दांतों की देखभाल के लिए ये सरल घरेलू उपाय है प्रभावी
नई दिल्ली, 23 सितंबर . दांत हमारे शरीर का एक जरूरी हिस्सा हैं. दांतों की मुख्य किरदार भोजन को चबाने, पचाने योग्य बनाने और बोलने में सहायता करने की है. दांतों के बिना न तो ठीक से खाना चबाया जा सकता है और न ही शब्दों को ठीक ढंग से उच्चारित किया जा सकता है. यही कारण है कि दांत न सिर्फ़ हमारे स्वास्थ्य के लिए, बल्कि हमारे आत्मविश्वास और चेहरे की संरचना के लिए भी बहुत जरूरी हैं.

दांतों के बिना मुस्कान अधूरी रहती है और ठीक दांतों से चेहरा सुन्दर और सुंदर दिखता है. इसके अलावा, दांतों का स्वास्थ्य शरीर के समग्र स्वास्थ्य से भी जुड़ा होता है, क्योंकि मसूड़े और दांतों की बीमारियां रक्त प्रवाह और दिल रोगों से जुड़ी हो सकती हैं.
दांतों का निर्माण गर्भावस्था के शुरुआती दौर से ही प्रारम्भ हो जाता है, और उनका विकास जीवन भर चलता है. दांतों के निर्माण की प्रक्रिया में सबसे पहले भ्रूण हालत में दांतों की नींव पड़ती है, और जन्म के बाद लगभग 6-8 महीने में बच्चे के मुंह में पहला दूध का दांत आता है. एक आदमी के वयस्क होने तक कुल 32 स्थायी दांत निकलते हैं, जिनमें 4 आगर, 8 इंसिसर, 4 कस्टल, और 12 मोलर (अक्ल दाढ़ भी शामिल) होते हैं. दांत की संरचना में सबसे बाहरी परत एनामेल होती है, जो शरीर की सबसे मजबूत सामग्री मानी जाती है, इसके नीचे डेंटिन और सबसे भीतरी भाग पल्प होता है, जिसमें रक्त वाहिकाएं और नसें उपस्थित रहती हैं.
दांतों की देखभाल न करना अनेक समस्याओं का कारण बन सकता है, जैसे कैविटी, मसूड़ों की सूजन, पायरिया और दांतों का पीलापन. इन रोंगों का मुख्य कारण ठीक ढंग से दांतों की सफाई न करना है. साथ ही अस्वास्थ्यकर आहार जैसे अत्यधिक मीठे और तैलीय खाद्य पदार्थों का सेवन भी दांतों को खराब कर सकता है.
आयुर्वेद में दांतों को अस्थि धातु का हिस्सा माना गया है और इसके स्वास्थ्य को वात, पित्त और कफ के संतुलन से जोड़ा गया है. प्राचीन काल से ही नीम की दातुन और अर्जुन की छाल को दांतों को मजबूत करने के लिए उपयोगी माना जाता है. आयुर्वेद में गंडूष और कवल (तेल खींचना) को भी दांतों के लिए लाभ वाला माना जाता है, जो मसूड़ों को स्वस्थ रखने में सहायता करता है.
दांतों की देखभाल के लिए कुछ सरल घरेलू तरीका भी कारगर हो सकते हैं, जैसे दिन में दो बार ब्रश करना, सेंधा नमक और सरसों ऑयल से मसूड़ों की मालिश करना, नीम की दातुन का इस्तेमाल करना और गर्म पानी में नमक डालकर कुल्ला करना. कैल्शियम और विटामिन डी का सेवन भी दांतों और हड्डियों की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण होता है, और इसके लिए दूध, दही, पनीर और धूप का सेवन किया जा सकता है.
इसके अलावा, तंबाकू और अधिक मीठे खाद्य पदार्थों से बचने की राय दी जाती है, क्योंकि ये दांतों को हानि पहुंचा सकते हैं.
दांतों का रंग और उनकी स्थिति हमारे स्वास्थ्य के बारे में बहुत कुछ बता सकते हैं. उदाहरण के लिए, पीले दांत कमजोर इनेमल का संकेत हो सकते हैं, जबकि दांतों का दर्द सिर या कान में भी महसूस हो सकता है, क्योंकि दांत सीधे नसों से जुड़े होते हैं. जीवनभर दांत एक ही आकार के रहते हैं, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ मसूड़े और हड्डियां सिकुड़ सकती हैं, जिससे दांत बड़े दिख सकते हैं. यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जो शरीर के विकास और उम्र के साथ होती है.

