अजरबैजान ने किया BRICS की सदस्यता के लिए आवेदन
BRICS Member Countries: वैश्विक स्थितियों में परिवर्तन के चलते, विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के समूह BRICS में दिलचस्पी बढ़ रही है। पूर्वी यूरोप और एशिया के बीच बसे अजरबैजान ने BRICS की सदस्यता के लिए आवेदन किया है। दिलचस्प बात यह कि अजरबैजान का आवेदन, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यात्रा के ठीक अगले दिन आया है। 1991 तक दक्षिणी कॉकेशस का यह राष्ट्र सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था।

BRICS में कौन-कौन से राष्ट्र शामिल हैं?
ब्रिक्स में एक दशक से अधिक समय तक केवल पांच राष्ट्र शामिल थे- ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका। जनवरी 2024 में ईरान, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) इसमें शामिल हुए। सऊदी अरब ने बोला है कि वह भी इसमें शामिल होने पर विचार कर रहा है।
अजरबैजान के पास ऑयल का बड़ा भंडार है। ब्रिक्स समूह में पहले से ही वे राष्ट्र शामिल हैं जिनके पास ऑयल के बड़े भंडार हैं। विश्व के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का एक चौथाई से अधिक हिस्सा उन राष्ट्रों में शामिल है जो BRICS का हिस्सा हैं। BRICS तेजी से एक ऐसा गुट बनता जा रहा है जो एक नयी विश्व प्रबंध की रूपरेखा तैयार कर रहा है।
अजरबैजान पर क्यों मेहरबान हैं पुतिन?
पुतिन की हालिया यात्रा ने यह सुनिश्चित किया कि रूस के अजरबैजान के साथ क्षेत्रीय संबंध सुरक्षित रहें। रूस यह भी चाहता था कि संकट के समय में भी अजरबैजान के माध्यम से मास्को के व्यापार मार्ग बरकरार रहें। अजरबैजानी के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने पुतिन से मुलाकात के दौरान घोषणा की कि रूस के साथ माल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए 120 मिलियन $ निर्धारित किए गए हैं।
एसोसिएटेड प्रेस ने पॉलिटिकल साइंटिस्ट जरदुश्त अलीजादे के हवाले से बोला कि रूस को अजरबैजान जैसे राष्ट्रों के साथ संबंध बनाए रखने होंगे। क्योंकि क्षेत्रीय युद्ध में यूक्रेन के विरुद्ध कार्रवाई के चलते पश्चिम ने मास्को पर विभिन्न व्यापार प्रतिबंध लगाए हैं, इस वजह से रूस को वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने के लिए इन राष्ट्रों की आवश्यकता है।

