डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों को की कड़ी आलोचना
Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस से अपने संबंध बेहतर करने में लगे हुए हैं। हाल ही में दोनों ट्रंप ने रूसी प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन से यूक्रेन युद्ध को लेकर वार्ता की थी। वहीं, हाल ही में व्हाइट हाउस में यूक्रेन के प्रेसिडेंट वोलोदिमीर जेलेंस्की और अमेरिकी प्रेसिडेंट में तीखी बहस हो गई थी। दोनों नेताओं के बीच इस बहस पर पूरे विश्व के नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी। लेकिन, इस बीच अब डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय राष्ट्रों को कड़ी आलोचना कर दी है। उन्होंने बोला कि वे यूक्रेन की सहायता करने से अधिक पैसा रूसी ऑयल और गैस खरीदने में खर्च कर रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस पार्टी को संबोधित करते हुए यह बात कही और यूक्रेन युद्ध पर अपना रुख साफ किया। इससे पहले हिंदुस्तान ने भी यूरोप के ‘दोहरे मापदंड’ पर प्रश्न उठा चुके हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘यूरोप ने रूसी ऑयल और गैस खरीदने में कहीं अधिक पैसा लगाया है, जबकि यूक्रेन की रक्षा के लिए उनका सहयोग बहुत कम है।‘ उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने अब तक सैकड़ों अरब $ यूक्रेन को समर्थन देने में खर्च किए हैं, लेकिन यह बिना किसी सुरक्षा और गारंटी के हो रहा है। ट्रंप ने प्रश्न किया कि ‘क्या हम इसे अगले पांच वर्ष तक जारी रखना चाहते हैं?’ ट्रंप ने दावा किया कि हर सप्ताह 2,000 लोग मारे जा रहे हैं और कहा, ‘ये रूसी युवा हैं, ये यूक्रेनी युवा हैं, लेकिन वे अमेरिकी नहीं हैं। मैं चाहता हूं कि यह जंग रुके।‘
यूरोप या अमेरिका।। कौन कितना सहायता कर रहा है?
ट्रंप ने बोला कि अमेरिका ने यूक्रेन को करीब 350 अरब $ की सहायता दी है, जबकि यूरोप ने केवल 100 अरब $ का सहयोग दिया है। उन्होंने यूरोपीय राष्ट्रों की आलोचना करते हुए कहा, ‘हमारे और उनके बीच एक महासागर है, जबकि यूरोप को यह जंग सीधे प्रभावित कर रहा है। फिर भी वे इतनी कम सहायता कर रहे हैं।‘
क्या ट्रंप ने अपनाया जयशंकर का नजरिया?
ट्रंप पहले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्होंने यूरोप के ‘दोहरे मापदंड’ पर प्रश्न उठाए हैं। इससे पहले हिंदुस्तान के विदेश मंत्री एस। जयशंकर ने भी कई बार इस मामले पर यूरोप को कटघरे में खड़ा किया है। जयशंकर ने बोला था कि ‘यूरोप अपने ऊर्जा जरूरतों को अहमियत देता है, लेकिन हिंदुस्तान से कुछ अलग करने की आशा करता है, यह गलत है।‘ उन्होंने यह भी कहा था कि ‘यूरोपीय संघ रूस से हिंदुस्तान के मुकाबले छह गुना अधिक ऑयल खरीदता है। यहां तक कि उनका कोयला आयात भी हिंदुस्तान से 50% अधिक है।‘ जयशंकर का बोलना था कि ‘यूरोप को अपने हितों के लिए निर्णय लेने का अधिकार है, लेकिन हिंदुस्तान को भी अपने हितों को देखते हुए फैसला लेने का पूरा अधिकार है।‘
यूक्रेन शांति वार्ता के लिए तैयार?
ट्रंप ने अपने भाषण में खुलासा किया कि उन्हें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की तरफ से एक पत्र मिला है, जिसमें उन्होंने बोला है कि ‘यूक्रेन शांति वार्ता के लिए तैयार है और जल्द ही इसे प्रारम्भ करना चाहता है।‘ ट्रंप ने ज़ेलेंस्की का पत्र पढ़ते हुए कहा, ‘यूक्रेन इस युद्ध को खत्म करने के लिए तैयार है। कोई भी शांति को हमसे अधिक नहीं चाहता। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि रूस भी शांति वार्ता के लिए तैयार है।
ट्रंप-ज़ेलेंस्की टकराव और अमेरिका की नाराजगी
हाल ही में वाशिंगटन में ट्रंप और ज़ेलेंस्की के बीच तनाव बढ़ गया था। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ज़ेलेंस्की पर अमेरिकी सहायता के लिए कृतज्ञता न दिखाने का इल्जाम लगाया था। ट्रंप ने भी यूक्रेन की वार्ता की स्थिति पर नाराजगी जताई थी। इस टकराव के कारण ज़ेलेंस्की ने वाशिंगटन में ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ‘खनिज और सुरक्षा समझौते’ पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। इस समझौते के अनुसार अमेरिका को यूक्रेन के प्राकृतिक संसाधनों पर अधिक नियंत्रण मिल सकता था।
अमेरिका की नयी नीति
ट्रंप ने यूक्रेन को दी जा रही अमेरिकी सहायता की समीक्षा करने के संकेत दिए हैं। हालांकि, उन्होंने बोला कि यदि यूरोप स्वयं को अहमियत देता है, तो अमेरिका को भी अपने हितों को देखना होगा।

