मॉडर्न युवतियों में इन वजहों से बढ़ रहा बांझपन का खतरा
आज के समय में हिंदुस्तान में कई रोंगों का प्रकोप तेजी से फैल रहा है. इनमें हार्ट अटैक, डायबिटीज और कैंसर भी शामिल हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं राष्ट्र की स्त्रियों में बढ़ने वाली एक नयी परेशानी क्या है? यह Infertility यानी बांझपन है, जिसमें स्त्री के मां बनने की क्षमता कम हो जाती है. हालांकि, पहले यह परेशानी ज्यादातर उम्रदराज स्त्रियों में देखी जाती थी, लेकिन अब युवा महिलाएं भी इससे प्रभावित हो रही हैं. इस बढ़ती परेशानी के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें बदलती जीवनशैली, खान-पान की आदतें, मानसिक तनाव और हार्मोनल इंबैलेंस शामिल हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि समय रहते ठीक कदम न उठाए जाएं तो यह परेशानी और गंभीर हो सकती है. इस पर अमीरा शाह ने भी कई खुलासे किए हैं. चलिए जानते हैं इस बारे में सबकुछ.

क्या कहती हैं एक्सपर्ट?
मेट्रोपॉलिस की चेयरपर्सन अमीरा शाह बताती हैं कि इस समय हिंदुस्तान के लिए स्वास्थ्य के लिहाज से सबसे बड़ी चुनौती यदि कोई है, तो वह स्त्रियों में कम उम्र के अंदर ही इनफर्टिलिटी की परेशानी का बढ़ना है. अमीरा बताती हैं कि पहले 35 साल की उम्र की स्त्री को भी गर्भधारण करने के लिए हेल्दी माना जाता था लेकिन अब यदि कोई स्त्री 30 से ऊपर है और बेबी प्लान कर रही है, तो उसे कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. आगे चलकर उम्र का यह फैक्टर और भी कम हुआ तो यह एक चिंताजनक विषय है.
क्या हैं कारण?
1. कैफीन और अल्कोहल का सेवन
कॉफी, चाय, सॉफ्ट ड्रिंक्स और अल्कोहल का सेवन भी स्त्रियों की फर्टिलिटी को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है. कैफीन और अल्कोहल शरीर में हार्मोनल चेंजिस ला सकता है, जिससे Ovulation पर असर पड़ता है और इससे गर्भधारण करने में मुश्किलें आती हैं. स्त्रियों में शराब पीने का चलन वो भी कम उम्र में काफी हद तक बढ़ गया है.
2. धूम्रपान
आजकल लड़कियां यंग एज में ही धूम्रपान करने की आदी हो जाती हैं, जिससे निकल पाना उनके लिए काफी प्रॉब्लमेटिक हो जाता है. सिगरेट में उपस्थित निकोटीन और अन्य नुकसानदायक तत्व स्त्री की प्रजनन गुणवत्ता को हानि पहुंचाते हैं. इसके अलावा, बड़े शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण भी प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर डाल रहा है.
3. अनहेल्दी लाइफस्टाइल
मॉडर्न लाइफस्टाइल ने स्त्रियों की प्रजनन क्षमता पर गहरा असर डाला है. देर रात तक जागना, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों की कमी होने से हार्मोनल इंबैलेंस की परेशानी बढ़ सकती है, जिससे Ovulation की परेशानी पैदा होती है. विवाह से पहले शारीरिक संबंध बनाना भी कॉमन हो गया है, जिसमें कई बार अनचाही प्रेग्नेंसी हो जाती है, जिसे नष्ट करने के लिए मेडिसिन्स ली जाती है, जो एक और बड़ा फैक्टर है कम उम्र की स्त्रियों में गर्भवती न होने का.
4. देर से शादी
अमीरा के अनुसार, महिलाएं करियर और शिक्षा को अहमियत देती हैं, इस वजह से वे देर से विवाह कर रही हैं और मां बनने की योजना को टालती रहती हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, 30-35 वर्ष की उम्र के बाद स्त्रियों की फर्टिलिटी कम होने लगती है, जिससे गर्भधारण में परेशानी आ सकती है.
5. PCOS
बहुत सारी युवा महिलाएं आजकल पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी की PCOS से जूझ रही हैं. यह एक हार्मोनल हेल्थ इश्यू है, जिसमें Ovaries में सिस्ट बनने लगते हैं, जिससे अनियमित पीरियड्स और ओव्यूलेशन में परेशानी होती है. PCOS से पीड़ित स्त्रियों में इनफर्टिलिटी की आसार बढ़ जाती है. इस परेशानी का मुख्य कारण खराब खान-पान और जेनेटिक्स भी है.
कैसे बचा जा सकता है इस परेशानी से?
- अपनी डाइट में फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर खाने का सेवन बढ़ाएं.
- लाइफस्टाइल हैबिट्स को सुधारें.
- स्मोकिंग, ड्रिंकिंग जैसी चीजों से परहेज करें. यदि स्वयं से न हो पाए, तो मेडिकल हेल्प लें.
- PCOS की परेशानी है तो चिकित्सक की राय लें और ठीक उपचार करें.
- अगर संभव हो तो 25-30 साल की उम्र के बीच प्रेग्नेंसी प्लान करें.
- आजकल एग फ्रीजिंग भी नया और बेहतरीन विकल्प है. आप इसकी सहायता भी ले सकते हैं.

