अंतर्राष्ट्रीय

चीन की चाल फेल, प्रचंड को सैन्य गठबंधन में शामिल नहीं कर पाए जिनपिंग

नेपाल के पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड  चीन के आधिकारिक दौरे पर हैं इस दौरे के दौरान चीन कई अहम मसलों को लेकर नेपाल पर दबाव डालकर विश्वास में लेकर हामी भराना चाहता था, लेकिन इसमें अब तक सफल नहीं हो पाया है चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से लेकर चीन के पीएम ली कियांग तक से नेपाली पीएम प्रचंड ने मुलाकात की इस दौरान अब तक चीन को नेपाल से कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिल पाई है बीआरआई ही नहीं, नेपाल सेना गठबंधन यानी जीएसआई में शामिल हो जाए, इसके लिए चीन काफी कोशिश कर रहा था लेकिन ऐसा नहीं हो पाया Newsexpress24. Com china download 2023 09 27t193751. 244
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प्रचंड का चीन दौरा अभी जारी है चीन और नेपाल के बीच 13 सूत्री संयुक्‍त बयान जारी हुआ है खास बात यह है कि चीन और नेपाल के बीच किसी नए समझौते पर भी हस्‍ताक्षर नहीं हुआ यही नहीं चीन चाहता था कि नेपाल उसके सैन्‍य गठबंधन जीएसआई में शामिल हो जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ यही नहीं, बीआरआई पर भी चीन को कोई खास कामयाबी नहीं मिली

नेपाल ने ताइवान की स्वतंत्रता का किया खुलकर विरोध

प्रचंड की यात्रा में जो सबसे अहम पहलू निकलकर आया, वह है कि नेपाल ने ताइवान की स्‍वतंत्रता का विरोध खुलकर किया है इससे पहले तक नेपाल सिर्फ़ ‘वन चाइना पॉलिसी’ की बात करता था, अब वह ‘एक चीन सिद्धांत’ पर सहमत हो गया है एक चीन सिद्धांत कहता है कि चीन की गवर्नमेंट ही ताइवान का कानूनी प्रतिनिधित्‍व करती है इस बारे में नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री नारायण खडका का बोलना है कि ‘क्‍या पीएम प्रचंड ने चीनी संचालन से नक्‍शे का मामला उठाया जो राष्ट्र के क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा हुआ है? यदि उन्‍होंने ऐसा किया तो इसका संयुक्‍त बयान में जिक्र होना चाहिए था ताकि राष्ट्र को यह पता चलता

बीआरआई पर भी नहीं कोई बात

खड़का ने बोला कि प्रचंड की यह यात्रा बहुत साधारण रही है नेपाल और चीन के बयान में बीआरआई का जिक्र है और बोला गया है कि दोनों राष्ट्र योगदान को बढ़ाएंगे चीन बीआरआई के लिए लोन देना चाहता है लेकिन प्रचंड इसके लिए तैयार नहीं हुए प्रचंड ग्रांट की मांग कर रहे हैं चीन के काफी दबाव के बाद भी नेपाल ने जीएसआई को स्वीकृति नहीं दी संयुक्‍त बयान में जीएसआई का कोई जिक्र नहीं किया गया नेपाल ने साफ कर दिया कि जीएसआई एक सैन्‍य गठबंधन है जो उसकी गुटनिरपेक्षता की नीति का व‍िरोध करता है

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