Yoga Asanas For PCOD-PCOS : पीसीओएस और पीसीओडी स्त्रियों में अंडाशय से जुड़ी स्थितियां है. पीसीओडी या पीसीओएस आजकल स्त्रियों में बहुत आम स्वास्थ्य परेशानी बन चुकी है. इस स्थिति में हार्मोन असंतुलन के कारण पीरियड्स अनियमित हो जाते है. वजन बढ़ना, चेहरे पर अनचाहे बाल आना, पीसीओएस या पीसीओडी के लक्षण हैं. इसमें प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ सकता है. जीवनशैली में परिवर्तन लाकर जैसे वजन कम करके, स्वस्थ आहार का सेवन, नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन से इस परेशानी से छुटकारा पाया जा सकता है.

योग एक प्राकृतिक और कारगर तरीका है जो हार्मोन संतुलन को बढ़ाने में सहायक है. योग के अभ्यास से तनाव कम होता है और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है. कुछ योगासन हैं जो पीसीओडी या पीसीओएस की परेशानी से राहत दिलाने में सहायता कर सकता है. यहां पीसीओडी और पीसीओएस के लक्षणों को कम करने के लिए कुछ प्रभावशाली योगासनों क बारे में कहा जा रहा है.
बद्ध कोणासन
बद्ध कोणासन जिसे अंग्रेजी में बटरफ्लाई पोज भी बोला जाता है, पेल्विक एरिया के रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है जो प्रजनन स्वास्थ्य के लिए अच्छा है. इस आसन के अभ्यास से ओवरीज की सक्रियता बढ़ती है और अनियमित पीरियड्स को ठीक करने में सहायता मिलती है. बद्ध कोणासन के अभ्यास के लिए जमीन पर बैठकर दोनों पैरों के तलवों को आपस में जोड़ें और घुटनों को बाहर की ओर खोलें. एड़ियों को पकड़कर पीठ सीधी रखें और हल्के-हल्के पैरों को ऊपर-नीचे हिलाएं.
भुजंगासन
मासिक धर्म की अनियमितता, प्रजनन क्षमता बढ़ाने और स्त्री स्वास्थ्य से जुड़ी पीसीओएस और पीसीओडी की परेशानी में भुजंगासन का अभ्यास करना लाभ वाला हो सकता है. यह आसन प्रजनन अंगों को उत्तेजित करता है और पीठ, पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है. इसके अभ्यास के लिए पेट के बल लेटकर हथेलियों को कंधों के पास रखें. धीरे-धीरे सिर और छाती को ऊपर उठाकर पीठ को पीछे की ओर मोड़ें. कुछ सेकंड इसी मुद्रा में रहें और फिर धीरे-धीरे वापस आएं.
सेतुबंधासन
सेतुबंधासन के अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़े. पैरों को हिप्स के पास रखते हुए धीरे-धीरे कूल्हे को ऊपर उठाएं और हाथों को जमीन पर टिकाकर शरीर का सहारा दें. इस आसन का नियमित अभ्यास हार्मोन ग्रंथियों को उत्तेजित करता है, थायराइड और ओवरीज़ की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और तनाव कम करता है.