हर समस्या का समाधान है औषधीय गुणों से लबालब तबाशीर, इन रोगों में आता है काम
Tabasheer Ke Fayde: वंशलोचन, जिसे कई लोग तबाशीर भी कहते हैं, एक कुदरती तरीका है जो बांस के तने के अंदर से निकलता है। ये सफेद रंग का होता है और आमतौर पर पाउडर या छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में मिलता है। इसे ‘बैंबू मैनना’ (Bamboo Manna) या ‘बैंबू सिलाइसेस’ के नाम से भी जाना जाता है।

कहां होती है इसकी पैदावार?
इसका साइंटिफिक नेम ‘बैम्बुसा अरुंडिनेशिया’ (Bambusa arundinacea) है। ये आमतौर पर भारत, फिलीपींस, चीन जैसे एशियाई राष्ट्रों में व्यापक रूप से उगाया जाता है। खास तौर से इसका इस्तेमाल औषधीय गुणों के लिए किया जाता है। इसमें सिलिका की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो इसे कई स्वास्थ्य लाभों के लिए उपयोगी बनाती है। चरक संहिता और भैषज्य रत्नावली जैसे ग्रंथों में वंशलोचन को अनेक योगों में जगह दिया गया है, जैसे सितोपलादि चूर्ण, तालिसादि चूर्ण, वंशलोचनादि चूर्ण वगैरह।
इन परेशानियों में राहत का सबब
भैषज्य रत्नावली में वंशलोचन को वात और कफ शामक, पित्त वर्धक और बल्य (शक्तिवर्धक) माना गया है। इसका इस्तेमाल खांसी, जुकाम, बुखार, पाचन संबंधी समस्याओं, हड्डियों और दांतों की कमजोरी जैसे भिन्न-भिन्न कंडीशन के ट्रीटमेंट में किया जाता है। इसमें उपस्थित सिलिका हड्डियों को मजबूत बनाने और जोड़ों के दर्द को कम करने में सहायता करता है।
जलन शांत करता है
इसकी तासीर ठंडी होती है, इसलिए जिन लोगों के हाथ-पैर में जलन और हाथ में पसीना आता है, उनके लिए वंशलोचन काफी लाभ वाला है। ये पित्त को शांत करता है और शरीर के बाकी गुनाह जैसे कि वात, पित्त और कफ में संतुलन बनाए रखने में सहायता करता है।
सर्दी-जुकाम में आराम
चरक संहिता में इसे तबाशीर या तुगक्षीरी भी बोला गया है। इसका इस्तेमाल कई रोंगों के उपचार में किया जाता है, जैसे कि खांसी, जुकाम, बुखार, पाचन से जुड़ी परेशानियां, हड्डियों की कमजोरी, और स्किन डिजीज। सिलिका की अधिक मात्रा होने के कारण ये बालों को मजबूत बनाने में सहायता करता है।
मुंह के छाले करे दूर
अगर किसी को मुंह में छाले हैं, तो वो वंशलोचन को शहद में मिलाकर इस्तेमाल कर सकता है। दरअसल, मुंह में छाले अक्सर पेट की गर्मी बढ़ने के कारण होते हैं। वंशलोचन की तासीर ठंडी होती है, जो पेट की गर्मी को शांत करने में सहायता करती है। वहीं, शहद में उपस्थित एंटीबैक्टीरियल गुण मुंह के संक्रमण (इंफेक्शन) को कम करके छालों को शीघ्र ठीक करते हैं। लेकिन इसके सेवन से पहले किसी भी आयुर्वेदिक चिकित्सक से राय लेना महत्वपूर्ण है।

