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क्या पद से कदम पीछे ले सकते हैं पोप…

पोप फ्रांसिस की तबीयत बिगड़ी हुई है. 88 वर्ष की उम्र में वह स्वास्थ्य संबंधी गंभीर दिक्कतों से जूझ रहे हैं. वह रोम के हॉस्पिटल में हैं. उन्हें दोहरा निमोनिया हुआ है. सांस लेने में परेशानी हो रही है. उनकी मौजूदा तबीयत और उम्र को देखते हुए ये भी अटकलें लग रही हैं कि क्या वह अपने पद को छोड़ सकते हैं. क्या आपको मालूम है कि वेटिकन सिटी के पोप कैसे त्याग-पत्र देते हैं. उसके बाद नए पोप का चयन कैसे होता है.

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वेटिकन सिटी लगातार बुलेटिन के जरिए उनके स्वास्थ्य के बारे में बता रहा है लेकिन वो ये बताने में असमर्थ है कि पोप फ्रांसिस कब स्वस्थ होकर हॉस्पिटल से लौट आएंगे.

कैथोलिक चर्च के 2000 वर्ष के इतिहास में बहुत कम पोपों ने स्वेच्छा से त्याग-पत्र दिया है. अब तक सिर्फ़ चार पोप ने ऐसा किया है. उसमें ताजातरीन उदाहरण पोप बेनेडिक्ट XVI का है. जिन्होंने साल 2005 में पोप का पद संभालने के बाद 2013 में स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के कारण 600 वर्षों में पहली बार त्याग-पत्र दिया था. इस्तीफे के बाद उन्हें “पोप एमेरिटस” की उपाधि दी गई.

इससे पहले पोप ग्रेगरी XII (वर्ष 1415), पोप सेलस्टाइन V (1294) और पोप बेनेडिक्ट (1045) ने स्वैच्छा से पद छोड़ा. सबके इस्तीफों की वजह भिन्न भिन्न थी. पोप ग्रेगरी ने चर्च में कई पोप (Western Schism) होने के कारण त्याग-पत्र दिया. उनके इस्तीफे से चर्च में एकता स्थापित हुई.

पोप सेलस्टाइन ने पद पर सिर्फ़ 5 महीने रहने के बाद ही पद छोड़ा. उन्होंने साधु-संन्यासी जीवन के प्रति झुकाव और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से असमर्थता के कारण पद त्यागा. लेकिन पोप बेनेडिक्ट का त्याग-पत्र सबसे विवादित इस्तीफों में एक है. उन पर इल्जाम लगा कि उन्होंने इस पद को बेच दिया है.

कैसे देते हैं इस्तीफा
पोप (रोमन कैथोलिक चर्च के प्रमुख) के पद से त्याग-पत्र देने की प्रक्रिया को “रेन्यूंसिएशन” (Renunciation) बोला जाता है. पोप को अपने पद से त्याग-पत्र देने का फैसला स्वेच्छा से लेना होता है. यह फैसला आमतौर पर स्वास्थ्य, उम्र, या अन्य पर्सनल कारणों से लिया जाता है.

इस्तीफा उनकी औपचारिक घोषणा को मानते हैं
पोप को अपने इस्तीफे की औपचारिक घोषणा करनी होती है. यह घोषणा लिखित रूप में होती है. इसे कैनन लॉ (चर्च का कानून) के मुताबिक तैयार किया जाता है. घोषणा में इस्तीफे का कारण और तारीख साफ रूप से बताई जाती है.

कैनन लॉ (Canon 332 §2) कहता है कि त्याग-पत्र स्वतंत्र और स्वेच्छा से दिया जाना चाहिए. इसे ठीक ढंग से व्यक्त किया जाना चाहिए.

इस्तीफा कैसे असर में आता है
इस्तीफे की घोषणा के बाद, यह तय तारीख से असर में आ जाता है. उस तारीख के बाद पोप का पद खाली माना जाता है.

नए पोप का चुनाव कैसे होता है
पोप के इस्तीफे के बाद, कार्डिनल्स की एक बैठक (कॉन्क्लेव) बुलाई जाती है, जहां नए पोप का चुनाव किया जाता है.ये प्रक्रिया पोप के मृत्यु पर भी प्रारम्भ होती है.

कार्डिनल्स की बैठक में क्या होता है
– 80 साल से कम उम्र के कार्डिनल्स को वोट देने का अधिकार होता है
– यह बैठक वेटिकन सिटी के सिस्टीन चैपल (Sistine Chapel) में होती है
– कॉन्क्लेव के दौरान पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से गुप्त रखी जाती है.
– कार्डिनल्स को बाहरी दुनिया से कोई संपर्क करने की अनुमति नहीं होती.

कौन होते हैं कार्डिनल्स
कार्डिनल्स (Cardinals) कैथोलिक चर्च के उच्चतम रैंक वाले पादरी होते हैं, जो पोप के सबसे करीबी सलाहकार और चर्च के प्रशासन में जरूरी किरदार निभाते हैं. इन्हें अक्सर “चर्च के राजकुमार” (Princes of the Church) बोला जाता है. कई कार्डिनल वेटिकन के विभागों और आयोगों के प्रमुख होते हैं. ये विभाग चर्च के वैश्विक संचालन में सहायता करते हैं. ये बड़े धार्मिक पर्वों और आयोजनों में एक्टिव किरदार निभाते हैं. जरूरी वैश्विक चर्च सम्मेलनों में अगुवाई करते हैं.

पोप ही कार्डिनल्स को नियुक्त करते हैं. आमतौर पर वे पहले से ही आर्चबिशप या बिशप होते हैं. कार्डिनल बनने के बाद, उन्हें खास लाल रंग की टोपी (“बिरेटा”) दी जाती है, जो उनके बलिदान और निष्ठा का प्रतीक होती है. पूरे विश्व में 230 कार्डिनल्स होते हैं

वोटिंग प्रक्रिया
पोप चुनने के लिए कार्डिनल्स को 2/3 बहुमत की आवश्यकता होती है. वोटिंग दिन में कई बार हो सकती है, जब तक बहुमत नहीं मिलता. हर वोटिंग राउंड के बाद बैलेट्स को जलाया जाता है. पोप का चुनाव आज भी पूरी तरह मैनुअल वोटिंग से होता है. चिमनी से यदि काला धुआं उठता है, उसका मतलब नया पोप नहीं चुना गया. सफेद धुआं का मतलब है – नया पोप चुन लिया गया है.

तब घोषणा होती है
जैसे ही पोप का चुनाव होता है, वेटिकन की बालकनी से घोषणा की जाती है – “Habemus Papam” (लैटिन में इसका मतलब है “हमारे पास पोप है”). इसके बाद नया पोप बालकनी में आकर जनता को आशीर्वाद देता है

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