अंतर्राष्ट्रीय

दक्षिण अफ्रीका से खफा हो गए डोनाल्ड ट्रंप

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण अफ्रीका के लिए अमेरिकी वित्तीय सहायता में कटौती करने के एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए. उन्होंने इस सप्ताह की आरंभ में ऐसा करने की धमकी दी थी.

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व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को कहा, भूमि नीति और वाशिंगटन के सहयोगी इजरायल के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में नरसंहार मुकदमा दाखिल की करने की वजह से यह कदम उठाया गया.

ट्रंप का इल्जाम है कि दक्षिण अफ्रीका का नया भूमि कानून लोगों के अधिकारों का उल्लंघन करता है.

अमेरिकी गवर्नमेंट के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वाशिंगटन ने 2023 में दक्षिण अफ्रीका को लगभग 440 मिलियन $ की सहायता आवंटित की थी.

व्हाइट हाउस ने बोला कि वाशिंगटन श्वेत दक्षिण अफ्रीकी किसानों और उनके परिवारों को शरणार्थी के रूप में पुनर्वासित करने के लिए भी एक योजना तैयार करेगा.

इसमें बोला गया कि अमेरिकी अधिकारी दक्षिण अफ्रीका में अफ्रीकैनर्स के लिए यूनाइटेड स्टेट्स रिफ्यूजी एडमिशन प्रोग्राम के जरिए प्रवेश और पुनर्वास सहित मानवीय राहत को अहमियत देने के लिए कदम उठाएंगे. अफ्रीकैनर्स दक्षिण अफ्रीका में शुरुआती डच और फ़्रांसीसी बसने वालों के श्वेत वंशज हैं.

ट्रंप ने बिना किसी सबूत का हवाला दिए बोला कि दक्षिण अफ्रीका जमीन बरामद कर रहा है और कुछ खास वर्ग के लोगों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया जा रहा है.

दक्षिण अफ्रीका में जन्मे अरबपति एलन मस्क, [जो ट्रंप के करीबी हैं], ने बोला कि गोरे दक्षिण अफ्रीकी नस्लवादी स्वामित्व कानूनों के शिकार रहे हैं.

दक्षिण अफ़्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने कानून का बचाव करते हुए बोला कि इसका मकसद जनहित में भूमि अधिग्रहण करना आसान बनाना था. उन्होंने बोला कि गवर्नमेंट ने कोई जमीन बरामद नहीं की और नीति का उद्देश्य अश्वेत-बहुल देश में भूमि स्वामित्व में नस्लीय असमानताओं को दूर करना है.

रामफोसा ने बोला कि दक्षिण अफ्रीका को धमकाया नहीं जा सकता.

वाशिंगटन, दक्षिण अफ्रीका की तरफ से अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में दाखिल उस मुकदमा से भी नाराज था जिसमें गाजा सैन्य हमले को लेकर इजरायल पर नरसंहार का इल्जाम लगाया गया.

इजरायल ने आरोपों से इनकार करते हुए बोला कि उसने 7 अक्टूबर, 2023 को फिलिस्तीनी हमास के खतरनाक हमले के बाद आत्मरक्षा में कार्रवाई की.

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