजेनेटिक बदलाव) पाए गए।
वाइट ब्लड सेल्स में भी परिवर्तन देखा गया
रिसर्च में यह भी देखा गया कि खून में उपस्थित मोनोसाइट्स नाम की वाइट ब्लड सेल्स भी असामान्य ढंग से अधिक सूजन पैदा कर रही थीं। ये सेल्स ठीक उन मैक्रोफेज जैसी थीं, जो आरए के रोगियों के जोड़ों में सूजन पैदा करते हैं, जिससे पता चलता है कि रोग जोड़ों को हानि पहुंचाने के लिए पहले से ही शरीर में तैयारी कर रही है।

