चीन ने भारत के समर्थन में बोलना किया शुरू
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकी के बाद अब चीन ने हिंदुस्तान के समर्थन में कहना प्रारम्भ कर दिया है. वहां के विदेश मंत्री ने बोला कि यदि आप उनको एक इंच देंगे तो वो पूरा मील ले लेंगे. दरअसल, हिंदुस्तान में चीन के राजदूत शू फेआंग ने अमेरिका को खुलेआम बुली यानी गुंडा बोला है. एक्स पर उन्होंने एक पोस्ट किया और इंच और मील वाली बात लिखी. उन्होंने नाम तो नहीं लिया लेकिन लोग समझ गए कि उनका इशारा अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप की तरफ था. उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी के हवाले से बोला कि अमेरिका की टैरिफ-फर्स्ट रणनीति दुनिया के ट्रेड सिस्टम को खतरे में डाल रही है. वांग यी ने हाल ही में ब्राजील के राष्ट्रपति सलाहकार सेल्सा अमोरीन से बात की थी. उन्होंने उसी वार्ता में बिना अमेरिका का नाम लिए बोला था कि टैरिफ को हथियार बनाकर इस्तेमाल करना दूसरों को दबाने की रणनीति है जो यूनाइटेड स्टेट चार्टर और वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन के नियमों के विरुद्ध है. वार्ता में वांग यी ने ये भी बोला कि अमेरिका की इस बुलिंग नीति के विरुद्ध चीन का पूरा समर्थन है.
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चीन ने हिंदुस्तान पर टैरिफ लगाने की अमेरिकी घोषणा का विरोध किया है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने अपनी प्रेस वार्ता में मीडिया के प्रश्नों का उत्तर देते हुए इस कदम को ‘टैरिफ का दुरुपयोग’ बताया. जब उनसे हिंदुस्तान द्वारा रूसी ऑयल की खरीद पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने के ट्रंप के कार्यकारी आदेश पर टिप्पणी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “टैरिफ के दुरुपयोग के प्रति चीन का विरोध लगातार और साफ है. उन्होंने बोला कि चीन, अमेरिका द्वारा तकनीक और व्यापार के मुद्दों का राजनीतिकरण करने और उन्हें दुर्भावनापूर्ण रूप से चीन की नाकेबंदी करने और उस पर धावा करने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का विरोध करता है. अमेरिका को चीनी नागरिकों के वैध और कानूनी अधिकारों और हितों की ईमानदारी से रक्षा करनी चाहिए.
ट्रम्प के आदेश की राष्ट्र के भीतर आलोचना हुई क्योंकि हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के डेमोक्रेट्स ने चेतावनी दी कि ट्रम्प के कार्यों से सावधानीपूर्वक विकसित किए गए अमेरिका-भारत संबंधों को खतरा है. एक्स पर एक पोस्ट में हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के डेमोक्रेट्स ने कहा, “आरएम ग्रेगरी मीक्स: ट्रम्प के नवीनतम टैरिफ नखरे ने एक मजबूत अमेरिका-भारत साझेदारी बनाने के लिए सालों के सावधानीपूर्वक किए गए काम को खतरे में डाल दिया है. हमारे बीच गहरे रणनीतिक, आर्थिक और लोगों के बीच संबंध हैं. चिंताओं को हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप पारस्परिक रूप से सम्मानजनक ढंग से संबोधित किया जाना चाहिए.

