हमास को सबक सिखाने के लिए लगातार गाजा पट्टी पर हमला
इजरायल और हमास के संघर्ष के बाद गाजा पट्टी में सब कुछ सामान्य नहीं रहा है। हमास के हमले के बाद जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने गाजा पट्टी को तहस नहस कर दिया है। आसमान में बारूद की महक है, सड़कें लाशों से पटी हैं। घर और इमारतें खंडहर में परिवर्तित हो गई हैं। इजरायल, हमास को सबक सिखाने के लिए लगातार गाजा पट्टी पर धावा कर रहा है। इजरायल का मानना है कि गाजा को तबाह कर वह हमास से अपना बदला पूरा कर लेगा। ऐतिहासिक परिदृश्य से देखें तो इजरायल और फिलिस्तीन के बीच यरुशलम को लेकर हमेशा जंग छिड़ी रहती है। ऐसे में गाजा पट्टी भी बीच-बीच में सुर्खियों में आता रहता है। हालिया जंग में इजरायल हमास से बदला लेने के लिए लगातार गाजा पर बम क्यों बरसा रहा है। मगर गाजा पर हमास का कब्जा क्यों है? इस प्रश्न का उत्तर ढूंढने के लिए आपको इतिहास के पन्नों को पलटना होगा। 
घनी जनसंख्या में से एक है गाजा पट्टी
गाजा पट्टी 40 किमी लंबी और 9.6 किमी चौड़ी भूमि की एक संकीर्ण पट्टी है, जिसकी सीमा पश्चिम में भूमध्य सागर, उत्तर पूर्व में इजरायल और दक्षिण में मिस्र से लगती है। गाजा पट्टी में फिलिस्तीन का सबसे बड़ा शहर गाजा भी शामिल है। गाजा, इजरायल से कांटेदार तार द्वारा अलग किया गया, यह दुनिया के सबसे घनी जनसंख्या वाले क्षेत्रों में से एक है। यह वाशिंगटन के आकार से लगभग दोगुना है।
गाजा एक प्राचीन व्यापारिक शहर और बंदरगाह शहर है। यह क्षेत्र लंबे समय तक फिलिस्तीन के भौगोलिक क्षेत्र का हिस्सा था। 20वीं सदी की आरंभ में गाजा में मुख्य रूप से अरब मुसलमान और ईसाई रहते थे। प्रथम विश्व युद्ध 1918 में खत्म हुआ। प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्किये और निकटवर्ती क्षेत्र ब्रिटिश कब्जे में आ गये। प्रथम विश्व युद्ध के बाद जब ब्रिटेन ने फिलिस्तीन पर कब्जा कर लिया, तो गजा के बुद्धिजीवी फिलिस्तीनी राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हो गए।
गाजा में कहां से आए लोग
इजरायल की स्थापना 1948 में पूरे विश्व में फैले यहूदी शरणार्थियों के लिए एक स्थायी राज्य बनाने के लिए की गई थी। संयुक्त देश के हस्तक्षेप से यह फैसला लिया गया कि फिलिस्तीन को तोड़कर इजरायल बनाया जाएगा। लेकिन अरब राष्ट्र इजरायल राज्य के भौगोलिक अस्तित्व से इनकार करते रहे। इसके तुरंत बाद संघर्ष प्रारम्भ हो गया। इजरायल के निर्माण के बाद, इजरायली सेना ने दक्षिणी फिलिस्तीन के 29 गांवों पर बमबारी की। परिणामस्वरूप, हजारों ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए गाजा की ओर भाग गए।
उस समय गाजा मिस्र की सेना के नियंत्रण में था, जिन्हें इजरायल के निर्माण के बाद वहां तैनात किया गया था। उस समय गाजा में शरण लेने वाले ग्रामीणों के कारण कम जनसंख्या वाला गाजा रातों-रात आबाद हो गया। 1967 में इजरायल और पड़ोसी अरब राष्ट्रों के बीच छह दिवसीय युद्ध के बाद गाजा इजरायल के नियंत्रण में आ गया। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक, इजरायली सेना ने गाजा पर कब्जा करने के बाद वहां रहने वाले नागरिकों पर अत्याचार करना जारी रखा। गाजा के लोगों को जबरन जमीन से हटाया गया। घरों में तोड़फोड़ के अतिरिक्त भिन्न-भिन्न सियासी विचारधाराओं के चलते कई लोगों की मर्डर भी की गई।
