गर्मियों में महिलाओं को कौन सी परेशानियां होती हैं अधिक…
Female Health Issue in Summer: गर्मियों का मौसम अपने साथ कई चुनौतियों को लेकर आती है। इस मौसम में तमाम ऐसी बीमारियां हैं जो आपको सरलता से शिकार बना सकती हैं। खासकर स्त्रियों को। इसलिए स्थिति के मुताबिक अपने हेल्थकेयर रुटीन में परिवर्तन की भी आवश्यकता होती है। चिकित्सक की मानें तो, गर्मियों में फीमेल प्रॉब्लम्स, डिहाइड्रेशन, इन्फेक्शन, त्वचा संबंधी समस्याएं सामान्य दिनों के मुकाबले अधिक देखने को मिलती हैं। ऐसी स्थिति में स्त्रियों को विशेष सावधानी बतरने की जरूरत है।

गर्मियों में होने वाली ये बीमारियां वैसे तो काफी सामान्य होती हैं, लेकिन यदि इन रोंगों का समय पर ध्यान और उपचार नहीं कराया गया, तो इससे कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। अब प्रश्न है कि आखिर गर्मियों में स्त्रियों को कौन सी परेशानियां अधिक होती हैं? गर्मी में होने वाली फीमेल प्रॉब्लम्स से कैसे करें बचाव? इस बारे में News18 को बता रही हैं नोएडा के सीएचसी भंगेल में सीनियर मेडिकल ऑफिसर एवं गायनेकोलॉजिस्ट (सर्जन) डाक्टर मीरा पाठक-
गर्मियों में स्त्रियों को होने वाली परेशानियां
1. स्किन रैशेज: डाक्टर पाठक बताती हैं कि, गर्मियों में स्त्रियों की स्किन काफी सेंसिटिव हो जाती है। इससे उन्हें स्किन से जुड़ी समस्याओं का अधिक सामना करना पड़ता है। खासकर टाइट अंडर गारमेंट्स की वजह से बिकनी लाइन रैशेज की परेशानी लगभग हर स्त्री को झेलनी पड़ती है। बता दें कि, इस एरिया में पसीना अधिक इकट्ठा होता है और फिर सूख भी नहीं पाता है। इससे स्किन में रैशेज आने लगते हैं।
ऐसे करें बचाव: स्किन रैशेज से बचने के लिए कॉटन के लाइट और ढीले कपड़े पहनें। इसके अलावा, स्त्रियों के बाल बंधे होने से सिर में पसीना इकट्ठा होता है, जिससे बाल चिपचिपे हो जाते हैं। इससे स्कैल्प में खुजली और रूसी के साथ हेयरफॉल की कठिनाई बढ़ती हैं। ऐसे में बालों को 2-3 दिन में धोते रहें।
2. वजाइनल बर्न: स्त्रियों को गर्मी में वजाइनल बर्न की परेशानी भी देखी जाती है। एक्सपर्ट की मानें तो, ऐसा बैक्टीरियल इन्फेक्शंस और पानी की कमी के कारण हो सकता है। यह परेशानी उन स्त्रियों में अधिक देखने को मिलती हैं जो कैफीन का अधिक मात्रा में करती हैं। दरअसल, कैफीन शरीर में जाने से शरीर में उपस्थित पानी सोखता है। इससे यूरिन अधिक कन्सन्ट्रेट हो जाता है और उसका रंग भी गहरा होने लगता है।
ऐसे करें बचाव: यदि किसी स्त्री में वजाइनल बर्न से जुड़ा कोई भी लक्षण दिखे तो अपने डायट में लिक्विड की मात्रा तुरंत बढ़ा देनी चाहिए। इसके साथ ही गर्मी के मौसम में जहां तक संभव हो चाय या कॉफी का सेवन कम से कम करना चाहिए। हीट रैशेज से बचने के लिए दिन में कम से कम दो बार जरूर नहाएं। ऐसा करने से रोग से बचाव संभव है।
3. हॉट फ्लैशेज: एक्सपर्ट के मुताबिक, यह परेशानी उन स्त्रियों में देखने को मिलती है, जो मेनोपॉज के दौर से गुजर रही होती हैं। उनके चेहरे, गर्दन और छाती के आसपास के एरिया में तेज गर्मी महसूस होती है। इसके अलावा, थकान, धड़कनों का असामान्य हो जाना, अपर बॉडी में अचानक तेज पसीना आने लगना जैसी चीजें देखने को मिलती हैं।
ऐसे करें बचाव: स्त्रियों में हॉट फ्लैशेज की परेशानी गर्मियों में अधिक बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए अधिक से अधिक हेल्दी लिक्विड जैसे नारियल पानी, मौसमी फलों का जूस आदि पीते रहना चाहिए।
4. डिहाइड्रेशन: गर्मियों में यह परेशानी महिला-पुरुष दोनों में समान रूप से देखी जाती है, लेकिन स्त्रियों में डिहाइड्रेशन कई बार और भी बड़ी समस्याओं को जन्म देने लगता है। पानी की कमी से कई तरह के संक्रमण का खतरा बढ़ने लगता है। खासकर इससे स्त्रियों में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआइ) की परेशानी होने आम बात है।
ऐसे करें बचाव: गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन का जोखिम अधिक बढ़ता है। इससे बचने के लिए स्त्रियों को अधिक से पानी पीने की आदत डालनी चाहिए और अपने जेनिटल हाइजीन का भी खास ख्याल रखना चाहिए।

