अंतर्राष्ट्रीय

घातक भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर हुई 2,056

भयानक भूकंप से कई इमारतें ढह गईं और शहर के हवाई अड्डे जैसे अन्य बुनियादी ढांचों को भारी हानि पहुंचा. टूटी हुई सड़कें, गिरे हुए पुल, संचार-व्यवस्था में गड़बड़ी और गृहयुद्ध के बीच राष्ट्र में काम करने की चुनौतियों के कारण राहत कार्य बाधित हुए हैं. क्षेत्रीय लोग बिना भारी उपकरणों की सहायता के जीवित बचे लोगों की तलाश में जुटे हैं और 41 डिग्री सेल्सियस की गर्मी में हाथों और फावड़ों से मलबा हटाने को विवश हैं.
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म्यांमार में 28 मार्च को आए खतरनाक भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,056 हो गई है, जबकि 3,900 से अधिक लोग घायल हुए हैं और लगभग 270 अन्य लापता हैं. म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले की सड़कों पर पड़े शवों से अब भयानक दुर्गंध फैलनी प्रारम्भ हो गयी है और उधर लोग अब भी अपने परिजनों की खोज में हाथों से मलबा हटाने में जुटे हुए हैं. राष्ट्र में आये 7.7 तीव्रता के भूकंप का केंद्र मांडले के पास था. इस भयानक भूकंप से कई इमारतें ढह गईं और शहर के हवाई अड्डे जैसे अन्य बुनियादी ढांचों को भारी हानि पहुंचा. टूटी हुई सड़कें, गिरे हुए पुल, संचार-व्यवस्था में गड़बड़ी और गृहयुद्ध के बीच राष्ट्र में काम करने की चुनौतियों के कारण राहत कार्य बाधित हुए हैं. क्षेत्रीय लोग बिना भारी उपकरणों की सहायता के जीवित बचे लोगों की तलाश में जुटे हैं और 41 डिग्री सेल्सियस की गर्मी में हाथों और फावड़ों से मलबा हटाने को विवश हैं.

रविवार दोपहर को आए 5.1 तीव्रता के झटकों के बाद सड़कों पर उपस्थित लोगों में चीख-पुकार मच गई. हालांकि थोड़ी देर बाद फिर से काम प्रारम्भ हो गया. मांडले में रहने वाले 15 लाख लोगों में से कई लोगों ने रात सड़कों पर बिताई. बहुत से लोग भूकंप के कारण बेघर हो गए हैं. भूकंप ने पड़ोसी राष्ट्र थाईलैंड को भी हिलाकर रख दिया और वहां कम से कम 17 लोगों की मृत्यु हो गयी. मांडले के क्षेत्रीय लोगों को इस बात की चिंता है कि लगातार आने वाले झटकों के कारण अस्थिर इमारतें ढह सकती हैं. म्यांमा में ‘कैथोलिक रिलीफ सर्विसेज’ की यांगून इकाई के प्रबंधक कैरा ब्रैग ने कहा कि अब तक म्यांमा में 1,644 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और 3,408 लोग घायल हुए हैं.

उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में अब तक बचाव कार्य नहीं हो पाया है और अब तक कई इलाकों में लोग हाथों से मलबा हटाने में लगे हैं. म्यांमा में विदेशी सहायता पहुंचना प्रारम्भ हो गयी है. दो भारतीय सी-17 सैन्य परिवहन विमान शनिवार देर रात नेपीताव में उतरे, जिसमें सेना का एक चिकित्सा दल और कुछ 120 कर्मी सवार थे. म्यांमा के विदेश मंत्रालय के अनुसार, ये भारतीय दल 60 बिस्तरों वाला इमरजेंसी इलाज केंद्र बनाने के लिए उत्तर मांडले पहुंचेंगे. हिंदुस्तान की ओर से अन्य सहायता म्यांमार के सबसे बड़े शहर यांगून भी पहुंच गयी है. यांगून अन्य राष्ट्रों द्वारा भेजी जा रही सहायता का केंद्र है.

 

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