यरुशलम को लेकर होती रही जंग
इस बीच युद्ध के दोनों पक्षों फिलिस्तीन और इजरायल के बीच यरुशलम पर अधिकार की लड़ाई भी चलती रही, क्योंकि यह शहर ईसाई, यहूदी और इस्लाम तीनों धर्मों के लिए पौराणिक और ऐतिहासिक कारणों से जरूरी है। जैसे-जैसे संघर्ष बढ़ता गया, यहूदी और अरब अपने राष्ट्रवाद को लेकर टकराते गए। ये दोनों राष्ट्र व्यावहारिक रूप से दो खेमों में बंटे हुए हैं। हालांकि, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे राष्ट्र हमेशा इजरायल के साथ खड़े रहे हैं।
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उसके बाद, इजरायल के कब्जे को खत्म करने और एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना की आशा में 1987 और 1991 और 2000 से 2005 के बीच फिलिस्तीन में दो लोकप्रिय उपद्रव हुए। फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) के प्रमुख यासिर अराफात ने लंबे समय तक इजरायल और पश्चिमी शक्तियों के साथ फिलिस्तीन के लिए वार्ताकार के रूप में काम किया है। लेकिन फिलिस्तीनी संघर्ष का निवारण न मिल पाने के कारण अराफात की सियासी स्वीकार्यता धीरे-धीरे कम होती गई। ऐसे में हमास ने फिलिस्तीन के सियासी मंच पर तेजी से लोकप्रियता हासिल कर ली। हमास 1988 में सुन्नी मुसलमान संगठन ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ की सियासी शाखा के रूप में उभरा। इन सशस्त्र बलों ने गाजा में बेस बनाकर अपनी गतिविधियां प्रारम्भ कीं।
हमेशा से सुर्खियों में रहा हमास
हमास अपनी स्थापना के बाद से ही इजरायल के विरुद्ध गुप्त हमलों को लेकर सुर्खियों में रहा है। हमास पर चरमपंथ भड़काने का इल्जाम लगाया गया है। हमास के हमले से विचलित होकर इजरायल ने 2005 में गाजा से अपनी सेना हटा ली। हमास के बारे में सैकड़ों आलोचनाओं और विवादों के बावजूद, 2006 के फिलिस्तीनी चुनावों में सशस्त्र बलों को भारी जन समर्थन मिला। जिससे भू-राजनीतिक जगत को यह संदेश जाता है कि हमास ने स्वयं को अरब राष्ट्रवाद के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में स्थापित कर लिया है। 2006 के चुनावों के तुरंत बाद, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के प्रशासन ने हमास को बाहर करने के लिए विपक्षी जीत समूह का समर्थन किया। लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।
2007 में, हमास और एक अन्य फिलिस्तीनी सशस्त्र समूह, जीत के बीच एक संक्षिप्त संघर्ष के बाद हमास ने गाजा पट्टी पर पूर्ण नियंत्रण ले लिया। तब से गाजा हमास के प्रशासनिक नियंत्रण में है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका समेत कई राष्ट्र बार-बार दावा करते रहे हैं कि गाजा इजरायल का हिस्सा है। मार्च 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, 45 फीसदी गाजा वासी हमास का समर्थन करते हैं। गाजा पट्टी में 2 मिलियन से अधिक लोग रहते हैं। गाजा के लगभग एक तिहाई निवासी मूल निवासी हैं। बाकी एक तिहाई वो लोग हैं जो 1948 में अपनी जान बचाने आये थे। गाजा की लगभग आधी जनसंख्या 18 साल से कम उम्र की है। गरीबी रेट 53 फीसदी है। यह दुनिया के उन जगहों में से एक जहां बेरोजगारी रेट बहुत अधिक है।

