यह पौधा खांसी के मरीजों के लिए है वरदान
जयपुर:- प्रकृति में ऐसे अनेकों पेड़ पौधे पाए जाते हैं, जो मानव शरीर के लिए बहुत लाभ वाला होते हैं। ऐसा ही एक पौधा है भटकटैया, यह पौधा पथरीली और बंजर जमीन पर अधिक मात्रा में पाया जाता है। आयुर्वेद में इसे कंटकारी के नाम जाना जाता है। खरपतवार के रूप में उगने वाला यह पौधा आयुर्वेद में बहुत उपयोगी है।
आयुर्वेदाचार्य डाक्टर वीरेंद्र कुमार शास्त्री ने लोकल 18 को कहा कि छोटे पतले पत्ते और चारों और कांटे वाले भटकटैया पौधा शुष्क जलवायु में उगने वाला पौधा है। राजस्थान की जलवायु इस पौधे के अनुकूल है। आयुर्वेदाचार्य ने कहा कि इस पौधे को रोगों को भगाने वाला पौधा बोला गया है। यह पौधा खांसी के रोगियों के लिए वरदान है। पुरानी से पुरानी खांसी का उपचार इस पौधे से ही संभव होता है।
भटकटैया का काढ़ा रामबाण औषधि
आयुर्वेदाचार्य डाक्टर वीरेंद्र कुमार शास्त्री ने कहा कि भटकटैया का काढ़ा पुरानी से पुरानी खांसी के रोगियों के उपचार में रामबाण होती है। इसके काढ़ा बनाने की विधि बहुत सरल है। काढ़ा बनाने के लिए सबसे पहले इस पौधे के जड़, तनाव, फल, फूल को अच्छी तरह से धोने के बाद बड़े बर्तन में इसे धीमी आंच पर दो से चार घंटे तक पकाएं। इसके पकाने के बाद जब मात्र एक तिहाई पानी बस जाता है, तो इसे कांच के गिलास या बोतल में भर लेते हैं और गाड़ी के रूप में पिया जाता है।
भटकटैया के औषधीय इस्तेमाल
भटकटैया एक औषधीय पौधा है। इसका इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने के लिए लंबे समय से किया जा रहा है। आयुर्वेदाचार्य डाक्टर वीरेंद्र कुमार शास्त्री ने Local 18 को कहा कि सूखी या बलगम वाली खांसी, अस्थमा संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए रामबाण औषधि माना जाता है। इसके सेवन से पुरानी खांसी भी ठीक हो जाती है। इसके अतिरिक्त इसके काढ़ा का सेवन करने से बुखार और शरीर के दर्द में राहत मिलता है। इसका सेवन शरीर के दर्द को दूर करने में सहायक माना गया है।
इसके अतिरिक्त पेट दर्द, गैस और अपच जैसी पेट की समस्याओं से छुटकारा दिलाने में सहायक माना होता है। चिकित्सक ने कहा कि भटकटैया के बीजों का धुआं या काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से दांत दर्द में तुरंत राहत मिलती है। इसके सेवन से मुंह के छाले भी ठीक होते हैं। इसके अतिरिक्त मूत्राशय की पथरी के उपचार में भी उपयोगी माना जाता है। इसके सेवन से पथरी के दर्द में तुरंत आराम मिलता है।

