शरीर के अंदर मौजूद गंदे मांस को झट से साफ कर देती है यह जादुई दाल
Dal which eats ‘human flesh’: क्या आपको पता है कि एक दाल ऐसी है जो इंसानों का मांस खाती है? है ना चौंकाने वाली बात। यह प्रश्न एक बार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के साक्षात्कार में भी पूछा जा चुका है। लेकिन यह प्रश्न है तो दिलचस्प। क्योंकि इसकी खास बात यह है कि ये दाल सबसे पौष्टिक और सुपाच्य मानी गई है। इसीलिए रोगी से लेकर बच्चों तक को दी जाती है। जब ये दाल पोषण से भरपूर और हेल्दी मानी जाती है तो ये मांस खाने वाली दाल कैसे हुई? पहले ये जान लेते हैं कि ये दाल है कौन सी?

दरअसल ये हरी मूंग की दाल है जो आमतौर पर सभी घरों में खायी जाती है। इसे पोषक तत्वों का खजाना माना जाता है। लेकिन ये आदमी का मांस खाती है, इस तथ्य को समझना महत्वपूर्ण है। हरी मूंग की दाल में एक खास प्रजाति का प्रोटीन पाया जाता है, जिसे ‘प्रोटियोलिटिक एंजाइम्स’ बोला जाता है। ये एंजाइम्स हमारी पाचन क्रिया को बेहचर बनाने में सहायता करते हैं। इनका मुख्य काम शरीर से अशुद्ध तत्वों और गंदे मांस को निकालना है। जो शरीर में जमी हुई चर्बी और मृत कोशिकाओं के रूप में होता है।
वजन कम करने में मददगार
इसीलिए जब बोला जाता है कि मूंग की दाल ‘इंसान का मांस खाती है’ तो इसका वाकई ये अर्थ नहीं है कि ये असल में किसी का मांस खा रही होती है। इस बात को मुहावरे के तौर पर कहा जाता है। इसका वास्तविक अर्थ यह है कि मूंग की दाल शरीर के अंदर जमा विषैले तत्वों, अवशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त चर्बी को समाप्त करने का काम करती है। इस दाल को वेट लॉस के लिए बेस्ट माना जाता है। इसका सेवन करने वालों का शरीर स्वस्थ रहता है। यह दाल ना सिर्फ़ वजन कम करने में सहायता करती है, बल्कि हाई ब्लडप्रेशर, पाचन संबंधी समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को भी कंट्रोल करती है।
शाकाहारियों के लिए फायदेमंद
भले ही कितना बोला जाए कि ये ‘इंसान का मांस खाती है’, वेजेटेरियन खाने वालों के लिए इसका खास महत्व है। ये वेजेटेरियन भोजन का खास हिस्सा है। क्योंकि शाकाहारियों के लिए मूंग की दाल प्रोटीन का बेहतरीन सोर्स है। इसलिए मूंग की दाल को अपने भोजन में शामिल करना स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत लाभ वाला होता है। मांस खाने के दावे के बावजूद ये दाल पूरी तरह से शाकाहारी है और वेजेटेरियन के लिए बिल्कुल सुरक्षित और फायदेमंद है। हरी मूंग की दाल में पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है। इसको खाने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है।
और क्या क्या मिलते हैं लाभ
मूंग की दाल का सेवन करने वालों का शरीर सुडौल रहता है और उनका पाचन तंत्र भी मजबूत बनता है। इसमें उपस्थित फाइबर की वजह से पेट भरा हुआ लगता है और अधिक खाने की आदत कम हो जाती है। इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे खनिज होते हैं, जो हाई ब्लडप्रेशर को संतुलित रखने में सहायक होते हैं। पौष्टिक और सुपाच्य होने की वजह से मूंग की दाल बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए आदर्श आहार है। यह सभी उम्र के लोगों के लिए मुफीद है।
नागौर में होती है सबसे अधिक पैदावार
मूंग की दाल की फसल सबसे अधिक राजस्थान में उगाई जाती है। लेकिन राजस्थान में नागौर पहले नंबर पर है। राजस्थान की कुल मूंग उत्पादन में से 43 प्रतिशत हिस्सा अकेले नागौर जिले में पैदा होता है। नागौर जिले में एक वर्ष में 12 लाख, 62 हजार हेक्टेयर के करीब क्षेत्रफल में खरीफ की फसल पैदा की जाती है। जिसमें एक वर्ष में 6,26,633 हेक्टेयर में मूंग की खेती की जाती है। नागौर जिले में सबसे अधिक मूंग की खेती मेड़ता, रियां, डेगाना, मारवाड़, मूंडवा, जायल, और परबतसर तहसील के कुछ इलाकों में होती है। मूंग दाल की खेती के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है। यह रेतीली मिट्टी में भी अच्छी तरह से उगती है।
प्राचीनकाल से ही हिंदुस्तान में मौजूद
मूंग की दाल हिंदुस्तान में प्राचीन काल से ही उगाई जा रही है। बोला जाता है कि इसकी खोज करीब चार हजार वर्ष पहले वर्तमान कर्नाटक के क्षेत्र में हुई थी। मूंग दाल का वानस्पतिक नाम बिगना रेडिएटा है। यह लेग्यूमिनेसी कुल का पौधा है। मूंग दाल प्राचीन काल से ही भारतीय भोजन का एक अहम हिस्सा रही है। आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में मूंग दाल का उल्लेख मिलता है। बौद्ध साहित्य में भी मूंग दाल का जिक्र मिलता है। मूंग दाल की खेती और इस्तेमाल बाद में दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन तक फैल गया।

