कड़ाके की ठंड के बीच कारगिल और लेह में सैंकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर हुए एकजुट
केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख शनिवार को बंद रहा और लेह में एक विशाल रैली निकाली गई। ऐसा लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के अनुसार सुरक्षा की मांग को लेकर हुआ। हालांकि, केंद्र गवर्नमेंट इसे लेकर वार्ता के दूसरे दौर का घोषणा कर चुकी है।

शनिवार को हड्डियां कंपा देने वाली ठंड के बीच कारगिल और लेह में सैंकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर एकजुट हुए। इस प्रदर्शन का आह्वान इस आरंभ में किया गया था। बीते शुक्रवार को केंद्र ने घोषणा किया था कि गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति मांगों को लेकर दूसरे दौर की बैठक करेगी।
इन 4 मांगों को लेकर प्रदर्शन
लद्दाख पहले जम्मू और कश्मीर का हिस्सा हुआ करता था। 31 अक्टूबर 2019 को इसे केंद्रशासित प्रदेश घोषित किया गया था। इस प्रदर्शन की प्रतिनिधित्व एपेक्स बॉडी लेह (एबीएल) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) नामक सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने की थी। इन संगठनों की 4 मुख्य मांगें हैं।
1. लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए
2. संविधान की छठी अनुसूची के अनुसार सुरक्षा
3. लद्दाख के युवाओं के लिए नौकरियों में आरक्षण
4. लेह और कारगिल के लिए भिन्न-भिन्न संसदीय क्षेत्र
19 फरवरी को है दूसरी बैठक
इन मांगों को लेकर वार्ता का पहला दौर 4 दिसंबर 2023 को हुआ था। इसे लेकर गृह मंत्रालय ने जो समिति बनाई है उसकी अध्यक्षता गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय कर रहे हैं। इस बैठक में उन्होंने लद्दाख की अनोखी संस्कृति और भाषा की सुरक्षा करने के लिए महत्वपूर्ण मानकों पर विचार-विमर्श किया था।
अब इसे लेकर दूसरे दौर की वार्ता 19 फरवरी को होनी है। क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने परमानेंट रेसीडेंट सर्टिफिकेट (पीआरसी) की तरह लद्दाख रेसीडेंट सर्टिफिटेक प्रारम्भ किए जाने की मांग भी की है। पीआरसी पहले जम्मू और कश्मीर में जारी किए जाते थे। गवर्नमेंट ने संगठनों से प्रदर्शन रोकने की अपील की है।

