अंतर्राष्ट्रीय

अनगिनत परमाणु बमों का निर्माण कर रहा है China

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपती जो बाइडेन ने मार्च 2024 में एक गोपनीय न्यूक्लियर प्लान पर हस्ताक्षर किया था. इसके अनुसार अमेरिका की न्यूक्लियर स्ट्रैजर्जी का फोकस पहली बार रूस की बजाए चीन पर रखा गया है. दरअसल, अमेरिका को संभावना है कि चीन तेजी से न्यूक्लियर हथियारों का स्टॉक बढ़ा रहा है और वो आगे भी निकल सकता है. इसलिए बाइडेन ने फौज को आदेश दिया कि वो रूस, चीन और नार्थ कोरिया ध्यान में रखकर न्यूक्लियर प्लान तैयार करे.
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किसके पास कितने परमाणु बम?
आज दुनिया के पास पहले के मुकाबले कई गुना अधिक क्षमता वाले परमाणु बम हैं. ऐसे में परमाणु युद्ध के बाद की तस्वीर भयावह होगी. दुनिया में कई राष्ट्रों के पास परमाणु हथियार उपस्थित हैं. इस रेस में सबसे आगे रूस और अमेरिका हैं.
रूस- 4380 परमाणु हथियार
अमेरिका- 3708 परमाणु हथियार
फ्रांस- 290 परमाणु हथियार
चीन- 500 परमाणु हथियार
ब्रिटेन- 225 परमाणु हथियार
इस्राइल- 90 परमाणु हथियार
पाकिस्तान- 170 परमाणु हथियार
भारत- 172 परमाणु हथियार
उत्तर कोरिया- 50 परमाणु हथियार
चीन और पाक ने अधिक एटमी हथियार जोड़े
चीन और पाक ने हिंदुस्तान के मुकाबले तेजी से अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाई है. स्वीडन के चिक टैंक Stockholm International Peace Research Institute यानी SIPRI ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है. रिपोर्ट कहती है कि 2022 में चीन ने अपने जखीरे में 60 और पाक ने 5 एटमी हथियार जोड़े हैं. इस दौरान हिंदुस्तान ने 4 नए एटमी हथियार बनाए है. तीसरा वर्ष है जब चीन ने एटमी हथियारों पर खर्च बढ़ाया.
2030 तक अमेरिका को पीछे छोड़ने की होड़ में चीन
19 अगस्त को एक राज्य परिषद की बैठक के दौरान, चीनी पीएम ली कियांग ने जियांग्सू, शेडोंग, गुआंग्डोंग, झेजियांग और गुआंग्शी के तटीय प्रांतों में 11 परमाणु रिएक्टरों को स्वीकृति दी, जिसमें अनुमानित कुल निवेश 33.3 बिलियन $ था. ताजा डेवलपमेंट हालिया दिशानिर्देश में उल्लिखित चीन के व्यापक हरित संक्रमण लक्ष्यों के अनुरूप है, जिसने ऊर्जा-गहन उद्योगों को डीकार्बोनाइजिंग करने और स्वच्छ ऊर्जा आधारों के निर्माण के लिए पवन, सौर और जल विद्युत के साथ-साथ तटीय परमाणु ऊर्जा की पहचान की है. जुलाई 2024 तक, चीन की परमाणु ऊर्जा परिचालन क्षमता उसे दूसरे जगह पर उपस्थित फ्रांस से पीछे है, लेकिन विस्तार की उसकी महत्वाकांक्षी योजनाएं राष्ट्र को 2030 तक संभावित रूप से फ्रांस और संयुक्त राज्य अमेरिका (वर्तमान में परमाणु ऊर्जा के शीर्ष उत्पादक) दोनों से आगे निकलने की स्थिति में रखती हैं.
क्या हो यदि दोनों में छिड़ जाए जंग
अमेरिका-चीन के बीच परमाणु लड़ाई हो तो अमेरिका के सहयोगी की किरदार बढ़ जाएगी. उनपर खतरा भी अधिक होगा. चीन जापान या ऑस्ट्रेलिया जैसे अमेरिकी सहयोगियों के विरुद्ध परमाणु बल का इस्तेमाल कर सकता है, ताकि अमेरिकी गठबंधन नेटवर्क को कमजोर किया जा सके. अमेरिका और चीन के बीच परमाणु जंग का दुनिया पर असर विध्वंसक होगा. इससे पूरी मानव जाति को खतरा होगा.

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