महिलाओं के लिए वरदान होता है यह टीकाकरण, जानें कारण
महिलाओं में एक विशेष प्रकार की गंभीर रोग होने का खतरा बना रहता है। इस रोग का नाम है सर्वाइकल कैंसर। सावधानी, जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा बचाव है। समय पर टीकाकरण हो जाए तो इस गंभीर रोग से बचा जा सकता है। जागरूकता बढ़े इसके लिए कन्नौज मुख्य चिकित्सा अधिकारी चिकित्सक स्वदेश गुप्ता, अपर जिला न्यायधीश लवली जायसवाल और जिला विद्यालय निरीक्षक चिकित्सक पूरन सिंह की अध्यक्षता में वर्ल्ड सर्वाइकल कैंसर बहिष्कार दिवस कार्यक्रम का आयोजन सुशीला देवी गर्ल्स इंटर कॉलेज में किया गया। यहां पर सभी ऑफिसरों ने बच्चियों को इस गंभीर रोग से सावधान रहने के बारे में कहा और इससे कैसे बचा जाए इसके बारे में भी सतर्क किया।

क्या होती यह बीमारी
महिलाओं से जुड़ी यह एक गंभीर रोग होती है। यह रोग 30 साल की उम्र के बाद अपना मुख्य रूप धारण करती है। यदि एक बार यह रोग हो गई तो इसको संभाल पाना बहुत ही कठिन होता है। महावारी के समय कई तरह की समस्याएं एवं टॉयलेट की नली में दर्द की समस्या, वजाइना से अक्सर व्हाइट लिक्विड बदबूदार डिस्चार्ज होना इत्यादि इसके लक्षण होते हैं। प्राय यह रोग बहुत कम ही स्त्रियों को होती है, लेकिन यह एक अति गंभीर रोग है जिसका निवारण केवल जागरूकता और सावधानी है।
कैसे करें बचाव
इस गंभीर रोग से बचने के लिए 9 से 14 वर्ष की उम्र में 6 महीने के अंतराल पर एचपीवी नामक वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए। यदि 14 वर्ष की उम्र तक यह वैक्सीन नहीं लगी है तो 24, 25 या 30 वर्ष की उम्र तक भी यह वैक्सीन लगवाई जा सकती है क्योंकि यह रोग 30 वर्ष की उम्र के बाद ही अपना गंभीर रूप लेती है। ऐसे में समय रहते ही यदि वैक्सीनेशन हो जाता है तो इससे बचा जा सकता है। स्त्रियों को 30 वर्ष की उम्र के बाद हर तीन-तीन वर्ष के अंतराल पर पैप स्मीयर जांच जरूर करनी चाहिए। बार-बार गर्भधारण करने से भी स्त्रियों को बचाना चाहिए, यदि माहवारी के समय किसी तरह की कोई परेशानी आ रही है तो तुरन्त चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
क्या कहे सीएमओ
सीएमओ चिकित्सक स्वदेश गुप्ता ने कहा कि आज वार्ड सर्वाइकल बहिष्कार दिवस कार्यक्रम का आयोजन सुशीला देवी गर्ल्स इंटर कॉलेज में कराया गया था। यहां पर बच्चियों के लिए सर्वाइकल कैंसर को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया है। यहां पर उनको कहा गया है कि यह परेशानी कैसे होती है। इसमें 9 से 14 वर्ष के बीच में एक टीका लगता है, वह जरूर लगवाना चाहिए। यदि किसी बच्ची को ना लगा है तो वह अपने घरों में जाएं और अपने माता-पिता को इस रोग से संबंधित परेशानी से अवगत कराएं और टीकाकरण करवाएं।
क्या बोलीं अपर जिला जज
अपर जिला न्यायधीश लवली जायसवाल ने कहा कि जागरूकता के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चियों को या उनके घर वालों को इस गंभीर रोग के बारे में जानकारी नहीं हो पाती है, इस तरह के जागरुकता प्रोग्राम से हम लोग इस रोग को जड़ से उखाड़ फेंकने में सफल होंगे। स्त्रियों में होने वाली यह एक अति गंभीर रोग होती है। ऐसे में इस तरह के प्रोग्राम से बच्चियों को जागरूकता मिलेगी और हम लोग प्रयास करेंगे कि उनके परिजन भी इस चीज को समझें और समय रहते टीकाकरण करा कर इस परेशानी का निवारण पाएं।

